रायसेन में मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के बैनर तले शिक्षकों ने शुक्रवार शाम कलेक्ट्रेट पहुंचकर शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को तत्काल प्रभाव से रद्द करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने अपर कलेक्टर (एडीएम) मनोज उपाध्याय को ज्ञापन सौंपकर सरकार से TET परीक्षा रद्द करने और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करने की मांग की। शिक्षक प्रकोष्ठ मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सूर्य प्रकाश सक्सेना ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने सभी शिक्षकों के लिए TET परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य करने का निर्देश दिया है। संघ का तर्क है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act) 2009 लागू होने से पहले राज्य में बड़ी संख्या में शिक्षकों की नियुक्तियां हो चुकी थीं। ऐसे में 2009 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर यह नियम लागू करना उचित नहीं है। सेवा शर्तों में बदलाव करना न्यायसंगत नहीं ज्ञापन में कहा गय है कि शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को RTE Act 2009 की धारा 23(1) के तहत अनिवार्य किया गया था। इस धारा में कक्षा 1 से 8 तक के शिक्षकों के लिए न्यूनतम योग्यताएं निर्धारित की गई हैं। राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (NCTE) की 31 मार्च 2010, 23 अगस्त 2010 और 29 जुलाई 2011 की अधिसूचनाओं के आधार पर यह प्रावधान लागू किया गया था। संघ का कहना है कि मध्य प्रदेश में शिक्षकों की नियुक्तियां शिक्षाकर्मी भर्ती अधिनियम 1997, 1998, अध्यापक भर्ती अधिनियम 2008 और 2018 जैसे विभिन्न भर्ती नियमों के तहत हुई हैं। इन सेवा नियमों में TET परीक्षा उत्तीर्ण करना कहीं भी सेवा शर्त के रूप में उल्लेखित नहीं है। इसलिए, नियुक्ति के बाद सेवा शर्तों में बदलाव करना न्यायसंगत नहीं माना जा रहा है। शिक्षकों ने यह भी बताया कि लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा 3 मार्च 2026 को जारी पत्र में राज्य सरकार या मंत्रिमंडल स्तर से किसी स्पष्ट अनुमोदन का जिक्र नहीं है। इस आधार पर उन्होंने इस पत्र पर रोक लगाने और अन्य राज्यों की तर्ज पर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने की मांग की है।
