विधानसभा में सरकार ने जिन उद्योगों को स्थापित और चालू बताया, उनकी सच्चाई परखने के लिए दैनिक भास्कर की टीम प्रदेश के आठ औद्योगिक क्षेत्रों में पहुंची। 75 फैक्ट्रियों का मौके पर निरीक्षण किया गया। इनमें 21 ऐसी मिलीं, जहां ताले लगे थे, खाली प्लॉट थे या निर्माण अधूरा था। वहीं 11 इकाइयां ऐसी निकलीं, जिन्हें नई बताकर निवेश और रोजगार का दावा किया गया, लेकिन वे सालों से संचालित हैं। यानी कुल 32 फैक्ट्रियों में दावों और जमीन की हकीकत में सीधा अंतर मिला। ज्यादातर इकाइयों में न उत्पादन दिखा, न मजदूर और न मशीनें। साफ है कि जिन फैक्ट्रियों के नाम पर विधानसभा में निवेश और रोजगार के आंकड़े रखे गए, वे जमीन पर या तो मौजूद नहीं थीं या काम ही नहीं कर रही थीं।
दो प्लॉट में दो यूनिट बताईं, एक ही संचालित, बोले- यह पहली का विस्तार, भवन निर्माण कर रहे श्रमिकों को रोजगार में गिना स्थान: आरएमजे वेरीटेबिल प्रा. लि., मंडीदीप समय: 17 मार्च 2026, शाम 5:26 बजे विधानसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक कंपनी को दो प्लॉट आवंटित हुए। मार्च 2023 को 6750 वर्गमीटर (निवेश ₹3.06 करोड़), फरवरी 2025 को 7550 वर्गमीटर (निवेश ₹3.91 करोड़)। दोनों यूनिट को ‘स्थापित’ बताया गया। मंगलवार शाम 5:26 बजे भास्कर रिपोर्टर दूसरे प्लॉट पर पहुंचे तो वहां निर्माण कार्य चल रहा था। मशीनों के इंस्टालेशन के लिए स्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा था। दो मशीनें पॉलिथीन से ढंकी थीं। फ्रंट गेट के सामने मजदूर शेड डाल रहे थे। करीब 5 मिनट बाद एमपीआईडीसी के जनरल मैनेजर राहुल शर्मा अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। रिपोर्टर ने पूछा- क्या यह इंडस्ट्री ऑपरेशनल है? शर्मा ने जवाब दिया- ‘यूनिट स्थापित है, ऑपरेशनल होने में कुछ समय लगेगा।’ जीएम ने पहले से ऑपरेशनल फैक्ट्री दिखाने का प्रस्ताव दिया। रिपोर्टर के आग्रह पर निर्माणाधीन यूनिट के निरीक्षण को राजी हुए। फिर पहले प्लॉट पर संचालित यूनिट दिखाई। बोले- दोनों यूनिट को अलग-अलग बताया है, जबकि ये 4 साल से चल रही कंपनी का विस्तार हैं। पूछा गया कि निर्माणाधीन यूनिट को स्थापित क्यों बताया व 55 लोगों को रोजगार कैसे दिखाया। बोले- प्लॉट पर शेड लगने पर यूनिट को स्थापित मान लेते हैं। निर्माण कर रहे मजदूरों को भी रोजगार में गिना। 8 माह पहले बंद हो चुकी फैक्ट्री को चालू बताया स्थान: सच इंटरप्राइजेज, प्लॉट नंबर 67, K सेक्टर, मंडीदीप मंगलवार शाम 6:37 बजे भास्कर टीम अफसरों के साथ मंडीदीप के प्लॉट नंबर 67 पहुंची। बड़े नीले गेट पर ‘सच इंटरप्राइजेज’ लिखा था, लेकिन गेट पर ताला लगा मिला। नाम के ऊपर ‘इलाइट सेल्स कॉर्पोरेशन’ का प्रिंटआउट व जीएसटी नंबर चस्पा था। अफसरों के निर्देश पर गेट खुलवाया गया तो अंदर टाइल्स अडेसिव प्लांट का इंस्टॉलेशन चलता मिला। कर्मचारियों ने बताया कि मशीनें लग रही हैं। एमपीआईडीसी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर प्रतुल सिन्हा का कहना है- विधानसभा में जिन 746 इंडस्ट्री को स्थापित बताया गया है, वे सभी स्थापित हैं। 75 में से 41% को बंद बताना गलत है। केवल मंडीदीप की सच इंटरप्राइजेज और मुरैना की कुसोल इंडस्ट्री बंद हुई हैं। बंद इंडस्ट्री के प्लॉट दूसरी इकाइयों को आवंटित करने का प्रावधान है। निवेश पर विधानसभा में सरकार के दो दावे मध्यप्रदेश में उद्योग और निवेश को लेकर सरकार के दावों पर खुद सरकारी जवाब ही सवाल खड़े कर रहे हैं। विधानसभा में एक जैसे सवालों पर अलग-अलग समय में दिए गए जवाबों में भारी विरोधाभास सामने आया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सिर्फ तीन महीने के अंतराल में सरकार के आंकड़े इस तरह बदल गए कि दो साल में शुरू हुए उद्योगों की संख्या तो 22 कम हो गई, लेकिन कुल निवेश का आंकड़ा अचानक 61 गुना बढ़ गया। ऐसे में सवाल यह है कि सही आंकड़ा आखिर कौन-सा है? सबसे बड़ा सवाल- जब उद्योग कम हो गए तो निवेश 61 गुना कैसे बढ़ गया? पहला जवाब- 2 दिसंबर 2025 को विस में डॉ. चिंतामणि मालवीय के सवाल पर सरकार ने बताया कि पिछले दो वर्षों में 746 उद्योग स्थापित हुए। इनमें कुल ₹8,016.60 करोड़ का निवेश हुआ, 57,565 लोगों को रोजगार मिला। दूसरा जवाब- 25 फरवरी 2026 को विधायक पंकज उपाध्याय के सवाल के जवाब में सरकार ने विधानसभा में बताया कि मध्यप्रदेश में दो साल में 724 उद्योग प्रारंभ हो चुके हैं। इनमें ₹4,91,488 करोड़ रुपए का निवेश हुआ। यानी इसमें निवेश 61 गुना बढ़ाया बताया गया।
