मध्यप्रदेश में शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) अनिवार्य किए जाने को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। संचालक लोक शिक्षण भोपाल द्वारा जारी एक आदेश में कहा गया है कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को भी आगे नौकरी जारी रखने के लिए TET परीक्षा पास करनी होगी। इस आदेश के बाद प्रदेशभर के शिक्षक संगठनों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। शासकीय शिक्षक संगठन का आरोप है कि यह आदेश विधिसम्मत प्रक्रिया का पालन किए बिना जारी किया गया है और इससे करीब डेढ़ लाख शिक्षकों के भविष्य पर अनावश्यक संकट खड़ा हो गया है। संगठन का कहना है कि 27 सालों से सेवा दे रहे शिक्षकों पर अचानक नई शर्त लागू करना न्यायसंगत नहीं है। इस निर्णय के विरोध में प्रदेश के सभी जिलों में विरोध प्रधर्शन किया जा रहा है। साथ ही, भोपाल कलेक्ट्रेट ऑफिस में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया है। 13 मार्च को राजधानी में शिक्षकों ने कलेक्टर कार्यालयों के सामने रैली, नारेबाजी और प्रदर्शन कर सरकार से इस आदेश को तुरंत रद्द करने की मांग की। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अन्य राज्यों की तरह मध्यप्रदेश सरकार को भी शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करनी चाहिए। राजधानी भोपाल में संगठन के जिलाध्यक्ष राजेश साहू के नेतृत्व में शिक्षक कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां शिक्षकों ने रैली और प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज कराया और मुख्यमंत्री के नाम का ज्ञापन कलेक्टर भोपाल में सौंपा। प्रदर्शन के दौरान संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेन्द्र कौशल, जिलाध्यक्ष राजेश साहू और अन्य कर्मचारी-शिक्षक संगठनों के नेताओं ने सभा को संबोधित किया। इस दौरान शिक्षक नेता राकेश पटेल, राकेश पांडेय, सुभाष शर्मा और सतीश शर्मा सहित कई पदाधिकारियों ने सरकार से शिक्षकों की मांगों पर जल्द निर्णय लेने की अपील की। 29 मार्च को बैठक में तय करेंगे आंदोलन की रणनीति
उपेन्द्र कौशल ने कहा कि फिलहाल सरकार से शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई है। यदि एक सप्ताह के भीतर मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं होती है, तो 29 मार्च को प्रदेश के सभी शिक्षक संगठनों की बैठक बुलाकर संयुक्त शिक्षक मोर्चा बनाया जाएगा और आगे बड़े आंदोलन की रणनीति घोषित की जाएगी। 28 मार्च तक सांसदों व विधायकों से लगाएंगे गुहार उपेन्द्र कौशल ने कहा कि 15 से 28 मार्च के बीच प्रदेशभर में सांसदों, विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों को भी ज्ञापन सौंपे जाएंगे। इसके माध्यम से करीब 2 लाख शिक्षक परिवारों की नौकरी पर आए संकट को दूर करने की मांग उठाई जाएगी और केंद्र व राज्य सरकार से TET परीक्षा आदेश रद्द करने तथा सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने की अनुशंसा करने को कहा जाएगा। बिना शासन अनुमति के आदेश का आरोप संगठन का आरोप है कि लोक शिक्षण संचालनालय गौतम नगर भोपाल से जारी आदेश से स्पष्ट होता है कि इसे जारी करने से पहले राज्य सरकार, मंत्रिमंडल या सचिवालय स्तर पर कोई औपचारिक सलाह या अनुमति नहीं ली गई। शिक्षक संगठन का कहना है कि शासन की नीतियों के अनुसार ऐसे महत्वपूर्ण फैसलों के लिए उच्च स्तर पर अनुमोदन आवश्यक होता है, लेकिन इस मामले में संभवतः ऐसा नहीं किया गया। भर्ती के समय ऐसी शर्त नहीं थी शिक्षक संगठनों का कहना है कि प्रदेश के अधिकांश शिक्षक शिक्षाकर्मी और संविदा शिक्षक के रूप में नियुक्त हुए थे। उनकी नियुक्ति सर्वोच्च न्यायालय के आदेश और राज्य सरकार द्वारा बनाए गए शिक्षाकर्मी भर्ती अधिनियम 1997, शिक्षाकर्मी भर्ती अधिनियम 1998 तथा अध्यापक भर्ती अधिनियम 2008 के तहत हुई थी। इन सभी भर्ती नियमों और सेवा शर्तों में कहीं भी TET परीक्षा पास करना अनिवार्य नहीं बताया गया था। ऐसे में वर्षों बाद नई शर्त लागू करना नियमों के विपरीत बताया जा रहा है। सेवा शर्तों में बदलाव पर सवाल शिक्षक संगठन का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी अपने एक आदेश (सिविल अपील 2634/2013) में स्पष्ट किया है कि किसी कर्मचारी की नियुक्ति के बाद उसकी सेवा शर्तों में बदलाव नहीं किया जा सकता। संगठन के अनुसार ऐसे में लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी आदेश शासन की कार्यप्रणाली और न्यायालय के निर्देशों के विपरीत प्रतीत होता है। डेढ़ लाख शिक्षकों में बढ़ी चिंता संगठन का दावा है कि इस आदेश से प्रदेश के लगभग डेढ़ लाख से अधिक शिक्षकों में भय और असंतोष का माहौल बन गया है। शिक्षकों का कहना है कि लंबे समय से सेवा देने के बाद अचानक परीक्षा की शर्त लागू करना उनके भविष्य को असमंजस में डालने जैसा है।
