रतलाम के ग्रामीण इलाकों में नाबालिगों की डिलीवरी कराकर उनके नवजात बच्चों को नर्सों के पास रखने के मामले सामने आए हैं। दैनिक भास्कर की पड़ताल में ऐसे 2 मामले उजागर हुए हैं, जिनमें सरकारी अस्पतालों की नर्सों ने बच्चों को अनधिकृत रूप से अपने पास रखा। इससे नवजातों की खरीद-फरोख्त और मानव तस्करी की आशंका गहरा गई है। बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) ने भी मानव तस्करी का संदेह जताया है। भास्कर ने रतलाम एसपी अमित कुमार को दस्तावेज सौंपे तो पुलिस ने नर्स से एक बच्चे को सुरक्षित रेस्क्यू किया। डॉक्टर को एफआईआर की धमकी… राजापुरा माताजी स्वास्थ्य केंद्र के मेडिकल ऑफिसर डॉ. रोहित ने सितंबर में विभागीय वॉट्सऐप ग्रुप पर शिकायत की थी। इसमें बताया था कि अस्पताल में नियमों के खिलाफ नाबालिगों की डिलीवरी कराई जा रही है और उनके नवजात बच्चों को नर्सें अपने पास रख लेती हैं। उन्होंने स्पष्ट लिखा था कि उनके अस्पताल में नियम विरुद्ध काम हो रहा है और नाबालिगों की डिलीवरी कराकर उनके नवजात बच्चों को खुद रख लिया जाता है। डॉक्टर का आरोप है कि जब उन्होंने इस गंभीर मुद्दे पर लिखित शिकायत दर्ज कराई, तो उन्हें एफआईआर दर्ज कराने की धमकी मिली। इतना ही नहीं, सीएमएचओ की ओर से डॉक्टर का दूसरे स्थान पर तबादला करने की बात कही जाने लगी। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने भी माना कि ग्रामीण अस्पतालों में अनाधिकृत रूप से नाबालिगों के प्रसव कराए जा रहे हैं। 1. पुलिस तक पहुंचा मामला तो सीडब्ल्यूसी में दूसरे का बच्चा पेश किया… असली परिजन ने फोड़ा भांडा शिवगढ़ के राजापुरा माताजी अस्पताल की नर्स अनीता खरत के पास बच्चा मिलने पर पुलिस ने 22 जून 2026 को उसे शिशु गृह भेजा। अगले दिन नर्स ने जन्म प्रमाण पत्र दिखाकर उसे अपना बेटा बताया। 24 जून को बच्चे के नाना ने शपथ पत्र देकर खुलासा किया कि नर्स उनके बच्चे को खेलने के बहाने ले गई थी। नर्स ने मातृत्व अवकाश तक नहीं लिया: जांच में डिलीवरी रजिस्टर में नर्स अनीता का नाम कांटछांट कर लिखा मिला। बाजना बीएमओ की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रसव रजिस्टर में नर्स का नाम तो दर्ज है , लेकिन उस दौरान उसने न तो कोई अवकाश लिया था और न ही प्रसूति छुट्टी का आवेदन दिया था। 2. छह साल से रिटायर्ड नर्स के पास बच्ची, न आधार कार्ड न स्कूल भेजा, अब बोली- मां के पास भेज दिया राजापुरा माताजी अस्पताल से 2024 में सेवानिवृत्त एक नर्स के पास भी 6 साल की बच्ची अनधिकृत रूप से रह रही थी। सीडब्ल्यूसी जांच में बच्ची का जन्म प्रमाण पत्र, आधार कार्ड न होने, स्कूल न भेजने की बात सामने आई। बाद में नर्स ने एक महिला के जरिए दावा किया कि यह उसकी बच्ची है, जिसे पति की मौत के बाद ससुरालियों ने नहीं अपनाया। जून में शिकायत मिलने पर नर्स ने दूसरे का बच्चा पेश कर दिया। पुलिस और एसपी को कई पत्र लिखे, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
– शंभुलाल चौधरी, अध्यक्ष, सीडब्ल्यूसी रतलाम संबंधित नर्स पर एफआईआर दर्ज करवाकर बच्चे को रेस्क्यू कराया गया है। मेरे पास पहले कोई पत्र नहीं आया। मीडिया से जानकारी मिली है।
– अमित कुमार, एसपी, रतलाम
