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प्रेमानंदजी से माफी मांगना चाहता है घर छोड़ने वाला बच्चा:बोला- मैंने उनकी बातों का गलत मतलब समझा; 1000 किमी यात्रा की पूरी कहानी

इंदौर की श्री कृष्ण विहार कॉलोनी का 15 वर्षीय रुद्र पांडे जब पिछले दिनों घर से निकला, तो किसी को कानो-कान खबर नहीं थी। उसने प्रेमानंदजी के वीडियो से प्र‌भावित होकर घर छोड़ने का फैसला लिया था। रुद्र मोबाइल घर छोड़ गया था, लेकिन अपने साथ ले गया था अटूट भक्ति। उसने माता-पिता के लिए एक चिट्‌ठी भी छोड़ी थी। हाल ही में पुलिस उसे ढूंढकर घर लेकर आई। दैनिक भास्कर के साथ विशेष बातचीत में रुद्र ने अपनी उस 1000 किलोमीटर की यात्रा का एक-एक पन्ना खोला, जो इंदौर के रेलवे स्टेशन से शुरू होकर हिमालय की रहस्यमयी पहाड़ियों तक जा पहुंचा। वो अब प्रेमानंदजी से माफी भी मांगना चाहता है, लेकिन क्यों? इस रिपोर्ट में पढ़िए- रुद्र ने बताया कि घर छोड़ने का फैसला अचानक नहीं था। मैंने 21 फरवरी को ही चिट्ठी लिख ली थी। उसे 20 दिनों तक छत की अटारी में छुपा कर रखा। 10वीं का आखिरी पेपर 6 मार्च को था, बस उसी का इंतजार था। चिट्ठी में लिखा था – मैं अपने असली परिवार (भगवान) के पास जा रहा हूं, मुझे ढूंढना मत। रुद्र बचपन से ही महाकाली का साधक है। वह कहता है, मुझे रोज मां सपने में दर्शन देती थीं। मुझे लगा कि गृहस्थी में रहकर भगवत प्राप्ति नहीं हो सकती। प्रेमानंद जी का वीडियो देखा कि वो 11 साल में घर छोड़ गए थे, तो मुझे लगा मैं भी कर सकता हूं। मैं काली मां की रोज पूजा करता हूं। मथुरा में रुका, संत से मिलने की कोशिश, फिर बढ़ा आगे रास्ते में वह मथुरा भी रुका। वहां उसने एक धार्मिक स्थल के दर्शन किए और संत से मिलने की कोशिश की, लेकिन भीड़ ज्यादा होने और ट्रेन का समय होने के कारण वह दूर से प्रणाम कर आगे बढ़ गया। इसके बाद वह ऋषिकेश पहुंचा और वहां से आगे कालीमठ जाने का रास्ता पता किया। उसने पहले से ही घर पर इंटरनेट के जरिए पूरा रूट समझ लिया था। ‘आधार कार्ड’ मांगा तो परिजन को लोकेशन मिली कालीमठ पहुंचकर रुद्र वहां के पुजारी से दीक्षा लेना चाहता था। लेकिन जब रहने के लिए कमरा मांगा, तो होटल वालों ने आधार कार्ड मांग लिया। बिना आधार के कमरा मिलना नामुमकिन था। यहीं रुद्र से चूक हो गई। उसने आधार कार्ड मंगवाने के लिए दर्शन करने आए एक शख्स के फोन से पिता को कॉल किया। फोन उठते ही पिता की भारी आवाज ने रुद्र को झकझोर दिया। पिता बोले- बेटा, बता कर जाते तो हम खुद छोड़ आते। परिवार ने तुरंत उसे वापस लाने का निर्णय लिया। रुद्र ने बताया कि फिर चाचा से उसकी बात हुई। चाचा ने पूछा कि पैसे भेज दूं? मैंने कहा कि पैसे की जरूरत नहीं है। बस आधार कार्ड भेज दो। उन्होंने कहा कि ठीक है मैं आधार कार्ड भेजता हूं।
चाचा के एक दोस्त टिहरी गढ़वाल में हैं। चाचा ने उन्हें मुझे पिक करने के लिए कहा। फिर पापा ने फोन पर वहां के पुजारी से बात की। मुझे कमरा दिया गया। पंडितजी ने खाना-पीना कराया। वहीं पूरी रात रहा। फिर सुबह उठा। तब तक गुप्तकाशी के पुलिस वाले वहां आ गए थे और मुझे लेकर चले गए। ऋषिकेश के उस संत ने बदला हृदय रुद्र को अपनी गलती का एहसास तब हुआ जब उसने त्रिवेणी घाट पर एक संत के प्रवचन सुने। संत ने कहा कि जो माता-पिता की सेवा नहीं करता, उसे गंगा नहाने का भी फल नहीं मिलता। तब मुझे समझ आया कि मैंने बिना अनुमति घर छोड़कर गलत किया है। भगवान अपनों को छोड़ने को नहीं कहते। आखिर अब क्या है रुद्र का लक्ष्य? पुलिस के संरक्षण में सुरक्षित घर लौटे रुद्र के विचार अब बदल चुके हैं। वह अब घर से भागकर नहीं, बल्कि घर में रहकर ही भगवान को पाना चाहता है। रुद्र का कहना है, अब मैं प्रेमानंद जी से मिलकर उनसे क्षमा मांगना चाहता हूं कि मैंने उनके वचनों को गलत तरीके से समझा। माता-पिता ने भी कह दिया है कि अगर मुझे भक्ति ही करनी है, तो वे खुद मुझे साथ लेकर जाएंगे। रुद्र ने कहा कि अब 12वीं तक अच्छे से पढ़ाई पूरी करना और फिर शास्त्रों का अध्ययन करना ही प्राथमिकता है। ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए घर में ही नाम जप करता रहूंगा। प्रेमानंद महाराज से मिलकर उनसे गलत समझने के लिए क्षमा मांगना चाहता हूं। हमें लगा शायद प्रेमानंदजी के पास गया है रुद्र के पिता अनिल पांडे ने बताया कि वे पेशे से टैक्सी ड्राइवर हैं और नियमित रूप से सुबह-शाम पूजा-पाठ करते हैं। उन्हें देखकर ही रुद्र में भी भक्ति की इच्छा जगी। वह काली माता का बड़ा भक्त है और कई-कई घंटों तक पूजा करता है। परिवार को हमेशा यही लगता था कि यह उसकी सामान्य धार्मिक प्रवृत्ति है, लेकिन वह मन ही मन कुछ और सोच रहा था। अनिल पांडे ने बताया कि जब रुद्र घर से गया, तो उसने एक चिट्ठी छोड़ी थी। उसमें लिखा था कि मोबाइल में उसकी असली भावना से जुड़े फोटो और चीजें देख लेना। जब परिवार ने मोबाइल चेक किया, तो उसमें संतों के प्रवचन, खासकर प्रेमानंद जी महाराज के वीडियो मिले। इससे उन्हें लगा कि रुद्र शायद उनसे मिलने गया होगा, लेकिन यह अंदाजा नहीं था कि वह सीधे उत्तराखंड तक पहुंच गया है। उन्होंने बताया कि उस समय परिवार काफी डरा हुआ था। आजकल बच्चों के बहकने और गलत संगत में पड़ने की घटनाएं सामने आती रहती हैं, ऐसे में चिंता थी कि कहीं बेटा किसी गलत व्यक्ति के संपर्क में न आ जाए। इसी बीच अचानक रुद्र का फोन आया, जिसमें उसने आधार कार्ड मंगवाने की बात कही। इस तरह हुई रुद्र की घर वापसी अनिल पांडे ने तुरंत उस व्यक्ति से बात करने को कहा, जिसके फोन से रुद्र कॉल कर रहा था। उन्होंने उसे पूरी स्थिति बताई कि बच्चा बिना बताए घर से आया है और उसे सुरक्षित रखना जरूरी है। साथ ही यह भी कहा कि इस बात का एहसास रुद्र को न होने दें, वरना वह वहां से भी निकल सकता है। पुजारी को भी पूरी स्थिति समझाई गई। पुजारी ने सलाह दी कि जल्द से जल्द पुलिस को सूचना दी जाए, क्योंकि पूजा-पाठ में व्यस्त होने के बाद वे उस पर नजर नहीं रख पाएंगे और वह फिर से कहीं जा सकता है।
इसके बाद अगले ही दिन सुबह कालीमठ पुलिस मौके पर पहुंची और रुद्र को अपने साथ सुरक्षित ले गई। ये खबर भी पढ़ें…
बच्चे ने प्रेमानंद महाराज के लिए घर छोड़ा:15 साल के किशोर ने लेटर में लिखा-अपनी असलियत जान गया
इंदौर की कृष्ण विहार कॉलोनी में रहने वाला 15 साल का बच्चा बुधवार को घर से अचानक लापता हो गया। परिवार को उसके हाथ का लिखा एक लेटर मिला है। लेटर उसने लिखा है कि वह वृंदावन के संत प्रेमानंद जी महाराज के वचनों से प्रभावित होकर अपने “असली परिवार” के पास जा रहा है। पढ़ें पूरी खबर…

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