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सचिव की शिकायत के बाद महिला सरपंच पति समेत गायब:30-40 लाख रुपए की कथित गड़बड़ी का लगाया था आरोप; 4 दिन से परिवार परेशान

जबलपुर जिला मुख्यालय से करीब 62 किलोमीटर दूर झलोन ग्राम पंचायत की महिला सरपंच लक्ष्मीबाई और उनके पति अशोक सिंह के घर नहीं लौटने से परिवार परेशान है। परिजनों के मुताबिक, दोनों 8 अक्टूबर को पंचायत में कथित गड़बड़ियों की शिकायत करने कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ के पास जबलपुर गए थे। 9 अक्टूबर को उन्होंने बरगी विधानसभा के पूर्व विधायक संजय यादव से भी मुलाकात कर शिकायत की। इसके बाद 10 अक्टूबर को बेटे ने फोन लगाया तो पिता का मोबाइल बंद मिला। सोमवार तक दोनों के घर नहीं लौटने से परिवार की चिंता बढ़ गई। हालांकि गांव से पता चला है कि सरपंच के बेटे ने उनके किसी रिश्तेदार के यहां होने की बात भी कही है। लक्ष्मीबाई ने पंचायत सचिव पुष्पराज सिंह पर विकास कार्यों में गड़बड़ी, राशि निकालने के लिए ओटीपी लेने और विरोध करने पर धमकाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके पति का दावा है कि पंचायत से 30 से 40 लाख रुपए निकल चुके हैं, लेकिन गांव में विकास कार्य नहीं हुए। दैनिक भास्कर की टीम जब झलोन पहुंची तो परिवार ने बताया कि सरपंच और उनके पति अब तक घर नहीं लौटे हैं। जिला पंचायत के डिप्टी सीईओ पीएल यादव ने शिकायत को गंभीर बताते हुए जांच के लिए जनपद पंचायत शहपुरा की टीम भेजने की बात कही है। क्या है कथित घोटाला? इन बिंदुओं पर उठे सवाल 30 से 40 लाख रुपए निकालने का दावा: सरपंच के पति अशोक सिंह के मुताबिक, पंचायत से लाखों रुपए निकाले गए, लेकिन गांव में विकास कार्यों के नाम पर बहुत कम काम हुआ। फर्जी बिल बनवाने का आरोप: अशोक सिंह का आरोप है कि सचिव पुष्पराज सिंह ने गांव के व्यापारी संदीप जैन के साथ मिलकर सड़क, नाली और भवन निर्माण के लिए लोहा, सीमेंट व अन्य सामग्री खरीदने के फर्जी बिल तैयार कराए। ओटीपी लेकर राशि निकालने का आरोप: लक्ष्मीबाई और उनके पति का कहना है कि कम पढ़े-लिखे होने का फायदा उठाकर सचिव पहले उनका मोबाइल लेकर ओटीपी हासिल करता था और फिर सरकारी राशि निकालता था। मोबाइल छीनने और धमकाने की शिकायत: परिवार का आरोप है कि जब उन्होंने मोबाइल देना बंद किया तो सचिव ने कथित तौर पर जबरन मोबाइल छीनना शुरू कर दिया। विरोध करने पर धमकियां भी दी गईं। खर्च का हिसाब मांगा: सरपंच का कहना है कि पंचायत से राशि निकलने के बावजूद उन्हें यह जानकारी नहीं मिली कि पैसा कहां और किन कामों पर खर्च किया गया। ये सभी आरोप सरपंच और उनके परिवार की ओर से लगाए गए हैं। राशि के वास्तविक उपयोग, बिलों की सत्यता और कथित अनियमितताओं की पुष्टि जांच और पंचायत के रिकॉर्ड से होना बाकी है। साढ़े चार साल में सड़क के अलावा कोई बड़ा काम नहीं होने का दावा लक्ष्मीबाई वर्ष 2022 में पंचायत चुनाव के दौरान निर्विरोध सरपंच चुनी गई थीं। उनका कहना है कि पिछले साढ़े चार साल में गांव में एक लंबी सड़क के अलावा कोई बड़ा विकास कार्य नहीं हुआ। गांव में सड़क और पानी की समस्या बनी हुई है। पंचायत भवन की हालत भी जर्जर है, जबकि पानी की टंकी बनने के बावजूद घरों तक नियमित पानी नहीं पहुंच रहा। लक्ष्मीबाई के पति अशोक सिंह का कहना है कि गांव की स्थिति साढ़े चार साल पहले जैसी ही है। पंचायत से लाखों रुपए खर्च होने के बावजूद लोगों को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सचिव पंचायत के कामकाज पर नियंत्रण रखता है और सरपंच की आपत्तियों को नजरअंदाज करता है। बेटे ने कहा- माता-पिता शिकायत करने गए थे, अब तक नहीं लौटे लक्ष्मीबाई के बेटे अब्बू सिंह के मुताबिक, उनके माता-पिता 8 अक्टूबर को शिकायत करने जबलपुर गए थे। फोन पर आखिरी बार हुई बातचीत में उन्होंने बताया था कि कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ को शिकायत दे दी है और कुछ देर बाद वापस निकलेंगे। लेकिन वे घर नहीं पहुंचे। अब्बू का कहना है कि उनकी मां मोबाइल नहीं रखती हैं और पिता का फोन बंद आ रहा है। परिवार को यह भी चिंता है कि पंचायत में कथित गड़बड़ियों को लेकर सचिव से विवाद चल रहा था और पहले धमकियां भी दी गई थीं। पंचायत भवन पर सालों से ताला, ग्रामीणों ने भी उठाए सवाल ग्रामीण राधे झारिया का कहना है कि पंचायत भवन सालों से बंद पड़ा है। भवन पर लगे ताले में जंग लग चुकी है और अंदर गंदगी है। उनके मुताबिक, गांव में विकास कार्यों को लेकर नियमित बैठकें भी नहीं होतीं और सचिव कभी-कभार ही दिखाई देते हैं। राधे झारिया का आरोप है कि महिला सरपंच के कम पढ़े-लिखे होने का फायदा उठाकर सचिव पंचायत का कामकाज अपने हाथ में रखता है। उन्होंने बताया कि गांव में कई जगह सड़क नहीं है, नालियां नहीं बनी हैं और पानी की टंकी से घरों तक आपूर्ति नहीं होती। ऐसे में ग्रामीणों को मंदिर के बोर से पानी भरना पड़ता है। ग्रामीण अब सूचना के अधिकार के तहत पंचायत में हुए कार्यों, खर्च की गई राशि और निर्माण सामग्री की खरीदी का ब्योरा जुटाने की तैयारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि पंचायत में कितना काम हुआ और राशि कहां खर्च की गई। पूर्व विधायक ने भी उठाया मामला बरगी विधानसभा के पूर्व विधायक संजय यादव ने लक्ष्मीबाई की शिकायत का समर्थन करते हुए कहा कि क्षेत्र की कई पंचायतों में महिला और आदिवासी सरपंचों के कामकाज में सचिवों के हस्तक्षेप की शिकायतें सामने आती हैं। उनका आरोप है कि जो सरपंच सचिव के तरीके से काम नहीं करते, उन्हें परेशान किया जाता है। उन्होंने झलोन के अलावा शहपुरा और बेलखेड़ा क्षेत्र की पंचायतों में भी ऐसी समस्याएं होने की बात कही। सचिव ने फोन नहीं उठाया, जांच के लिए टीम भेजेगा विभाग पंचायत सचिव पुष्पराज सिंह से आरोपों पर पक्ष जानने के लिए फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। जिला पंचायत के डिप्टी सीईओ पीएल यादव ने कहा कि शिकायत गंभीर है और इसकी जांच जरूरी है। उन्होंने बताया कि जनपद पंचायत शहपुरा की टीम को मौके पर भेजा जाएगा। ये खबर भी पढ़ें… महिला सरपंच की शिकायत…सचिव मोबाइल छीनकर OTP डालता है सचिव मेरा मोबाइल छीन लेता है। गांव के विकास का सरकारी पैसा कब आता है और कब निकल जाता है, मुझे पता ही नहीं चलता। वह घर आकर मोबाइल लेता है और उसमें आने वाला ओटीपी डालकर चला जाता है।यह कहना है झलौन गांव की महिला सरपंच लक्ष्मी बाई का। निर्विरोध चुनी गई लक्ष्मी बाई कहती हैं कि सरपंच बने चार साल से ज्यादा हो गए।पूरी खबर पढ़ें

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