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केंद्र सरकार ने NCERT को डीम्‍ड यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया:खुद एंट्रेस लेने, कोर्स और सिलेबस डिजाइन करने, डिग्री देने की छूट मिली

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने नेशनल काउंसिल ऑफ़ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) को ‘डीम्ड यूनिवर्सिटी’ का दर्जा दिया। यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) की सलाह पर शिक्षा मंत्रालय ने 30 जनवरी को नोटिफिकेशन जारी कर इसकी घोषणा की। इस घोषणा के साथ ही NCERT के पांच रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन और भोपाल में सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ वोकेशनल एजुकेशन डीम्ड यूनिवर्सिटी बन गए हैं। ये यूनिट्स है- केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय, UGC की सलाह पर, नेशनल काउंसिल ऑफ़ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) को एक अलग श्रेणी के तहत ‘डीम्ड यूनिवर्सिटी’ (मानित विश्वविद्यालय) घोषित करता है।एक अधिसूचना में, मंत्रालय कहता है, “UGC पोर्टल पर नेशनल काउंसिल ऑफ़ एजुकेशनल अनुसंधान और प्रशिक्षण… pic.twitter.com/2Ar89jpYb0— ANI_HindiNews (@AHindinews) April 3, 2026 ‘डीम्ड यूनिवर्सिटी’ का क्या मतलब है NCERT को यह दर्जा मिलने का मतलब है कि NCERT अब सिर्फ स्कूल कोर्स डिजाइन करने तक सीमित नहीं है। NCERT अब अपने नए एकेडिमक प्रोग्राम्स के साथ ही डॉक्टरेट और नए डिग्री कोर्सेज भी लॉन्च कर सकता है। यूनिवर्सिटीज के अलावा हायर एजुकेशन के स्पेशलाइज्ड इंस्टीट्यूट्स को केंद्र सरकार UGC की सलाह पर ‘डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी’ का दर्जा देती है। स्कूल करिकुलम तैयार करने के लिए बनी NCERT NCERT एक ऑटोनोमस बॉडी है, जिसे 1 सितंबर 1961 को भारत सरकार ने सेंट्रल और स्टेट गवर्नमेंट्स को एकेडमिक और स्कूल से जुड़े मुद्दों पर सलाह देने और गाइड करने के लिए बनाया है।NCERT डीम्ड यूनिवर्सिटी बनने से पहले तक भारत में सर्वोच्च शैक्षणिक निकाय के रूप में काम करती थी। इसके मुख्य काम हैं-
नोटिफिकेशन के मुताबिक, UGC पोर्टल पर NCERT को एक स्पेशल केटेगरी के तहत ‘डीम्ड यूनिवर्सिटी’ का दर्जा देने के लिए एक ऑनलाइन आवेदन अपलोड किया गया था। ये आवेदन UGC एक्ट, 1956 के सेक्शन 3 के तहत NCERT के 6 इंस्टीट्यूशंस को इसमें शामिल किया गया था। ———————— ये खबरें भी पढ़ें… कवियित्री से कहानीकार बनीं ममता कालिया को साहित्‍य अकादमी मिला: लेखक का गुरूर तोड़ने को गद्य लिखा, 11 महीने बाद उसी से शादी की; जानें प्रोफाइल 31 मार्च को ममता कालिया को साहित्य अकादमी पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया गया। ये सम्मान 2021 में प्रकाशित उनके संस्मरण ‘जीते जी इलाहाबाद’ के लिए मिला है। पूरी खबर पढ़ें…

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