मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में भ्रूण लेकर पहुंचने वाले याचिकाकर्ता दयाशंकर पांडे की याचिका पर बुधवार 11 मार्च को सुनवाई हुई। कोर्ट ने सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। याचिकाकर्ता दयाशंकर पांडे का आरोप है कि उसने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के दौरान करीब 200 करोड़ रुपए के फर्जीवाड़े का खुलासा किया था। इसके बाद से ही उस पर अज्ञात लोगों द्वारा हमले किए जा रहे हैं। पांडे का कहना है कि वह पहले जबलपुर की शुभ मोटर्स कंपनी में काम करता था, जहां कंपनी ने 200 करोड़ रुपए की पूंजी फर्जी तरीके से दर्शाई और दस्तावेजों में हेराफेरी की गई थी। हाईकोर्ट में बढ़ाई गई सुरक्षा मामले के बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। कोर्ट के सभी गेटों पर अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी तैनात किए हैं और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है। परिसर में प्रवेश करने वालों की सख्त जांच के बाद ही अंदर जाने दिया जा रहा है। सड़क हादसे के बाद पत्नी का हुआ गर्भपात रीवा जिले के बैकुंठपुर निवासी दयाशंकर पांडे का कहना है कि 1 मार्च को वह पत्नी और बच्ची के साथ बाइक से ससुराल से घर लौट रहा थे। इसी दौरान एक बिना नंबर की कार ने टक्कर मार दी, जिससे उसकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गई। इलाज के दौरान 8 मार्च को पत्नी का गर्भपात हो गया। पांडे का आरोप है कि जब वह शिकायत लेकर पुलिस के पास जाता था तो उससे सबूत मांगे जाते थे। इसी वजह से वह 9 मार्च को भ्रूण लेकर कोर्ट पहुंच गया था, ताकि जरूरत पड़ने पर इसे सबूत के तौर पर दिखा सके। पुलिस की मौजूदगी में भ्रूण दफनाया गया घटना के बाद सिविल लाइन थाना पुलिस की मौजूदगी में 9 मार्च को करिया पाथर श्मशान घाट में भ्रूण को दफनाया गया। वहीं फॉरेंसिक टीम भ्रूण की वास्तविकता और उसकी उम्र की जांच कर रही है। लापरवाही पर चार सुरक्षाकर्मी निलंबित 9 मार्च को दयाशंकर पांडे थैले में भ्रूण लेकर हाईकोर्ट परिसर पहुंच गया था, जिससे वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सुरक्षा में लापरवाही पाए जाने पर एसपी संपत उपाध्याय ने एएसआई मुन्ना अहरिवार, प्रधान आरक्षक ब्रह्मदत्त खत्री, अरुण उपाध्याय और आरक्षक प्रतीक सोनकर को निलंबित कर लाइन अटैच कर दिया है। साथ ही चारों के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी दिए हैं।
