नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कलियासोत नदी के किनारे हुए अतिक्रमण को लेकर सरकार से एक माह में रिपोर्ट मांगी है। ट्रिब्यूनल ने साफ आदेश दिए हैं कि नदी के दोनों किनारों पर 33 मीटर (करीब 100 फीट) नो-कंस्ट्रक्शन जोन रहेगा और इसी दायरे में आने वाले सभी निर्माण हटाने होंगे। हालांकि वैटलैंड घोषित होने के बाद यह दायरा 50 मीटर भी किया जा सकता है। इस मामले को लेकर दैनिक भास्कर ने जब कलियासोत नदी की 20 किमी की ग्राउंड रिपोर्ट की तो चौंकाने वाली जानकारी सामने आईं। साल 2022 तक एनजीटी में याचिका के समय नदी में 97 अतिक्रमण थे, जो बढ़कर करीब 300 तक पहुंच गए हैं। यानी पिछले तीन साल में नदी के 33 मीटर के दायरे में करीब 200 नए कब्जे हो गए हैं। भोपाल से भोजपुर तक बहने वाली कलियासोत नदी करीब 36 किमी लंबी है, जिसमें से 23.99 किमी हिस्सा भोपाल सीमा में आता है। इनमें 14 किमी क्षेत्र कृषि प्रधान है, लेकिन कलियासोत डेम से सलैया तक 9.9 किमी के आबादी वाले हिस्से में नदी के 33 मीटर दायरे में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण खड़े हो चुके हैं। इसमें कोई छोटे अतिक्रमण नहीं बल्कि कई मल्टीस्टोरी, मकान और रिसॉर्ट भी शामिल हैं। मिसरोद से कोलार आने वाली रोड पर कोड़ी गांव में तो नदी को पाटकर रिटेनिंग वॉल बना दी गई है। इसी से सटकर 5 एकड़ में बड़ा रिसॉर्ट (ग्रेसेस रिट्रीट) बनाया जा रहा है।
अवैध निर्माण के 5 हॉट स्पॉट… भोपाल जिले में 20 किमी तक दोनों किनारों की पड़ताल स्पॉट-1
ग्राम कोड़ी यहां होटल ग्रेसेस रिट्रीट नाम का रिसॉर्ट बनाया जा रहा है। यह कलियासोत नदी में रिटेनिंग वॉल बनाकर बनाया जा रहा है। स्पॉट-2:
सर्वधर्म पुल राजस्व रिकॉर्ड में यहां नदी की चौड़ाई 50 मीटर थी, लेकिन अब सिर्फ 24 मीटर बची। यहां मुहाने पर ही 15 से ज्यादा मकान बने हैं। स्पॉट-3:
सर्वधर्म ए-बी सर्वधर्म ए और बी सेक्टर में 22 मल्टीस्टोरी बिल्डिंग, 3 मकान और 100 से ज्यादा झुग्गियां कलियासोत नदी के 33 मीटर के दायरे में। स्पॉट-4
शिर्डीपुरम… भूमिका रेसिडेंसी ने नदी का बहाव क्षेत्र घटा दिया है। यहां सागर प्रीमियम टॉवर और सिग्नेचर-99 का कुछ हिस्सा नदी की सीमा में है। स्पॉट-5
जेके से सलैया जेके हॉस्पिटल व एलएन मेडिकल कॉलेज की इमारतें, लैब, नर्सिंग कॉलेज और आकृति ईको सिटी के कई मकान भी नदी के दायरे में। निजी बिल्डर ही नहीं, सरकारी एजेंसियों ने भी कर लिए नदी में पक्के निर्माण कलियासोत सिर्फ निजी बिल्डरों की मनमानी का ही शिकार नहीं, बल्कि बीडीए के सलैया प्रोजेक्ट की दो इमारतें व निगम का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी इसके दायरे में है। इसी कारण डेम क्षेत्र में 50 मी. चौड़ी नदी सलैया आते-आते 30 मी. रह गई है। सलैया और सनखेड़ी में तो नदी के अंदर भी निर्माण हैं। भोज विवि से सर्वधर्म शिर्डीपुरम और जेके हॉस्पिटल से सलैया तक नदी का बहाव ज्यादा संकुचित हुआ है। 1995 से पहले यह क्षेत्र प्लानिंग एरिया से बाहर था। यहां सीमित निर्माण थे, पर बाद में कॉलोनियां बसती चली गईं। एनजीटी ने 17 मार्च तक नए कब्जों की सूची मांगी एनजीटी ने 30 जनवरी को हुई सुनवाई में स्पष्ट किया था कि ट्रिब्यूनल का उद्देश्य जलस्रोतों से अतिक्रमण हटाना और भोज वेटलैंड की रक्षा करना है। मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च 2026 को होगी, जिसमें आदेशों का कितना पालन किया गया इसकी सख्ती से समीक्षा की जाएगी। एनजीटी ने याचिकाकर्ता से कहा कि अगली सुनवाई से पहले यहां हुए नए अतिक्रमणों की सूची भी वह उपलब्ध कराए। सिर्फ 2000 वर्गफीट की अनुमति ली थी ग्राम पंचायत से सिर्फ 2 हजार वर्गफीट में निर्माण की अनुमति मांगी गई थी, जो हमने दी है। निर्माण तो शायद पांच एकड़ में चल रहा है। नदी पर प्राइवेट पुल भी बनाया गया है। इसकी अनुमति हमने नहीं दी है।
भंवरलाल नरवरिया, सरपंच, कोड़ी गांव पहले भी हमने एनजीटी के आदेश पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की है। अब नए निर्माण हो रहे हैं तो टीम को भेजकर इसकी भी जांच कराई जाएगी। अगर उल्लंघन पाया जाता है तो कार्रवाई की जाएगी।
कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर, भोपाल
