फ्रांस में हुए दंगों और भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों के बीच कनेक्शन का दावा किया गया है। अमेरिकी चैनल फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, 9 देशों में 101 संगठनों का नेटवर्क फैला हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, ये संगठन यूरोप में प्रदर्शनों के आयोजन, उनके बीच तालमेल बनाने और संदेश फैलाने में भूमिका निभाते हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि फ्रांस स्थित इंडियन अलायंस पेरिस (IAP) फ्रांस और भारत में विरोध प्रदर्शनों से जुड़े संदेश साझा करता है। 101 संगठनों में 33 छात्र और युवा समूह रिपोर्ट के मुताबिक, 101 संगठनों में से 33 का नेतृत्व छात्रों या युवाओं के हाथ में है। बाकी संगठनों का नेतृत्व मुख्य रूप से वयस्क करते हैं। नेटवर्क में वामपंथी, कम्युनिस्ट और समाजवादी समूहों के साथ छात्र संगठन भी शामिल हैं। रिपोर्ट में इस नेटवर्क को ‘रेड-ग्रीन प्रोटेस्ट इकोसिस्टम’ नाम दिया गया है। इसमें ‘रेड’ का मतलब कम्युनिस्ट और समाजवादी समूहों से, जबकि ‘ग्रीन’ का मतलब इस्लामी संगठनों से बताया गया है। रिपोर्ट में फ्रांस के कुछ ऐसे समूहों का भी जिक्र है, जो ‘एंटीफा’ नाम का इस्तेमाल करते हैं। फ्रांस, भारत के अलावा स्पेन और अल्बानिया का भी जिक्र रिपोर्ट में इंडियन अलायंस पेरिस के अलावा प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल नाम के एक अंतरराष्ट्रीय संगठन का भी जिक्र है। यह संगठन अलग-अलग देशों के राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों के बीच सहयोग बढ़ाने की बात करता है। प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल ने 16 अक्टूबर को अपनी वेबसाइट पर जारी ब्रीफिंग में फ्रांस, स्पेन, भारत और अल्बानिया में चल रहे आंदोलनों का एक साथ जिक्र किया। संगठन ने सवाल उठाया कि क्या ये आंदोलन उन परिस्थितियों को बदलने के लिए संगठित ताकत बन सकते हैं, जिनके खिलाफ वे शुरू हुए हैं। उसने इन आंदोलनों के बीच संपर्क और सहयोग बढ़ाने की बात भी कही। रिपोर्ट में मैनहैटन स्थित पीपल्स फोरम के साथ इंडियन अलायंस पेरिस की साझेदारी का भी जिक्र किया गया है। फ्रांस में आगे भी प्रदर्शनों की तैयारी रिपोर्ट के अनुसार, 17 अक्टूबर को फ्रांस में हुए प्रदर्शनों के बाद 24 अक्टूबर को ‘एक्ट II’ नाम से फिर प्रदर्शन करने की तैयारी है। एक डिजिटल मैप के हवाले से 212 जगहों पर प्रदर्शन की योजना का जिक्र किया गया है। इसके बाद 31 अक्टूबर को ‘एक्ट III’ और नवंबर में भी प्रदर्शनों की तैयारी बताई गई है। रिपोर्ट में प्रदर्शन आयोजित करने से जुड़ी एक वेबसाइट और टेलीग्राम के जरिए कार्यक्रमों की जानकारी, पोस्टर और संदेश साझा किए जाने का भी उल्लेख है। प्रदर्शनकारियों की मांगों में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का इस्तीफा भी शामिल बताया गया है। 20 नवंबर को यूरोप में युवा आंदोलन की तैयारी रिपोर्ट में 20 नवंबर को प्रस्तावित ‘इंटरनेशनल यूथ स्ट्राइक’ का भी जिक्र है। इसके तहत यूरोप में प्रदर्शन, हड़ताल, सभाएं और नाकेबंदी जैसी गतिविधियां करने की अपील की गई है। इसके घोषणापत्र में पूंजीवाद, युद्ध, सैन्य खर्च और आर्थिक कटौती की नीतियों की आलोचना की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन के सोशलिस्ट स्टूडेंट्स समेत कई देशों के संगठनों ने इस पहल से जुड़ने की बात कही है। अमेरिकी संगठनों और कारोबारी का भी जिक्र रिपोर्ट में ‘ब्रेकथ्रू न्यूज’, ‘कोडपिंक’ और ‘पार्टी फॉर सोशलिज्म एंड लिबरेशन’ जैसे संगठनों के नाम भी शामिल हैं। इसमें दावा किया गया है कि इन संगठनों को शंघाई में रहने वाले अमेरिकी मूल के कारोबारी नेविल रॉय सिंघम से आर्थिक मदद या समर्थन मिलता है। 14 अक्टूबर को ‘ब्रेकथ्रू न्यूज’ को दिए इंटरव्यू में सिंघम की पत्नी और कोडपिंक की सह-संस्थापक जोडी इवांस ने फ्रांस, स्पेन और भारत में हो रहे प्रदर्शनों का जिक्र किया। रिपोर्ट में कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी, बर्कले के अकादमिक हातेम बाजियान की टिप्पणियों और साझा किए गए वीडियो का भी उल्लेख है।
