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उदयपुर में रातभर खेली बारूद की होली:तोप-बंदूकें चलीं, तलवारें टकराईं; 451 साल पहले मुगल चौकी पर जीत के जश्न की परंपरा निभाई

लाल पगड़ियों और सजे-धजे कपड़ों में आधी रात को हाथों में तलवारें लिए लोग खड़े थे। चारों तरफ आग उगलती तोपें थीं। एक के बाद एक धमाके हो रहे थे। बंदूकों से गोलियां चल रही थीं। माहौल ऐसा जैसे कोई महायुद्ध छिड़ गया हो। यह नजारा उदयपुर से 45 किलोमीटर दूर उदयपुर-चित्तौड़गढ़ नेशनल हाईवे पर स्थित मेनार गांव में बुधवार (4 मार्च) की रात का है। करीब 451 साल पहले मुगल चौकी ध्वस्त करने की खुशी में मेनारिया ब्राह्मण समाज बारूद की होली खेलता है। हर साल होलिका दहन के 48 घंटे बाद यानि तीसरी रात (जमरा बीज) को यह आयोजन होता है। खास बात यह है कि बुजुर्ग पीछे नहीं रहते। वह भी युवाओं के साथ मिलकर धमाके करते हैं। ढोल-दुंदुभि बजाया जाता है। तलवारों के साथ गैर डांस (राजस्थान का पारम्परिक प्रसिद्ध नृत्य) किया जाता है। मशाल लेकर गांव के रास्तों की मोर्चाबंदी होती है। यह सब देखने के लिए महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और विदेशों तक से लोग मेनार गांव पहुंचे थे। पहले जानिए, इस परंपरा के बारे…
कहा जाता है मेवाड़ में महाराणा अमर सिंह के साम्राज्य के दौरान जगह-जगह मुगलों की छावनियां (सेना की टुकड़ियां) बनी हुई थीं। मेनार गांव के पूर्वी छोर पर भी मुगल छावनी थी। छावनी के आतंक से लोग परेशान थे। मेनारिया ब्राह्मणों की भी परेशानियां बढ़ने लगी थीं। मेनारवासियों को वल्लभनगर छावनी पर जीत का समाचार मिला तो गांव के लोग ओंकारेश्वर चबूतरे पर जुटे और छावनी पर हमले की रणनीति बनाई। इसके बाद हमला कर मुगल छावनी को ध्वस्त कर दिया। चारों तरफ भीड़, धमाके, जोश और गर्व
मेनार गांव में जमरा बीज की रात का माहौल किसी युद्ध स्थल से कम नहीं था। चारों तरफ भीड़। पैर रखने की जगह नहीं। गांव के लोगों ने सेना वाली पोशाक पहनी थी। हाथों में मशाल और तलवारें थीं। टुकड़ियां जब बारूद की होली खेलने गांव के ओंकारेश्वर चौक पहुंचीं तो शोर मच गया। रोम-रोम में रोमांच दौड़ गया। देखते ही देखते तोपें बारूद उगलने लगीं। गोला-बारूद से पूरा इलाका दहलने लगा। दुंदुभि बजाकर जीत का ऐलान किया गया और फिर तलवारों से गैर डांस शुरू हुआ। मुगल चौकी पर जीत के बाद से मेनारिया समाज हर साल इसी तरह होली मनाता है। खास बात यह है कि इसमें रंग से ज्यादा बारूद का इस्तेमाल होता है। परंपरा निभाई, जाजम बिछाकर की मेहमान नवाजी
बुधवार को (5 मार्च) दोपहर ऐतिहासिक बारूद की होली की शुरुआत हुई। सबसे पहले गांव के ओंकारेश्वर मंदिर के चौक में शाही लाल जाजम बिछाई गई। गांव और आसपास के इलाकों से यहां पहुंचे मेनारिया ब्राह्मण समाज के पंचों, मौतवीरों (बुजुर्ग) का स्वागत किया गया। उनकी मेहमाननवाजी की गई। इसके बाद गांव के जैन समाज के लोगों ने अबीर-गुलाल बरसाना शुरू किया। सभी लोग आपस में गले मिले और होली की शुभकामनाएं दीं। गांव के 5 रास्तों की मोर्चाबंदी की गई
रात 10:15 बजे के बाद रस्में शुरू हुईं। पूर्व रजवाड़ों के सदस्य सैनिकों की पोशाक धोती-कुर्ता और कसुमल पाग (साफा) बांधे तलवारें और बंदूकें लेकर घरों से निकले। अलग-अलग रास्तों से ललकारते हुए वे गोलियां दागते-तलवारें लहराते हुए ओंकारेश्वर चौक पहुंचे। यहां चबूतरे पर गांव के 5 रास्तों की मोर्चाबंदी का आदेश दिया गया। पांच टुकड़ियां 5 मशालें लेकर ढोल की थाप पर गांव की मोर्चाबंदी करने के लिए रवाना हो गईं। पांचों दलों ने शोर करते हुए जब एक साथ कूच किया तो रोमांच चरम पर पहुंच गया। हजारों लोग इस नजारे के गवाह बने। जीत की शौर्य गाथा पढ़ी
महिलाएं सिर पर मंगल कलश रखकर और पुरुष आतिशबाजी करते हुए बोचरी माता की घाटी पहुंचे। वहां मुगल चौकी पर जीत की शौर्य गाथा पढ़ी गई। यहां थंभ चौक पर महिलाओं ने मुख्य होली को ठंडा करने की रस्म निभाई। महिलाओं ने गाए वीर रस के गीत
ढोल-नगाड़ों के साथ आगे टुकड़ियां और पीछे महिलाएं ओंकारेश्वर चौक की तरफ रवाना हुईं। इस दौरान तलवार और लकड़ी का डंडा लेकर डांस किया। हैरतअंगेज करतब दिखाए गए। महिलाएं वीर रस के गीत गा रही थीं। सभी के ओंकारेश्वर चौक पहुंचने पर बारूद की होली शुरू हुई। पांचों टुकड़ियों के योद्धाओं ने एक साथ हवाई फायर किए। आतिशबाजी की गई। तोपों में बारूद भरकर धमाके किए गए। मेनार की बारूद की होली में हिस्सा लेने लोग देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे थे। दुबई में रहने वाले मेनारिया समाज और गांव के अन्य लोग कुछ दिन पहले ही यहां पहुंचे थे। हालांकि कई लोग इस बार इजरायल-ईरान युद्ध के चलते फ्लाइट बंद होने से नहीं आ पाए थे। एक किमी पैदल चलकर आयोजन स्थल पर पहुंचे
बारूद की होली को देखने के लिए शनिवार शाम तक राजस्थान के कई शहरों के अलावा मध्य प्रदेश के रतलाम, नीमच, मंदसौर, अहमदाबाद, सूरत, मुंबई और दुबई से लोग यहां पहुंचे। रात तक उदयपुर-चित्तौड़गढ़ नेशनल हाईवे पर गाड़ियां पार्क की गईं। करीब एक किलोमीटर पैदल चलकर लोग आयोजन स्थल तक पहुंचे। गांव के लोग खानदानी शेफ, दुबई से आयोजन के लिए आते
मेनार इलाके के लोग बड़ी संख्या में विदेशों में खानदानी शेफ हैं। शेफ का काम करने वाले युवाओं ने बताया कि होली का त्योहार आते ही वे गांव लौट आते हैं। आयोजन में भाग लेकर गौरव महसूस होता है। उदयपुर से होली देखने गए कैलाश नागदा ने बताया कि इंटरनेट पर मेनार की बारूद की होली को देखा और सुना था। परिवार के साथ मन था कि जाकर देखेंगे। पूरी रात यहां का नजारा देखकर बहुत मजा आया। गांव को दुनिया जानने लगी
गांव के बुजुर्ग ओंकारलाल मेनारिया ने बताया कि समय के साथ गांव में इस परंपरा में दिलचस्पी बढ़ी है। परिवार के बेटों के साथ बेटियां भी इस आयोजन में बढ़चढ़कर हिस्सा लेने लगी हैं। पिछले कुछ सालों में इंटरनेट पर प्रचार-प्रसार होने से यह परंपरा पूरे विश्व में जानी जाने लगी है। फोटोज में देखिए बारूद की होली का नजारा… वीडियो : ताराचंद गवारिया।
इनपुट सहयोग : सुरेश मेनारिया, मेनार।

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