रतलाम में करणी सेना परिवार का विरोध प्रदर्शन मंगलवार रातभर जारी रहा। करणी सेनिकों ने महू नीमच फोरलेन पर टेंट लगाया, खाना बनवाया इसके साथ ही सड़क पर बिस्तर लगाकर सो गए। करणी सेना परिवार प्रमुख जीवनसिंह शेरपुर ने कहा हम कोई उपद्रव नहीं कर रहे हैं। कलेक्टर मैडम आएं…हमारी बात सुने। जब तक हमारी बात नहीं सुनी जाएगी। हम यहीं सड़क पर बैठे रहेंगे। बता देंगे कि 11 सूत्रूीय मांगों के निराकरण को लेकर करणी सेना परिवार जीवनसिंह शेरपुर के नेतृत्व में मंगलवार को कलेक्ट्रेट का घेराव करने जा रहे थे। जिन्हें रतलाम शहर से बाहर डोसी गांव फोरलेन पर पुलिस ने रोक दिया था। शहर के सभी इंट्री प्वाइंट पर पुलिसबल तैनात था। प्रदर्शनकारियों को कलेक्ट्रेट जाने से रोका था। करणी सैनिकों ने कलेक्टर मिशा सिंह से ही मिलने की बात कही। कलेक्टर के नहीं आने पर सभी सड़क पर बैठ गए थे। दिनभर रोड पर रोड बंद रहा। दिन भर में कई बार अधिकारियों व जीवनसिंह शेरपुर की बीच बात हुई। लेकिन सभी कलेक्टर से ही मिलना चाहते थे। देखिए तस्वीरें… रात भर डटे रहे करणी सैनिक भी अड़ गए जब तक कलेक्टर मैडम नहीं मिलेगी। हमारी बात नहीं सुनेगी तब हम लोग नहीं जाएंगे। रात में सड़क पर टेंट लगा दिया। कालीन बिछाकर गादिया सड़क पर लगा दी। जीवनसिंह समेत अन्य समर्थक सभी रोड पर सो गए। इसके पहले रोड पर खाना भी बनवाया। सभी सड़क पर बैठ खाना भी खाया। इसके पहले दोपहर में जीवनसिंह शेरपुर ने अधिकारियों पर अराजकता फैलाने का आरोप भी लगाया। कलेक्टर व एसपी की अधिकारियों के साथ बैठक रात एक बजे तक कलेक्टर मिशा सिंह, एसपी अमित कुमार व अन्य अधिकारी सर्किट हाउस पर मौजूद रहे। यहां पर करणी सेना के कुछ पदाधिकारियों की चर्चा अधिकारियों से चल रही थी। हम उपद्रव नहीं कर रहे है रात करीब ढाई धरना स्थल पर जीवनसिंह शेरपुर ने दैनिक भास्कर डिजिटल से चर्चा करते हुए कहा कि हमने दिनभर कलेक्टर मैडम का इंतजार किया। हमने सोचा कि कलेक्टर मैडम आएंगी, हमारी बात सुनेंगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। धारा 144 की हवाला देकर हमें जनसुनवाई में जाने से रोका। हमने कानूनी प्रक्रिया का पालन किया। उन्होंने कहा, कलेक्टर व एसपी की बात का सम्मान करते हुए हम आगे नहीं बढ़े। उस बात को उन्होंने हमारी कमजोरी समझ कर हम पर ध्यान नहीं दिया। दिनभर बैठाए रखा। हमारे साथ हिंदू, मुस्लिम महिलाएं भी आई थी। उनकी पट्टे वितरण की समस्या था। मुस्लिम महिलाओं के रोजे भी थे। भूखे प्यासे बैठे रहे। जीवन का कहना है कि, हम पहले ही बोल चुके है कि हमारी मांगों का निराकरण नहीं करते है तो कलेक्टर परिसर के अंदर या बाहर धरना प्रदर्शन की परमिशन दें। हम किसी प्रकार का उपद्रव नहीं कर रहे हैं। हम उनसे सत्याग्रह की परमिशन मांग रहे हैं जो कि हमारा मौलिक अधिकार है। यहां से शुरु हुआ था विवाद 10 मार्च को जावरा ब्लॉक में झालवा-कलालिया रोड निर्माण में लगे दो डंपरों को खनिज विभाग ने अवैध परिवहन के आरोप में जब्त किया था। ये दोनों डंपर ठेकेदार आयुष शर्मा के हैं, जिन्हें जीवनसिंह शेरपुर का समर्थक बताया जाता है। जब्ती के विरोध में शेरपुर ने समर्थकों के साथ रिंगनोद थाने में गादी-बिस्तर लगाकर रात भर धरना दिया था। शेरपुर का आरोप था कि खनिज विभाग ने अवैध उत्खनन के नाम पर खाली डंपरों को पकड़कर कार्रवाई की है, जिसके बाद उन्होंने कलेक्ट्रेट घेराव की घोषणा की थी। 11 मांगों के निराकरण की मांग प्रदर्शन के माध्यम से प्रशासन के समक्ष जिले के जनहित से जुड़े 11 निर्णायक मुद्दे रखे जाने थे। इनमें अवैध उत्खनन के नाम पर निर्दोषों पर कार्रवाई पर रोक व पिपलिया जोधा में देह व्यापार पर रोक लगाने की मांग शामिल है। इसके अलावा आमनेर में दो माह से लापात बालिका के अपहरण में त्वरित न्याय, चोरी की घटनाओं पर कार्रवाई और बोरवानी के अवैध ईंट भट्ठों को हटाने की मांग भी रखी गई है। किसानों की कर्ज अदायगी की तारीख बढ़ाने, गेहूं खरीदी की समस्याओं के समाधान और जावरा की आविका सिटी में मूलभूत सुविधाओं की मांग भी प्रमुख है। देखिए मंगलवार देर रात की तस्वीरें…
