छत्तीसगढ़ में CM फेस को लेकर कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी सुखदेव भगत ने कहा कि इसे गुटबाजी कहना सही नहीं है। पार्टी में अलग-अलग कद्दावर नेताओं का होना कांग्रेस की ताकत है। सभी नेताओं की अपनी भूमिका और कार्यशैली है और पार्टी सबको साथ लेकर चलेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में मुख्यमंत्री का फैसला नेताओं के समर्पण और योगदान को देखकर होगा, न कि भाजपा की तरह किसी एक व्यक्ति को अचानक किसी को मुख्यमंत्री के पद पर बिठा दें। प्रदेश प्रभारी ने कहा कि आदिवासी समाज के लिए जल, जंगल और जमीन केवल संसाधन नहीं, बल्कि उनकी धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक जिंदगी का हिस्सा है। पांचवीं अनुसूची में ग्राम सभा को अधिकार दिए गए हैं, लेकिन भाजपा सरकार में इन्हें कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने राहुल गांधी के साथ हुए व्यवहार को लेकर भाजपा पर संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग का आरोप लगाया। बोधघाट परियोजना के विरोध को लेकर कहा कि कांग्रेस का विरोध राजनीतिक नहीं, बल्कि दिल से है। झीरम हमले के मामले में 10 आरोपियों को सुनाई गई फांसी की सजा पर उन्होंने कहा कि इस फैसले से कांग्रेस पार्टी संतुष्ट नहीं है। उनका कहना है कि छोटे स्तर के लोगों को बलि का बकरा बनाया गया, जबकि बड़े षड्यंत्रकारियों के नाम और भूमिका की जांच नहीं हुई। प्रदेश में कांग्रेस की गुटबाजी के सवाल पर उन्होंने कहा कि अलग-अलग कद्दावर नेताओं का होना पार्टी की ताकत है। दंतेवाड़ा प्रवास के दौरान उन्होंने गुटबाजी, वोट चोरी समेत अन्य मुद्दों पर भी मीडिया से बातचीत की। कांग्रेस प्रदेश प्रभारी बनने के बाद सुखदेव भगत का यह पहला दंतेवाड़ा दौरा है। सवाल- भाजपा जब चुनाव लड़ती है तो पार्टी का फोकस किसी भी तरह सत्ता हासिल करने पर रहता है। कांग्रेस में चुनाव के समय CM के लिए कई चेहरे सामने आते हैं और गुटबाजी दिखाई देती है। पिछले विधानसभा चुनाव में भी इसका असर दिखा। अब आपको प्रभारी बनाया गया है तो इसे कैसे संभालेंगे? जवाब – गुटबाजी कहना गलत है। हम तो इससे खुश होते हैं। जिस तरह से एक टीम में कोई डिफेंस में खेलता है और कोई फॉरवर्ड में। यह हमारे लिए खुशी की बात है कि हमारी पार्टी में अलग-अलग कद्दावर नेता हैं। सबकी अपनी कार्यशैली है और अपना योगदान है। हमारी पार्टी में इतने बड़े-बड़े चेहरे हैं। भाजपा की तरह नहीं है कि मोदी जी और शाह जी आएं, पर्ची निकालें और मुख्यमंत्री के पद पर किसी को भी बिठा दें। हम हमारे नेताओं का समर्पण देखते हैं, उनका डेडिकेशन देखते हैं। सभी नेताओं की अपनी भूमिका है और हम सभी को साथ लेकर चलेंगे। सवाल- कांग्रेस छत्तीसगढ़ में वोट चोरी की बात कर रही है। क्या आप मानते हैं कि छत्तीसगढ़ में वोट चोरी हुई है? अगर ऐसा है तो क्या 2018 में भी वोट चोरी हुई होगी? तब आपकी सरकार बनी थी। जवाब- बहुत लोग कहते हैं कि जहां हमारी सरकार होती है, वहां वोट चोरी की बातें क्यों नहीं होतीं? आपने देखा होगा कि यह मामला अब पकड़ा गया है। कांग्रेस के समय ऐसा आरोप नहीं लगा। जब केंद्र में भाजपा की सरकार आई और उनकी तरफ से नियुक्त चुनाव आयोग पर सवाल उठे, तब वोट चोरी का मुद्दा सामने आया। जब कांग्रेस के समय चुनाव आयुक्त नियुक्त होते थे, तब क्या वोट चोरी का आरोप लगा था? आज यह आरोप भाजपा सरकार के समय नियुक्त चुनाव आयोग पर लग रहा है। चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया में भी बदलाव किया गया। पहले सुप्रीम कोर्ट के जज को शामिल किया जाता था, लेकिन बाद में उनकी जगह सरकार के कैबिनेट को लाया गया। हमारा आरोप है कि भाजपा के कार्यकाल में वोट चोरी हुई है, कांग्रेस ने वोट चोरी नहीं की। चंबल घाटी में बहुत सारे डकैत होते थे। वे लूटपाट करते थे और मां भगवती, दुर्गा जी और हनुमान जी के मंदिर बनाते थे। क्या इससे उनके अपराध सही हो जाएंगे? अगर किसी ने मंदिर बना दिया तो क्या वह सामाजिक रूप से बहुत अच्छा व्यक्ति हो गया? ऐसा नहीं है। कहीं-कहीं जानबूझकर ऐसी चीजें छोड़ दी जाती हैं, ताकि बाद में उन्हें अपने पक्ष में सही ठहराया जा सके। लेकिन राहुल गांधी ने वोट चोरी के मामले को पूरे तथ्यों के साथ उठाया है। उन्होंने उदाहरण भी दिए हैं। देश इस पूरे मामले को देख रहा है। हमारा आरोप है कि ज्ञानेश कुमार प्रधानमंत्री के संरक्षण में SIR के नाम पर वोट काट रहे हैं और वोट की चोरी हो रही है। सवाल- बोधघाट परियोजना और पोलावरम बांध की वजह से होने वाली परेशानी को लेकर कांग्रेस का विरोध वास्तव में मुद्दे को लेकर है या यह सिर्फ राजनीति है? जवाब – हमारा विरोध दिल से है। आपने कभी गंगा को देखा है? अगर गंगोत्री से गंगा की शुरुआत होती है तो हमारी तरफ से भी इस आंदोलन की शुरुआत हुई है। जब हमारी सरकार थी, तब हम इस विषय को लेकर संवेदनशील थे और हमने इसे निरस्त भी किया था। भाजपा के लोगों ने ‘सेवा संकल्प’ का पोस्टर लगाया है। लेकिन सेवा संकल्प सेतु जनता के लिए नहीं है, ये कॉरपोरेट घरानों के लिए है। राहुल गांधी सड़क पर भी लोगों के लिए लड़ रहे हैं और आज जो वोट चोरी की बात हो रही है, उसमें भी संवैधानिक संस्थाओं को बचाने की लड़ाई है। हम इन मुद्दों को दिल से लेते हैं और पूरी ताकत से लड़ते हैं। राहुल गांधी यहां आएं और इन मुद्दों को देखें। इसके बाद हम इन्हें बड़े पैमाने पर उठाएंगे। सवाल- झीरम हमले में शामिल 10 लोगों को फांसी की सजा सुनाई गई है। इस फैसले को लेकर आप क्या कहना चाहेंगे? जवाब- पार्टी इस फैसले से संतुष्ट नहीं है। कहीं न कहीं दरार को कागज से ढकने का प्रयास किया गया है। हमारा कहना है कि जो लोग छोटे स्तर पर थे, उन्हें बलि का बकरा बनाया गया, जबकि पूरे षड्यंत्र के पीछे जो लोग थे, उन तक जांच नहीं पहुंची। भाजपा सरकार के समय यह घटना हुई थी। इससे संदेश जाता है कि जिन बड़े लोगों के नाम सामने आए थे और जिन्होंने षड्यंत्र रचा था, वे कहीं न कहीं बच गए। जिन लोगों ने सरेंडर किया और कहा था कि वे झीरम घाटी की घटना में शामिल थे, क्या उनसे पूछताछ की गई? अगर नहीं की गई तो दाल में कुछ काला जरूर है। हम इसकी लड़ाई लड़ेंगे। जिन छोटे आरोपों में लोगों को जेल में बंद किया गया, हम उनसे भी बात करेंगे। अगर उनके लिए कोई कानूनी या अन्य सुविधा उपलब्ध कराने का प्रावधान है तो उन्हें वह सुविधा दिलाने का प्रयास करेंगे। सवाल- आज के दौरे पर क्या खास रहा? जवाब- आज हमने ब्लैक डे भी मनाया है। राहुल गांधी के साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया, वह लोकतंत्र के लिए चिंता की बात है। भाजपा सरकार उनसे डरती है। जब उनसे सवाल पूछे जाते हैं तो इस तरह की कार्रवाई की जाती है और संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग किया जाता है। इसके बाद हम बोधघाट जाएंगे और प्रभावित लोगों से मुलाकात करेंगे। खासकर यहां रहने वाले आदिवासी समाज के लोगों की जिंदगी जल, जंगल और जमीन से जुड़ी है। उनके धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक जीवन का आधार यही है। पांचवीं अनुसूची में ग्राम सभा को बहुत शक्तिशाली बनाया गया है और उसकी अपनी एक वैल्यू है, लेकिन धीरे-धीरे ग्राम सभा के अधिकार छीने जा रहे हैं। जंगल छीना जा रहा है और लोगों को सिर्फ विस्थापन मिल रहा है। हम पर्यावरण से जुड़े मुद्दों और प्राकृतिक आपदा से प्रभावित लोगों से भी बात करेंगे। अभी बाढ़ की स्थिति रही है, इसलिए बाढ़ पीड़ितों से भी मुलाकात करेंगे। कांग्रेस सिर्फ राजनीतिक दल के रूप में काम नहीं करना चाहती, बल्कि लोगों के सुख-दुख में सामाजिक रूप से भी उनके साथ खड़ी रहना चाहती है। ………………………… इससे जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… सुखदेव भगत बने छत्तीसगढ़ कांग्रेस के नए प्रभारी:विवादों के बाद भूपेश पंजाब से हटाए गए, पायलट को जिम्मेदारी; बघेल अब असम के इन-चार्ज सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़ कांग्रेस का नया प्रभारी बनाया गया है। विवादों के बाद भूपेश बघेल को पंजाब प्रभारी के पद से हटा दिया गया। उनकी जगह छत्तीसगढ़ प्रभारी सचिन पायलट को पंजाब की जिम्मेदारी दी गई। भूपेश बघेल को असम का महासचिव प्रभारी बनाया गया है। पढ़ें पूरी खबर…
