सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि केस की सुनवाई पर रोक लगा दी। यह केस 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ दिए गए बयानों से जुड़ा है। मामला महाराष्ट्र की ट्रायल कोर्ट में चल रहा था। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की बेंच ने महाराष्ट्र सरकार और शिकायतकर्ता एमएच श्रीश्रीमल को नोटिस जारी किया है। राहुल गांधी के खिलाफ देशभर में दर्ज आपराधिक मानहानि के मामलों की कुल संख्या 16 है। इसमें से 15 मामले उन्होंने अपने 2024 के लोकसभा चुनावी हलफनामे में घोषित किए हैं, और 1 मामला पुणे में सावरकर परिवार द्वारा दायर किया गया है। राहुल ने बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी राहुल गांधी ने बॉम्बे हाईकोर्ट के 8 सितंबर के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ जारी समन रद्द करने से इनकार किया था। राहुल गांधी की ओर से वकील अभिषेक सिंघवी पेश हुए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला दिया। सिंघवी ने कहा कि इस मामले में कानून पहले ही स्पष्ट हो चुका है। हाईकोर्ट ने शिकायतकर्ता एमएच श्रीश्रीमल की याचिका पर गिरगांव मजिस्ट्रेट के 28 अगस्त 2019 के आदेश को बरकरार रखा था। इस आदेश में राहुल गांधी के खिलाफ केस की प्रक्रिया शुरू की गई थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने अपना 2021 का आदेश जारी रखा। इसमें मजिस्ट्रेट को शिकायत पर सुनवाई छह हफ्ते टालने को कहा गया था। राहुल गांधी ने 25 सितंबर 2018 को अमेठी में राफेल विमान सौदे को लेकर निशाना साधते हुए बयान दिया था। उन्होंने पीएम मोदी पर “चोरों का सरदार” और “चौकीदार चोर है” की टिप्पणी की थी। शिकायत में क्या आरोप श्रीश्रीमल ने हाईकोर्ट में राहुल गांधी की याचिका का विरोध किया था। उन्होंने कहा था कि वह BJP के सदस्य हैं और अपने नेता के खिलाफ दिए गए बयानों से आहत हैं। शिकायत में कहा गया था कि राहुल गांधी ने 20 सितंबर 2018 को राजस्थान में एक जनसभा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बदनाम किया। शिकायतकर्ता का आरोप था कि राहुल गांधी के बयान BJP के सभी सदस्यों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े भारतीय नागरिकों के खिलाफ सीधे आरोप थे।
