इंदौर के प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर में बन रहे भगवान गणेश के 7 किलो सोने के मुकुट का काम अटक गया है, क्योंकि जब इस काम की शुरुआत की गई थी। उस वक्त सोने की कीमत कम थी। मगर भाव और मजदूरी बढ़ने के कारण ये काम अटक गया है। इसके अलावा अन्य देवी-देवताओं के भी मुकुट अभी नहीं बन पाए हैं। आपको बता दें कि खजराना गणेश मंदिर में भगवान गणेश के नए सोने के मुकुट बनाने के लिए काम तेजी से किया गया था। मंदिर में जो पुराने मुकुट थे, जिनका इस्तेमाल कर और दानदाताओं के सहयोग से नए मुकुट तैयार किए जाने थे। इसके लिए एक समिति का भी गठन किया गया था। डिजाइन भी हो गई थी फाइनल मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित अशोक भट्ट ने बताया कि नए मुकुट को लेकर सभी कवायदे हो चुकी थी। एक समिति का भी गठन हो गया था। यहां तक की मुकुट की डिजाइन भी फाइनल हो गए थे। डिजाइन फाइनल करने के बाद उस वक्त चांदी में भगवान का मुकुट तैयार किया गया था, ताकि फाइनल डिजाइन तय करने और मुकुट की फिटिंग ली जा सके। चांदी का मुकुट बनाकर फिटिंग भी ले ली गई थी। जिसके बाद सोने का मुकुट तैयार किया जाना था। सोने की कीमत बढ़ने और मजदूरी बढ़ने से आ गए रुकावट उन्होंने बताया कि जिस वक्त ये काम होना था उस समय सोने की कीमत 65 से 70 हजार रुपए तोला था। मगर अचानक सोने के भाव बढ़ने लगे ओर सोना डेढ़ लाख रुपए तोला तक पहुंच गया। इस कारण मुकुट बनाने में रुकावट आ गई है। इस काम में जो दानदाता सहयोग कर रहे थे। मगर मजदूरी भी बढ़ गई। इस कारण अभी मुकुट का काम रुका हुआ है। इस काम की मजदूरी भी लगभग तीन गुना हो गई है। गणेश परिवार के लिए बनना थे स्वर्ण मुकुट पं.भट्ट ने बताया कि खजराना गणेश में भगवान गणेश, रिद्धि-सिद्धि, शुभ-लाभ ऐसे पांच सोने के मुकुट बनना थे। भगवान गणेश का सोने का मुकुट लगभग 7 किलो का बनना था। मंदिर प्रबंधन समिति के पास 5 किलो सोना उपलब्ध है। मगर सोने की कीमत बढ़ने से सोने के मुकुट का काम अटक गया है। बता दे कि खजराना गणेश मंदिर लाखों भक्ति की आस्था का केंद्र है। जहां रोजाना हजारों भक्त दर्शन करने के लिए दूर-दूर से आते हैं। दानदाताओं से की अपील इधर, सोने के मुकुट का काम पूरा कराने के लिए पं.भट्ट ने दानदाताओं से अपील की है कि वे खुलकर दान करें, ताकि ये प्रक्रिया दोबारा शुरू की जा सके और भगवान गणेश का सहित पांचों सोने के मुकुट तैयार हो सके। बता दें कि भगवान को स्वर्ण मुकुट और सोने की अन्य ज्वेलरी खास मौके पर ही पहनाई जाती है या कहा जाए कि भगवान का स्वर्ण श्रृंगार किया जाता है।
