मध्यप्रदेश सरकार केरल के वायनाड जिले स्थित बीनाची एस्टेट की 554.05 हेक्टेयर जमीन केरल सरकार को बेचने की तैयारी में है। जमीन का सौदा कलेक्टर गाइडलाइन के आधार पर होगा, लेकिन उससे पहले इसका वैल्यूएशन कराया जाएगा। इसके लिए मप्र के मुख्य सचिव अनुराग जैन और केरल के मुख्य सचिव की संयुक्त कमेटी बनाई गई है। मंगलवार को कैबिनेट में यह प्रस्ताव चर्चा के लिए आया, पर वैल्यूएशन रिपोर्ट के बिना इसे मंजूरी नहीं दी गई। इसे अगली बैठक में रखने के निर्देश दिए गए। यह जमीन मप्र सरकार की कंपनी प्रोविडेंट इंवेस्टमेंट कंपनी लिमिटेड (पीआईसीएल) के पास है। इसमें से 453.96 एकड़ भूमि केरल सरकार पहले ही प्राइवेट फॉरेस्ट एक्ट, 1971 के तहत अधिग्रहित कर चुकी थी, जिसे मप्र ने कोर्ट में चुनौती दी थी। लंबे विवाद के बाद नवंबर 2023 में केरल हाई कोर्ट ने दोनों राज्यों को आपसी सहमति से समाधान निकालने का आदेश दिया था। सीएस स्तर की बैठकों में सहमति बनी है कि मप्र सरकार मुआवजा लेकर पूरी जमीन केरल को सौंपेगी। मुआवजे की राशि दोनों राज्य मिलकर तय करेंगे, और सहमति नहीं बनने पर मामला आर्बिट्रेटर के पास जाएगा। जमीन हस्तांतरण के बाद केरल सरकार वहां रह रहे करीब 160 अतिक्रमणकारी परिवारों के पुनर्वास पर विचार करेगी। पेच भी… जमीन में 10% हिस्सा छग का भी, उससे मंजूरी जरूरी
करीब 554 हेक्टेयर जमीन में 10% हिस्सा छत्तीसगढ़ का भी है, इसलिए मप्र कैबिनेट के बाद छत्तीसगढ़ और फिर केंद्र सरकार की मंजूरी भी जरूरी होगी। प्रहलाद पटेल ने जमीन बेचने पर उठाए सवाल, सीएम बोले- कब्जे हैं
बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने जमीन बेचने की वजह पर सवाल उठाया। इस पर मुख्यमंत्री ने बताया कि केरल हाई कोर्ट ने दोनों राज्यों को आपसी सहमति से मामला सुलझाने के निर्देश दिए हैं। जमीन पर कब्जों के चलते बिक्री ही व्यावहारिक विकल्प बचा है।
