सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत से CJI सूर्यकांत पर टिप्पणियों को लेकर स्पष्टीकरण मांगा। राउत ने चुनाव आयोग के कामकाज और SIR के मुद्दे पर INDIA ब्लॉक के नेताओं से मिलने से इनकार करने पर CJI की आलोचना की थी। पत्रकार निखिल वागले को भी नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) की आपराधिक अवमानना याचिका पर हुई है। कोर्ट ने कहा कि संस्थानों पर हमले अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण हैं। दोनों से पूछा है कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए। सुप्रीम कोर्ट ने सांसद संजय राउत और निखिल वागले को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट दी है। बेंच पहले उनके जवाब पर विचार करेगी। संजय राउत का बयान 11 अक्टूबर: CJI ने INDIA ब्लॉक के नेताओं से मिलने से मना किया यह विवाद CJI सूर्यकांत के INDIA ब्लॉक के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात का अनुरोध ठुकराने के बाद शुरू हुआ था। CJI ने कहा था कि मामला याचिका के जरिए अदालत में उठाया जा सकता है। संजय राउत और निखिल वागले ने CJI के इस फैसले की आलोचना की थी। 12 अक्टूबर को राहुल गांधी समेत अन्य विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च किया था और SIR के विरोध में 13 याचिकाएं दाखिल की थीं। 15 अक्टूबर: SCBA ने अवमानना याचिका दायर की CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच राहुल गांधी, संजय राउत समेत इंडिया ब्लॉक के नेताओं से जुड़ी याचिका पर सुनवाई कर रही थी। SCBA ने 15 अक्टूबर को याचिका दायर कर आरोप लगाया कि वागले ने अपने X अकाउंट पर CJI के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी। बाद में उन्होंने टिप्पणी वापस ले ली थी। SCBA के मुताबिक, बैडमिंटन कार्यक्रम के नाम पर दिखाई गई तस्वीरें लंदन की नहीं, बल्कि नवंबर 2025 में दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम में हुए कार्यक्रम की थीं। न्यायपालिका पर हमलों को लेकर चिंता सुनवाई के दौरान CJI ने कहा कि अदालतों ने हमेशा व्यक्तिगत स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों की रक्षा की है। ऐसे में न्यायपालिका पर हमले दुर्भाग्यपूर्ण हैं। SCBA अध्यक्ष और वरिष्ठ वकील प्रदीप राय ने भी कहा था कि ऐसी टिप्पणियों से सुप्रीम कोर्ट में लोगों का भरोसा कमजोर हो सकता है। इससे पहले अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू करने की मंजूरी दी थी।
