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माफिया के खिलाफ पुलिस के बेहाल…:120 की रफ्तार से भाग रहे तस्कर, पुलिस के खटारा वाहनों के रास्ते में टूट रहे एक्सल

देवास में टीआई दिलीप पुरी की हत्या के बाद पुलिस सुरक्षा सवालों के घेरे में है। अफीम, एमडी, डोडाचूरा और शराब माफिया के प्रमुख रूट रतलाम, मंदसौर, नीमच में भास्कर ने पड़ताल की तो ​हालात चिंताजनक निकले। खासकर ड्रग्स की तस्करी में शामिल तस्कर/माफिया के पास क्रेटा, वर्ना, थार जैसी लक्जरी गाड़ियां है। वे 120 से 150 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से भागते है, जबकि पुलिस के पास वर्ष 2000 से 2005 के बीच खरीदे पुराने मॉडल की बोलेरो है, जो 80 किमी से अधिक रफ्तार नहीं पकड़ती और जबरन चलाएं तो एक्सेल या कुछ और टूट जाता है। वाहन ही नहीं हथियार, सुरक्षा संसाधन और फंडिंग के मामले में भी पुलिस माफिया से बहुत पीछे है। सिर्फ ये ही नहीं बॉर्डर की पुलिस चौकियों में तो कार, जीप जैसी सुविधा तक नहीं है। संसाधन बढ़ाने के बजाय घटाए जा रहे हैं। चार महीने पहले तक जिलेभर में 6 वाहन अधिग्रहण करने के पावर थे जो अब 3 वाहन तक सीमित कर दिए। पुलिस के पास पिस्टल सहित अन्य जरूरी हथियार और बलवा जैकेट तो है लेकिन तस्करों का पीछा करने के लिए वाहन रूपी रफ्तार ही नहीं है। लगभग सभी थानों में 45 % बल कम है। दबिश देने निकले, थान वाहन का एक्सल टूटा, 112 बुला कर खाली हाथ लौटे : रिंगनोद, कालूखेड़ा के अलावा बरखेड़ाकलां, नामली, रावटी, शिवगढ़ व आलोट थाने के बोलेरो वाहन खराब स्थिति में है। 31 अक्टूबर को ही तस्करी की सूचना पर जा रही रिंगनोद पुलिस का वाहन शक्करखेड़ी समीप खराब हो गया तो पुलिस को डायल 112 बुलाकर वापस लौटना पड़ा और तस्कर भाग गए सो अलग। 2 लाख किमी चला वाहन कंडम मानने के नियम मप्र पुलिस मुख्यालय एवं परिवहन विभाग के मानक नियम है कि बोलेरो, जिप्सी, सूमो जैसे पुलिस वाहन 2 लाख किमी चलने पर या स्थिति अनुसार 10 से 15 साल के बाद कंडम मान लिया जाता है लेकिन ज्यादातर थाना प्रभारी वर्ष 2000 से 2005 के बीच के बोलेरो में सवारी कर रहे और वे भी 3 से 4 लाख किमी चल चुके है। बाइक के लिए भी 1.20 लाख किमी या 7 साल अवधि तय है। 8-लेन पर सीआईएसएफ नहीं; तस्करों के पास आधुनिक हथियार व लग्जरी गाड़ियां दिल्ली-मुंबई 8-लेन शुरू हुए ढाई साल बीतने के बाद भी सुरक्षा के लिए प्रस्तावित सीआईएसएफ की तैनाती नहीं हो सकी है। कुंडा-दानपुर अंतरराज्यीय सीमा पर सीसीटीवी और स्थायी पुलिस चौकी न होने से रतलाम व मंदसौर से अफीम, डोडाचूरा और एमडी की तस्करी राजस्थान के बांसवाड़ा और गुजरात के हिम्मतनगर तक बेखौफ हो रही है। तस्करों के पास 8 राउंड वाली पिस्टल, 5-8 गोलियां चलाने वाले आधुनिक हथियार, नाकाबंदी तोड़ने के लिए लोहे के गार्ड लगे ट्रक और हुंडई क्रेटा जैसी तेज रफ्तार लग्जरी गाड़ियां हैं। वहीं पुलिस एसएलआर व 3-राउंड वाली इंसास के भरोसे है और बुलेटप्रूफ जैकेट तक नहीं हैं। जनवरी में 8-लेन पर डोडाचूरा से भरे ट्रैक्टर का पीछा करते समय रावटी थाने के जवान बहादुरसिंह दांगी घायल हो गए थे। एसपी अमित कुमार के मुताबिक सीमा पर नई चौकी का प्रस्ताव भेजा गया है और फिलहाल नाइट विजन ड्रोन से चेकिंग की जा रही है। सैलाना के कुंडा और राजस्थान के दानपुर के बीच की सीमा पर आम दिनों में सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है। रतलाम में इस साल एमडी की 2 फैक्ट्रियां पकड़ी जा चुकी हैं। तस्कर इस असुरक्षित रूट का फायदा उठाकर मप्र से राजस्थान होते हुए गुजरात तक आसानी से नशे की खेप पहुंचा रहे हैं। बल की कमी है लेकिन हमारी पेट्रोलिंग लगातार रहती है बल की कमी है लेकिन हमारी पेट्रोलिंग लगातार रहती है। गाड़ियां नई मिली है तो हथियार भी नए मिल रहे हैं। सुरक्षा के साधन भी पहले से बढ़े हैं। एक्सप्रेस-वे पर एक चौकी का प्रस्ताव भेजा है तो अंतरराज्यीय सीमा पर भी सीसीटीवी कैमरे लगवाएंगे। शहरी इलाकों में कैमरों की संख्या लगातार बढ़ रही है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में इनकी कमी है, इसे पूरी करने का प्रयास किया जाएगा।’ -अमित कुमार, एसपी रतलाम

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