खजुराहो स्थित 11वीं सदी के जवारी (वामन) मंदिर की खंडित प्रतिमा को अगले महीने तक पुराना रूप मिल जाएगा। मंदिर के गर्भगृह में बलुआ पत्थर से बनी भगवान विष्णु की प्रतिमा का धड़, चारों भुजाएं और पैर मौजूद हैं लेकिन मस्तक लंबे समय से लापता था। ये अब पुरातत्व विभाग (ASI) के स्टोर में ही मिला है। ASI के महानिदेशक यदुबीर सिंह रावत ने कहा- भगवान विष्णु की 7 फीट ऊंची प्रतिमा का मस्तक खजुराहो में ही विभाग के स्टोर रूम में रखा था। इसका खुलासा ब्रिक्स सम्मेलन में बातचीत के दौरान हुआ। इसकी पहचान के लिए प्रतिमा की तस्वीरों से मिलान किया। पत्थर की संरचना, रंग, अनुपात और भगवान विष्णु के मुकुट की विशिष्ट बनावट जैसे पहलुओं के आधार पर साबित हो गया कि यही मूर्ति का मस्तक है। उन्होंने कहा- नवंबर 2026 तक मस्तक को प्रतिमा से जोड़ने का लक्ष्य है। हालांकि, अंतिम प्रक्रिया विशेषज्ञों की जांच और तकनीकी आकलन पर निर्भर करेगी। हालांकि, प्रतिमा का मस्तक कब और किन हालात में अलग हुआ, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। कहीं इसे मुस्लिम शासकों के हमले के दौरान तोड़ा गया बताया है तो कहीं इसे मूर्ति तस्करी से जोड़ा गया है। संस्था ने खर्च उठाने की अनुमति मांगी उधर, मूर्ति संरक्षण फाउंडेशन के चेयरमैन राकेश दलाल ने कहा, ‘यदि ASI नियमों के तहत अनुमति देता है, तो हमारी संस्था मस्तक जोड़ने में होने वाला रासायनिक और वैज्ञानिक संरक्षण संबंधी खर्च उठाने के लिए तैयार है।’ दलाल मामले में सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ चुके हैं। उन्होंने मामले में तस्करी की आशंका को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री और संस्कृति मंत्री को पत्र लिखकर सीबीआई से उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग भी की थी। संरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट में लगाई थी याचिका जवारी मंदिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा का सिर खंडित होने का मामला 13 जून 2025 को सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। पेशे से वकील और मूर्ति संरक्षण फाउंडेशन के चेयरमैन राकेश दलाल ने मूर्ति की मरम्मत, उसे बदलने या दोबारा बनवाने की मांग करते हुए याचिका दायर की थी। दलाल की मांग थी कि मंदिर के गर्भगृह में मौजूद भगवान विष्णु की खंडित प्रतिमा को सम्मानपूर्वक संरक्षित किया जाए और उसके मूल स्वरूप को बहाल करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। उनकी संस्था ने इसके लिए दिल्ली में जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन किया। केंद्रीय गृह मंत्री को ज्ञापन सौंपा और खजुराहो में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए जागरूकता अभियान भी चलाया था। चीफ जस्टिस की टिप्पणी पर हुआ था विवाद सीजेआई बीआर गवई की पीठ ने 16 सितंबर 2025 को दलाल की याचिका नंबर 32820/2025 खारिज कर दी थी। लेकिन उनकी टिप्पणी को लेकर विवाद पैदा हो गया था। उन्होंने कहा था- जाओ, अब भगवान से ही प्रार्थना करो। हम इसमें दखल नहीं दे सकते। सीजेआई बोले थे- मेरी टिप्पणी को गलत दिखाया अपनी इस टिप्पणी पर चीफ जस्टिस बीआर गवई ने 18 सितंबर 2025 को सफाई भी दी थी। उन्होंने कहा था कि मेरी टिप्पणी को सोशल मीडिया पर गलत तरीके से दिखाया गया। मैं सभी धर्मों का सम्मान करता हूं। वकील ने सीजेआई पर फेंका था जूता फैसले से खफा एक अन्य वकील राकेश किशोर कुमार ने 6 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान CJI बीआर गवई की तरफ जूता फेंका था। हालांकि, जूता उनकी बेंच तक नहीं पहुंच सका। सुरक्षाकर्मियों ने फौरन राकेश को पकड़ लिया। बाहर जाते वक्त उन्होंने नारा लगाया- सनातन का अपमान, नहीं सहेगा हिंदुस्तान। घटना के बाद CJI ने अदालत में मौजूद वकीलों से अपनी दलीलें जारी रखने को कहा था। उन्होंने कहा था- इस सबसे परेशान न हों। मैं भी परेशान नहीं हूं, इन चीजों से मुझे फर्क नहीं पड़ता। बाद में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने राकेश किशोर कुमार का वकालत का लाइसेंस रद्द कर दिया था। उनका रजिस्ट्रेशन 2011 का था। इसके साथ ही बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने भी उन्हें निलंबित कर दिया था। चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने कहा था कि यह वकीलों के आचरण नियमों का उल्लंघन है। निलंबन के दौरान किशोर कहीं भी प्रैक्टिस नहीं कर सकेंगे। मस्तक स्थापित होने पर बड़े आयोजन की मांग मूर्ति संरक्षण फाउंडेशन के चेयरमैन राकेश दलाल ने बताया कि उन्होंने यूनेस्को, मानवाधिकार से जुड़े निकायों और संबंधित मंत्रियों को पत्र लिखकर प्रतिमा का मस्तक स्थापित होने के अवसर पर बड़ा आयोजन कराने की मांग की है। उन्होंने 24 नवंबर 2026 को कार्तिक पूर्णिमा पर एक दीप, एक संकल्प अभियान के तहत मंदिर में दीपक जलाने की परमिशन भी मांगी है। मामले से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… CJI पर कोर्ट में जूता फेंकने की कोशिश, आरोपी वकील बोला– सनातन का अपमान नहीं सहेंगे सुप्रीम कोर्ट में एक वकील ने CJI बीआर गवई पर हमला करने की कोशिश की। यह घटना उस समय हुई, जब सीजेआई की बेंच एक मामले की सुनवाई कर रही थी। पढे़ं पूरी खबर…
