शहर में लगातार आग लगने की घटनाएं हो रही हैं। हर बार सरकार, प्रशासन, नगर निगम व पुलिस जांच के साथ सुविधाएं जुटाने की धोषणाएं करती है। कुछ दिन तक तो सब वादे व दावे किए जातें हैं, लेकिन समय के साथ अफसर सब भूल जाते हैं। घटना होने पर फिर सक्रिय होते हैं। घोषणाओं के अनुसार न तो जोन पर आग बुझाने के उपकरण पहुंच और न ही संकरी गलियों आसानी से पहुंचने वाले उपकरण खरीदे गए। बावड़ी हादसा : 2023 में रामनवमी के दिन बेलेश्वर महादेव बावड़ी हादसा हुआ था। इसमें 36 लोगों की मौत हो गई थी। दो दिन तक बचाव कार्य चलते रहे। नगर निगम व प्रशासन के पास हादसे के बाद लोगों को बचाने के लिए पर्याप्त संसाधन ही नहीं थे। घटना की न्यायिक जांच करवाई गई। मामला हाईकोर्ट पहुंचा, तब रिपोर्ट पेश की। इसके बाद इस तरह के गंभीर हादसों के लिए बचाव दल बनाने, इनके लिए संसाधन खरीदने की बात कही गई, लेकिन कुछ नहीं हुआ। होमगार्ड और फायर की व्यवस्थाएं भी पुराने संसाधनों के साथ ही चल रही हैं। ट्रक हादसा : एयरपोर्ट रोड पर ट्रक हादसे के बाद प्रशासन ने भारी वाहनों की इंट्री को लेकर नियम बनाए थे। कुछ दिन सख्ती के बाद फिर वही स्थिति है। रिंगरोड और शहर के अन्य क्षेत्रों में भी प्रतिबंधित समय पर भारी वाहन इंट्री कर रहे हैं। रानीपुरा : 2017 में फटाका दुकान व गोदाम में लगी आग में 7 लोग जिंदा जल गए थे। इसी तरह 2025 में बिल्डिंग गिरने से 2 लोगों की मौत हो गई। इसके बाद पूरे शहर से पटाखा दुकानों को बाहर करने का निर्णय लिया गया था। हाईकोर्ट ने जिम्मेदार अफसरों के नाम पूछकर इन पर की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी। वर्तमान में पटाखों की दुकानें शहरी सीमा क्षेत्र में लगी हैं। शोरूम में आग : अक्टूबर 2025 में इलाके में तीन मंजिला भवन के पेंट हाउस में आग लगने से कारोबारी प्रवेश अग्रवाल की मौत हो गई थी। उनकी बेटियां व प|ी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस घटना के बाद तय किया था, हाइराइज की तरफ बढ़ रहे इंदौर के लिए आधुनिक फायर उपकरण खरीदेंगे। संकरी गलियों में पहुंच के लिए छोटे उपकरण खरीदी की भी योजना भी बनी। मंगलवार रात हुए हादसे के दौरान भी यही परेशानी आई, संकरी गली होने से दमकलें पहुंचने के बाद भी आग नहीं बुझा सकीं।
