मध्यप्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन यानी MPPSC की प्रीलिम्स परीक्षा में इस बार काफी बदलाव देखने को मिलेंगे। पहली बार अभ्यर्थियों को एग्जाम शुरू होने के 90 मिनट पहले एग्जाम सेंटर पर पहुंचना होगा। वहीं पहली बार नेगेटिव मार्किंग भी होगी। आयोग के अनुसार, यह बदलाव परीक्षा में पारदर्शिता और सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया है। अभ्यर्थियों को थ्री लेयर सिक्योरिटी से गुजरना होगा MPPSC की नई गाइडलाइन के अनुसार केंद्रों पर अभ्यर्थियों को थ्री लेयर सिक्योरिटी से गुजरना होगा। इसमें हर उम्मीदवार को 5 से 7 मिनट का समय लगेगा, इसी कारण एग्जाम सेंटर आने का समय 90 मिनट पहले किया गया है। पहले यह समय 45 मिनट पहले था। वहीं परीक्षा शुरू होने से 30 मिनट पहले ही केंद्रों के प्रवेश द्वार बंद कर दिए जाएंगे। नए नियमों से एग्जाम में गड़बड़ी रोकने और सुरक्षा बढ़ाने पर जोर नेशनल एजुकेटेड यूथ यूनियन के राष्ट्रीय कोर कमेटी के सदस्य राधे जाट ने बताया कि 2024 में हम CM से मिले थे। हमने कहा था कि एग्जाम के दौरान कई बार गड़बड़ी होती है, जैसे कोई दूसरा व्यक्ति आकर बैठ जाता है। एडमिट कार्ड किसी का होता है और फोटो किसी का। तब CM ने बदलाव करने का आश्वासन दिया था। 26 अप्रैल को होने वाली एग्जाम में नए नियम लागू किए जा रहे हैं, जो सिक्योरिटी के लिहाज से काफी अच्छे हैं। जानिए कैसे होगी अब थ्री लेयर चेकिंग बता दें कि अभ्यर्थियों द्वारा भी थ्री लेयर सिक्योरिटी चेकिंग की मांग लंबे समय से की जा रही थी। राज्य सेवा परीक्षा के लिए 155 और राज्य वन सेवा के लिए 36 पद भर्ती प्रक्रिया के तहत राज्य सेवा परीक्षा के लिए 155 और राज्य वन सेवा के लिए 36 पद हैं। आवेदन प्रक्रिया में करीब 1 लाख 35 हजार अभ्यर्थियों ने पंजीयन कराया है। एडमिट कार्ड 16 अप्रैल से जारी होंगे, जबकि परीक्षा 26 अप्रैल को आयोजित होगी। परीक्षा के लिए मप्र के 54 जिलों में केंद्र बनाए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि सभी केंद्रों पर एक जैसी सुरक्षा और जांच व्यवस्था लागू रहेगी। परीक्षा दो चरणों में होगी। पहला पेपर सुबह 10 से 12 बजे तक सामान्य अध्ययन का होगा। इसके बाद दूसरा पेपर दोपहर 2:15 से 4:15 बजे तक सामान्य अभिरुचि (विषय आधारित) का आयोजित किया जाएगा। गलत उत्तर के लिए 1/3 अंक काटे जाएंगे MPPSC ने 2026 की प्रारंभिक परीक्षा में पहली बार नेगेटिव मार्किंग लागू की है। अब प्रत्येक गलत उत्तर के लिए 1/3 अंक काटे जाएंगे। इसका मतलब है कि तीन गलत उत्तर एक सही उत्तर के अंक (3 अंक) को खत्म कर देंगे। यह बदलाव परीक्षा के प्रीलिम्स चरण में 3R-W (3 मार्क्स सही, 1 गलत) पद्धति के तहत लागू किया गया है। एग्जाम एक्सपर्ट्स का कहना है कि हाल के वर्षों में अधिकांश प्रतियोगी परीक्षाओं में नेगेटिव मार्किंग का प्रावधान बढ़ाया जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल परीक्षार्थियों की संख्या घटाना नहीं, बल्कि गंभीर और अच्छी तैयारी करने वाले कैंडिडेट्स को छांटना है। नेगेटिव मार्किंग से नॉन सीरियस अभ्यर्थी होंगे बाहर एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बिना तैयारी के केवल अनुमान के आधार पर सवाल हल करने वाले नॉन सीरियस अभ्यर्थी ज्यादा गलत उत्तर देते हैं। नेगेटिव मार्किंग लागू होने से ऐसे अभ्यर्थियों को नुकसान होता है, जिससे वे प्रीलिम्स में ही बाहर हो जाते हैं। इससे मेन्स तक पहुंचने वाले उम्मीदवारों की गुणवत्ता बेहतर होती है।
