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9.40 करोड़ का इंजेक्शन बचा सकता है मासूम की जान:दो महीने की सृष्टि को स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी; पिता बोले- बेटी की मदद करें

मंदसौर जिले का एक छोटा सा कस्बा गरोठ इन दिनों एक ऐसी मासूम की जिंदगी के लिए दुआएं मांग रहा है, जिसकी सांसें करोड़ों रुपए के इंजेक्शन पर टिकी हैं। दो महीने की सृष्टि ‘स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी’ (SMA) नाम की दुर्लभ बीमारी से जूझ रही है। इलाज के लिए लगने वाले इंजेक्शन की कीमत करीब 9.40 करोड़ रुपए है। गरोठ की गुप्तेश्वर कॉलोनी में रहने वाले गौरव सोनी के घर 3 साल की मन्नत के बाद इसी साल जनवरी में सृष्टि का जन्म हुआ था। परिवार खुश था कि मां दुधाखेड़ी ने उनकी सुन ली, लेकिन यह खुशी महज चंद हफ्तों में ही गम में बदल गई। दैनिक भास्कर ने बच्ची के घर जाकर परिजनों से बात की। पढ़िए रिपोर्ट… पंचर दुकान चलाते हैं पिता सृष्टि के पिता गौरव और दादा अनिल सोनी नगर में ही सड़क किनारे गुमटी में साइकिल और बाइक का पंचर बनाने का काम करते हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि जिस परिवार की जमापूंजी और महीने की कमाई घर के राशन में सिमट जाती हो, उनके लिए इतनी बड़ी रकम किसी पहाड़ से भी भारी है। गौरव ने बताया कि बेटी का जन्म 18 फरवरी 2026 में हुआ था। इसके 8-10 दिन बाद से उसमें इस बीमारी के लक्षण नजर आने लगे। उसे सांस लेने में दिक्कत होने लगी और उसके हाथ-पैर ढीले पड़ने लगे तो हम कोटा दिखाने ले गए। वहां से ट्रीटमेंट के लिए एक रिपोर्ट कराने को कहा, जो इंदौर में हुई। जैसे ही सैंपल की रिपोर्ट आई, तो हम उसे राजस्थान में जयपुर में जेके अस्पताल ले गए। यहां 22 मार्च को डॉक्टर ने SMA Type-1 बिमारी के बारे में बताया। गौरव ने कहा- बच्ची को दूध पीने और हाथ-पैर चलाने में दिक्कत आ रही है। उसे सांस भी ठीक से नहीं ले पाती है। मन्नतें मांगकर पाया, मासूम को बचाए सरकार सृष्टि की मां पूजा सोनी ने बताया शादी के तीन साल बाद मन्नतों से जन्मी मेरी बेटी ‘सृष्टि’ आज ऐसी हालत में है कि वह ठीक से दूध तक नहीं पी पा रही। हमने बहुत मन्नतें मांगकर इसे पाया था, लेकिन अब वही खुशी हमें तिल-तिल कर तड़पा रही है। वहीं दादा अनिल सोनी ने कहा- 3 साल के इंतजार के बाद घर में ‘लाडली लक्ष्मी’ आई, पर आज वह गंभीर बीमारी से जूझ रही है। मैं साइकिल रिपेयरिंग का काम करने वाला एक छोटा सा दुकानदार हूं, इंजेक्शन का खर्च उठाना मेरी शक्ति से बाहर है। सरकार से विनम्र प्रार्थना है कि ‘बेटी बचाओ’ के संकल्प को साकार करते हुए मेरी पोती को जीवनदान दें। मदद के लिए पीएम को लिखा पत्र गौरव सोनी ने मदद के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से आर्थिक सहायता के लिए गुहार लगाई है। पत्र में लिखा है कि वे एक गरीब परिवार से हैं। इतनी बड़ी राशि का इंतजाम करना नामुमकिन है। अपील की है कि मानवीय आधार पर उनकी बेटी को नया जीवन दिया जाए। गरोठ और मंदसौर के स्थानीय लोग भी मदद के लिए हाथ बढ़ा रहे हैं। वहीं, मासूम की सहायता के लिए गरोठ विधायक चंदरसिंह सिसौदिया ने सीएम को पत्र लिखकर मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान मद से राशि स्वीकृत करने की मांग की है। क्या है यह दुर्लभ बीमारी? डॉक्टरों ने बताया कि सृष्टि को SMA टाइप-1 है। यह एक ऐसी अनुवांशिक बीमारी है, जिसमें शरीर की नसें और मांसपेशियां धीरे-धीरे काम करना बंद कर देती हैं। इस बीमारी से पीड़ित बच्चा न तो ठीक से सिर उठा पाता है, न बैठ पाता है और उसे खाना निगलने और सांस लेने तक में तकलीफ होती है। डॉक्टरों का कहना है कि अगर समय रहते इसे ‘जोलगेन्स्मा’ (Zolgensma) नाम का इंजेक्शन नहीं लगा, तो इस बीमारी में बच्चों की जान को गंभीर खतरा रहता है। यह दुनिया की सबसे महंगी दवाओं में से एक है, जो अमेरिका से मंगवाई जाती है। इंदौर के शिशु रोग विशेषज्ञ और एमजीएम मेडिकल कॉलेज के पूर्व डीन डॉ. हेमंत जैन के मुताबिक दुर्लभ न्यूरो-मस्क्यूलर जेनेटिक बीमारी SMA में बच्चे की मांसपेशियां धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं। दिमाग और स्पाइनल कॉर्ड से मसल्स तक जाने वाले सिग्नल कम हो जाते हैं। इस बीमारी में स्पाइनल कॉर्ड की मोटर नर्व सेल्स डैमेज होने लगती हैं। दिमाग मसल्स को हिलाने-डुलाने के लिए संदेश भेज नहीं पाता। इसलिए बच्चा शरीर पर कंट्रोल खोने लगता है। शुरुआत में हाथ-पैर और शरीर हिलाने में कमजोरी दिखती है। समय के साथ बच्चा बैठना-चलना, यहां तक कि सांस लेना और निगलना भी मुश्किल हो सकता है। इस बीमारी के चलते शरीर की मांसपेशियों में कमजोरी आ जाती है। गंभीर स्थिति में लकवा या मौत भी हो जाती है। यह टाइप 1 से टाइप 4 तक की होती है, जो अलग-अलग उम्र के लोगों में होती है। एसएमए टाइप-1: यह अधिक गंभीर है। जो शून्य से दो साल तक के बच्चों में पाया जाता है। यह तेजी से रीढ़ की हड्‌डी में मौजूद मोटर न्यूरॉन्स को नष्ट कर देता है। 90% से ज्यादा बच्चों की मौत का कारण बनता है। एसएमए टाइप-2: यह 2 से 25 वर्ष की आयु तक 30% से अधिक रोगियों की मृत्यु का कारण बनता है। आप भी कर सकते हैं मदद अगर कोई सामाजिक संस्था या व्यक्ति इस परिवार की मदद करना चाहता है, तो वे सीधे पिता गौरव सोनी (8349303796) या दादा अनिल सोनी (9926027576) से संपर्क कर सकते हैं।

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