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उत्तराखंड के बाद गुजरात में UCC की तैयारी:समिति ने CM भूपेंद्र पटेल को रिपोर्ट सौंपी, 24 मार्च को सदन में पेश हो सकता है विधेयक

उत्तराखंड के बाद अब गुजरात में भी जल्द यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी समान नागरिक संहिता (UCC) लागू हो सकता है। यूसीसी के लिए गठित समिति ने मुख्यमंत्री को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप दी है। यूसीसी के लिए इस समिति का गठन 4 फरवरी, 2025 को हुआ था। समिति ने विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत अध्ययन के बाद इसने अंतिम सिफारिशों सहित अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की है। गुजरात सरकार इस रिपोर्ट पर अधिकारियों के साथ चर्चा करेगी। यूसीसी विधेयक 24 मार्च को सदन में पेश किए जाने की संभावना है। महिलाओं के समान अधिकारों को प्राथमिकता
मुख्यमंत्री को यह रिपोर्ट प्रस्तुत करते समय दिए गए विवरण में कहा गया है कि समिति ने इस मसौदा रिपोर्ट में विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे मुद्दों पर सभी धर्मों और समुदायों के लिए एक समान कानूनी ढांचा सुझाया है। इस मसौदे में विशेष रूप से महिलाओं के समान अधिकारों और सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। इतना ही नहीं, रिपोर्ट में गुजरात की भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधता का भी ध्यान रखा गया है।
मुख्यमंत्री की दिल्ली यात्रा के बाद यूसीसी पर चर्चा तेज हुई
दिल्ली में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी की हाल ही में हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद गुजरात में यूसीसी पर चर्चा और तेज हो गई है। बताया जा रहा है कि दिल्ली में हुई बैठक में केंद्र के नेताओं के साथ राज्य में यूसीसी को लागू करने की प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हुई। राज्य सरकार ने इस मुद्दे का अध्ययन करने के लिए एक रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है, जो विभिन्न धाराओं के सुझावों और कानूनी पहलुओं का मूल्यांकन कर रही है। मार्च के अंतिम सप्ताह में विधानसभा सत्र में यूसीसी से संबंधित कोई प्रस्ताव या विधेयक पेश कर सकती है और इसके लिए तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। यदि यह कानून लागू होता है, तो विवाह, तलाक, गोद लेने और उत्तराधिकार जैसे मामलों में सभी नागरिकों पर एक समान नियम लागू होंगे। इस तरह उत्तराखंड के बाद गुजरात भी यूसीसी लागू करने वाले राज्यों में शामिल हो जाएगा। सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज हैं रंजना प्रकाश देसाई जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज हैं। वह 13 सितम्बर 2011 से 29 अक्टूबर 2014 तक सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीश रहीं। रंजना देसाई ने 1970 में एलफिंस्टन कॉलेज, मुंबई से स्नातक (बीए) की डिग्री प्राप्त की और उसके बाद 1973 में गवर्नमेंट लॉ कॉलेज, मुंबई से विधि स्नातक (बीए एलएलबी) की परीक्षा उत्तीर्ण की। जस्टिस रंजना देसाई जम्मू-कश्मीर पर परिसीमन आयोग की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। देसाई सुप्रीम कोर्ट में आने से पहले बॉम्बे हाईकोर्ट की जज भी रह चुकी हैं। ———————
UCC से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट बोला- UCC लागू करने का समय आ गया:संसद फैसला करें; शरियत कानून में सुधार की जल्दबाजी न करें, इससे नुकसान की आशंका सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि देश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने का समय आ गया है। इस पर फैसला करना कोर्ट के बजाय संसद का काम है। कोर्ट शरियत कानून 1937 की कुछ धाराओं को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा था। पूरी खबर पढ़ें…

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