रविवार को सीहोर में आदिवासियों के 12 घर गिराए गए। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसे जुल्म की पराकाष्ठा बताया और प्रभावित परिवारों के साथ धरना स्थल पर बैठ गए। उसी दिन रायसेन के भोजपुर में उन्होंने कहा कि लाड़ली बहना योजना अब कोई सरकार बंद नहीं कर पाएगी। इसके ठीक बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि, ‘मोहन-मामा’ की आपसी खींचतान में आदिवासी परिवार उजड़ रहे हैं। शिवराज के मना करने के बाद भी बुलडोजर क्यों चला, अपनी ही पार्टी की सरकार में उन्हें धरने पर क्यों बैठना पड़ा, और क्या शिवराज और मोहन यादव के बीच खींचतान है? डिकोड करेंगे मध्य प्रदेश एक्सप्लेनर में… सवाल 1: शिवराज पहले मना कर चुके थे, फिर भी बुलडोजर कैसे चल गया? जवाब: क्योंकि शिवराज के विरोध के बावजूद कार्रवाई रोकने का कोई लिखित आदेश सामने नहीं आया है। दूसरी ओर, वन विकास निगम का कहना है कि बेदखली की प्रक्रिया पहले से चल रही थी। सवाल 2: क्या पहली बार है जब शिवराज ने अपनी ही सरकार के सामने सवाल उठाए हों? जवाब: नहीं, यह पहली बार नहीं है। मोहन सरकार के कार्यकाल में कम से कम 3 बड़े मौकों पर शिवराज का रुख सरकार के फैसलों या बयानों से अलग दिखा। 1. खिवनी, जून 2025 2. मूंग खरीदी, जुलाई 2026 3. लाड़ली बहना, अक्टूबर 2026 सवाल 3: क्या शिवराज सच में नाराज हैं, या इसके पीछे कोई राजनीतिक रणनीति है? जवाब: शिवराज इसे गरीब आदिवासियों के साथ हुआ अन्याय बताते हैं। उनका कहना है कि ये परिवार भाजपा के वोटर हैं और कुछ अफसर पार्टी को बदनाम करना चाहते हैं। राजनीतिक विश्लेषक इसमें सधी हुई रणनीति के संकेत देखते हैं… 1. ऐसे मुद्दे, जिन पर विरोध करना मुश्किल हो 2. तरीका नया नहीं है 3. निशाने पर अफसर, मुख्यमंत्री नहीं सवाल 4: तो क्या शिवराज और मोहन यादव के बीच सब ठीक नहीं है? जवाब: सार्वजनिक तौर पर दोनों नेता एक-दूसरे के खिलाफ कुछ नहीं कहते, लेकिन कई मुद्दों पर दोनों का रुख अलग दिखा है। सार्वजनिक मंच पर सम्मान सीएम ने जांच की बात की, पर कार्रवाई को गलत नहीं ठहराया अंदरखाने खिंचाव की चर्चा विपक्ष ने बनाया ‘मोहन-मामा’ का मुद्दा आगे क्या होगा? मामले की अब दो जगह जांच होगी। मध्य प्रदेश एक्सप्लेनर की ये कड़ी भी पढ़ें OBC आरक्षण फैसला, 13% होल्ड पदों का क्या होगा- सामान्य वर्ग को नौकरी मिलेगी? 7 साल, 15 दिन की सुनवाई, 30 घंटे की बहस और 159 पेज का फैसला…हाईकोर्ट के जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस विनय सराफ की बेंच ने 9 अक्टूबर को तय कर दिया कि मध्य प्रदेश में OBC आरक्षण 27% नहीं, 14% ही रहेगा। आखिर विवाद शुरू कहां से हुआ, कोर्ट ने संशोधन को असंवैधानिक क्यों माना, 13% होल्ड पदों का अब क्या होगा, असर किन-किन भर्तियों पर पड़ेगा…पूरा एक्सप्लेनर पढ़िए।
