भोपाल की शाहपुरा थाना पुलिस ने BDA के भूखंड को हड़पने की नीयत से कथित तौर पर फर्जी बंटान दस्तावेज तैयार कर उसे असली दस्तावेज के रूप में इस्तेमाल करने के आरोप में केस दर्ज किया है। आरोपी रिटायर्ड आईबी का अधिकारी है। आरोपी रविंद्र डोंगरे के खिलाफ धारा 420, 467 और 468 के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की गई है। शिकायतकर्ता अनुराग गर्ग ने क्राइम ब्रांच के माध्यम से पुलिस को शिकायत दी थी। जांच के बाद प्रथम दृष्टया अपराध घटित होना पाए जाने पर वरिष्ठ अधिकारियों से अनुमति और विधिक अभिमत लेकर एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस के मुताबिक, अनुराग गर्ग, उनके भाई अनुज गर्ग और मां सुधा गर्ग के नाम बावड़िया कला में करीब 0.82 डेसीमल जमीन है। इसका खसरा नंबर 293/10 और 293/11 बताया गया है। शिकायत में कहा गया है कि उक्त जमीन को BDA की योजना के तहत एक्सचेंज यानी विनिमय की प्रक्रिया में शामिल किया गया है। इसी प्रक्रिया में जमीन के सह-स्वामित्व में अनुराग, अनुज, सुधा गर्ग और BDA शामिल हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि रविंद्र और मनोज डोंगरे ने वर्ष 1994 में खसरा नंबर 293 की 0.50 डेसीमल जमीन खरीदी थी। इसके साथ वर्ष 1987 का नक्शा लगाया गया था। आरोप है कि बाद में दोनों ने 3 अप्रैल 2000 का एक कथित बंटान दस्तावेज तैयार किया। इसी दस्तावेज के आधार पर जमीन पर अपना दावा किया गया। SDO के आदेश में भी बंटान पर सवाल शिकायत में बताया गया है कि रविंद्र डोंगरे ने इसी दस्तावेज के आधार पर SDO कोलार के यहां अपील क्रमांक 36/अपील/22-23 प्रस्तुत की थी। इसका निराकरण 7 फरवरी 2023 को हुआ। अनुराग गर्ग के मुताबिक SDO के आदेश के पेज-6 में उल्लेख है कि 3 अप्रैल 2000 का बंटान राजस्व अभिलेख में दर्ज नहीं है। साथ ही यह भी स्पष्ट नहीं है कि बंटान का आदेश किस राजस्व प्रकरण में पारित किया गया था। शिकायतकर्ता का दावा है कि तथाकथित बंटान न तो संबंधित हल्का पटवारी द्वारा तैयार किया गया और न ही तहसीलदार से अनुमोदित अथवा स्वीकृत है। इसी आधार पर उन्होंने दस्तावेज को फर्जी बताते हुए कार्रवाई की मांग की। आधी जमीन पहले ही बेचने का भी आरोप अनुराग गर्ग ने शिकायत में आरोप लगाया है कि रविंद्र डोंगरे ने 0.25 डेसीमल जमीन को 0.50 डेसीमल बताकर दावा किया। जबकि इस जमीन में से 0.25 डेसीमल हिस्सा उन्होंने 2 सितंबर 1998 को अपने भाई मनोज डोंगरे के माध्यम से बेच दिया था। इसके बाद दोनों के खसरा नंबर भी अलग होकर 293/12/1 और 293/12/2 हो गए। बंटान में अलग-अलग तारीखें शिकायतकर्ता ने कथित बंटान में अलग-अलग तारीखें होने और दो स्थानों पर तारीख में सुधार किए जाने का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सुधार वाली जगह पर हस्ताक्षर नहीं हैं। दस्तावेज में बंटान जारी होने की तारीख 3 अप्रैल 2000 के साथ अक्स बंटान की तारीख 24 मार्च 2000 भी दर्ज है। शिकायतकर्ता के मुताबिक बंटान राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं होने और जमीन का एक हिस्सा पहले ही बिक जाने के बावजूद इसका इस्तेमाल राजस्व और BDA अधिकारियों के सामने किया गया। पुलिस ने शिकायत और दस्तावेजों की जांच के बाद रविंद्र डोंगरे के खिलाफ धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने व इस्तेमाल करने की धाराओं में केस दर्ज किया है। मामले में दस्तावेजों की जांच के साथ जमीन और राजस्व रिकॉर्ड से जुड़े तथ्यों की भी पड़ताल की जा रही है।
