भोपाल मेट्रो के अंडरग्राउंड रूट के लिए सोमवार से जमीन के अंदर 24 मीटर गहराई में खुदाई शुरू कर दी गई। टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) के जरिए कुल 3.39 किलोमीटर लंबी सुरंग की खुदाई होगी। इसी में दो स्टेशन भी बनेंगे। मेट्रो अफसरों की माने तो अगले 2 साल में अंडरग्राउंड रूट का काम पूरा कर लिया जाएगा। भोपाल में एम्स से करोंद चौराहे तक ऑरेंज लाइन का काम चल रहा है। सुभाषनगर से एम्स के बीच 6 किमी लंबा प्रायोरिटी कॉरिडोर है। जहां पर मेट्रो चल रही है। इसी लाइन के सेकंड फेज यानी, सुभाषनगर से करोंद के बीच काम चल रहा है। यहां पर मेट्रो अंडरग्राउंड भी गुजरेगी। जिसकी खुदाई की शुरुआत सोमवार से हो गई है। अफसरों की मौजूदगी में टीबीएम चालू की गई। यह रेड सी प्लाजा के पास से पुल पातरा की दिशा में आगे बढ़ेगी। दो स्टेशन, 180 मीटर रहेगी लंबाई
इस कॉरिडोर में भोपाल और नादरा, दो अंडरग्राउंड स्टेशन बनाए जा रहे हैं। जिनकी लंबाई करीब 180-180 मीटर होगी। टीबीएम से बनी सुरंग 3.39 किमी तक जाएगी। इसके बाद बड़ा बाग के पास नादरा स्टेशन के आगे 143 मीटर स्लोप के जरिए मेट्रो फिर जमीन के ऊपर आ जाएगी। पीवीपी से मापन होगा
अफसरों के अनुसार, जमीन के नीचे उतारी जा चुकी टीबीएम अब करीब 265 मीटर लंबा स्लोप (ढलान) बनाते हुए आगे बढ़ेगी। इसके बाद खुदाई शुरू होगी। इस दौरान आसपास की इमारतों पर असर न पड़े, इसके लिए पिक पार्टिकल वेलॉसिटी (पीपीवी) का लगातार मापन किया जाएगा और तय मानकों के भीतर ही वाइब्रेशन रखा जाएगा। 50 मीटर के बाद दूसरी टीबीएम
पहली मशीन जब करीब 50 मीटर तक सुरंग बना लेगी, उसके बाद दूसरी टीबीएम को भी लॉन्च किया जाएगा। इससे काम की गति तेज होगी और दोनों मशीनें समानांतर तरीके से सुरंग तैयार करेंगी। अंडरग्राउंड रूट और मेट्रो स्टेशन पर करीब साढ़े 7 सौ करोड़ रुपए खर्च होंगे। दो साल में काम पूरा करना है। जानिए… अंडरग्राउंड स्टेशन के तीनों फ्लोर पर कहां, क्या होगा 20 मीटर नीचे भी सामान्य तापमान
डक्ट सिस्टम से बड़े वेंटिलेशन फैन ताजी हवा अंदर भेजेंगे, ताकि तापमान जमीन के ऊपर जैसा बना रहे। प्री-कास्ट कॉन्क्रीट सेगमेंट से सुरंग की लाइनिंग की जाएगी। ताकि जमीन धंसने का खतरा कम रहे। स्टेशन पर फायर सेफ्टी, स्मोक मैनेजमेंट, इमरजेंसी एग्जिट की भी व्यवस्था रहेगी। यहां ग्रेड 2 से ग्रेड 4 तक की चट्टानें
