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पुलिस समय पर आ जाती, तो नहीं बिछतीं चार लाशें:पीड़ित बोला– डायल 112 और चौकी को बताया था; एक ही चिता पर माता–पिता का अंतिम संस्कार

“रात में पुलिस समय पर आ जाती, तो मेरा परिवार नहीं उजड़ता। उसे उठाकर ले जाते। माता–पिता, बहन और बेटी की जान बच जाती। इसका दर्द कोई नहीं समझ सकता।” यह कहते हुए चैन सिंह फफक पड़ता है। उनके चेहरे पर पुलिस के प्रति गुस्सा भी है। अनूपपुर के अमोदा गांव में शनिवार सुबह युवक ने अपनी मां, नाना–नानी और बहन की लाठी–डंडे और पत्थर से बेरहमी से पीट–पीटकर हत्या कर दी थी। नाना की आंखें तक फोड़ दीं। तीन साल की बच्ची जिंदगी की जंग लड़ रही है। रविवार को एक ही घर से चार अर्थियां उठीं, तो पूरा गांव रो पड़ा। नाना–नानी का एक ही चिता पर अंतिम संस्कार किया गया। वहीं, पांच साल मासूम बच्ची और मां को दफना दिया गया। सरई पुलिस चौकी प्रभारी मंगला दुबे के मुताबिक आरोपी प्रेम सिंह (32) को सोमवार को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से जेल भेज दिया गया है। वारदात के बाद दैनिक भास्कर की टीम अमोदा गांव पहुंची। यहां घायल चैन सिंह, प्रत्यक्षदर्शी मासूम, सरपंच अमर सिंह से बात की। गांव में सन्नाटा, घरों में नहीं जला चूल्हा शहडोल जिला मुख्यालय से करीब 55 किलोमीटर दूर जंगल के बीच बसा अनूपुर जिले का अमोदा गांव। चारों तरफ पहाड़… घना जंगल… खेतों के बीच कुछ घर बने हैं। रविवार शाम यहां सन्नाटा पसरा है। इसी सन्नाटे को बीच-बीच में उठती सिसकियां तोड़ रही थीं। गांव में एक ही परिवार के चार लोगों की अर्थियां उठीं, तो समय जैसे थम गया। अंतिम यात्रा में शामिल ग्रामीणों की आंखें नम थीं। किसी घर में चूल्हा नहीं जला। लोग अपने घरों के बाहर बैठे घटना की चर्चा करते रहे। हर बातचीत आखिरकार एक ही सवाल पर रुक जाती। रात में पुजारी को पीटने के बाद लोगों ने डायल 112 और सरई पुलिस चौकी को सूचना दी थी। आश्वासन भी मिला, लेकिन टीम नहीं पहुंची। इधर, घर के कोने में बैठी छह साल की बच्ची सदमे में है। उसकी आंखों के सामने बार-बार वही दृश्य आ रहा है—दादी, दादा, बुआ और छोटी बहन पर हमला। हमलावर पीछे भी दौड़ा था। वह किसी तरह घर के पीछे से भागी और पिता तक पहुंची। समय पर इलाज मिल जाता, तो बच जाती बेटी अंतिम संस्कार के समय चैन सिंह नदी के घाट पर बेटी का शव देखकर रोने लगा। वह बार-बार यही कह रहा था—“समय पर इलाज मिल जाता, तो शायद बेटी को बचा लेता।” सुबह 7 बजे घटना हुई थी, लेकिन वाहन और एम्बुलेंस नहीं मिलने से 11 बजे यानी चार घंटे बाद मेडिकल अस्पताल पहुंच सके। वह कभी बेटी के शव की ओर देखता, तो कभी माता-पिता की चिता की तरफ। कुछ दूर परिवार की महिलाएं भी रो रही थीं। ग्रामीण उन्हें संभालने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन एक ही दिन में माता-पिता, बहन और बेटी को खो चुके चैन सिंह को सांत्वना देने किसी के पास शब्द नहीं थे। चैन सिंह की पत्नी का तीन साल पहले निधन हो चुका है। बुजुर्ग मां बेटियों की देखभाल कर रही थीं। वह मजदूरी और पशुओं की देखरेख करके परिवार चलाता था। वारदात के बाद परिवार के सामने दोहरा संकट है। एक तरफ चार सदस्यों की मौत का सदमा, दूसरा– घायल बेटी के इलाज और बाकी बच्चों की परवरिश की चिंता। सुबह से परेशान कर रहा था प्रेमसिंह चैन सिंह ने बताया कि शुक्रवार सुबह से प्रेम अपनी मां, नाना-नानी और मामा की बेटियों को परेशान कर रहा था। उसे कुछ समय के लिए घर में रस्सी से बांध दिया था। शाम को वह बंधन से मुक्त हुआ, तो घर से करीब 300 मीटर दूर मुख्य मार्ग पर बने शनि धाम पहुंच गया। पहाड़ और घने जंगल के बीच स्थित मंदिर के पास वन विभाग की सुरक्षा चौकी भी है। रात को पुजारी गंगा सिंह अलाव जलाकर बैठे थे। कुछ ग्रामीण भी आसपास मौजूद थे। गांव वालों से बातचीत के दौरान प्रेम उग्र हो गया। उसने पुजारी पर हमला कर दिया। मौजूद लोगों ने सरपंच अमर सिंह को सूचना दी। सरपंच पहुंचे तो भाग चुका था आरोपी सरपंच अमर सिंह अपने साथियों के साथ शनि धाम पहुंचे। उनके पहुंचने से पहले प्रेम भाग चुका था। सरपंच ने पुजारी के परिजन को जानकारी दी। इसके बाद ग्रामीणों ने आरोपी की तलाश शुरू की। पता चला कि प्रेम अपने नाना-नानी के घर पहुंच गया है। सरपंच और ग्रामीण चैन सिंह के घर पहुंचे। दूसरी घटना की आशंका को देखते हुए ग्रामीणों ने प्रेम को पकड़कर दोबारा रस्सी से बांध दिया। सरपंच ने पुलिस को सूचना देने का प्रयास किया। पहली बार नहीं लगा कॉल, दूसरी बार मिला आश्वासन सरपंच अमर सिंह ने बताया कि रात में डायल 112 पर कॉल किया। पहली बार फोन नहीं लगा। दोबारा प्रयास करने पर संपर्क हुआ। सरपंच का दावा है कि डायल 112 से जल्द टीम भेजने का आश्वासन मिला। सभी लोग पुलिस का इंतजार करते रहे। आधे घंटे से अधिक समय बाद भी जब पुलिस नहीं पहुंची, तो सरपंच ने सरई चौकी में फोन लगाया। कई बार डायल करने पर भी फोन नहीं उठा। बाद में संपर्क होने पर वहां मौजूद पुलिसकर्मी ने टीम भेजने की बात कही। बावजूद न डायल 112 का वाहन पहुंचा और न सरई पुलिस चौकी से पुलिसकर्मी आया। रात ज्यादा होने से प्रेम को बंधा छोड़कर सरपंच और ग्रामीण चले गए। सुबह मां ने खोल दिया, फिर बिछ गई लाशें शनिवार सुबह तक प्रेम रस्सी से बंधा था। उसकी मां अनुपिया बाई भी वहीं थीं। रातभर वह अपने बेटे को बंधा हुआ देखती रही। सुबह करीब 7 बजे चैन सिंह भैंसों को लेकर नदी की ओर चला गया। प्रेम ने अपनी मां से रस्सी खोलने के लिए कहा। अनुपिया का मन पसीज गया। उन्होंने रस्सी खोल दी। प्रत्यक्षदर्शी बच्ची के मुताबिक रस्सी से खुलने के बाद भैय्या गुस्से में था। उसने पहले दादी पर हमला किया, फिर दादा को मारा। बुआ बचाने आईं, तो उन पर भी हमला कर दिया। वह मेरी छोटी बहन को भी डंडे से पीट रहा था। भैय्या के हाथ में जो चीज आई, उसी से मारा। पत्थर, डंडे और कुल्हाड़ी से मारा। मैं घर के पीछे से भाग निकली। सरकारी वाहन में डीजल के लिए भी पैसे देने पड़े परिवार के सदस्य रामप्रसाद सिंह ने बताया कि तीन शवों का पोस्टमार्टम बेनीबारी में हुआ था। पीएम के बाद शव सरकारी वाहन से अमोदा लाए जा रहे थे। वाहन चालक ने रास्ते में गाड़ी रोक दी। ड्राइवर ने कहा कि गाड़ी में डीजल नहीं है। बिना डीजल के आगे नहीं जाएगा। परिवार और साथ मौजूद लोगों ने दो हजार रुपए एकत्र कर डीजल डलवाया। ग्रामीणों का कहना है कि अंतिम संस्कार के दौरान वरिष्ठ पुलिस या प्रशासनिक अधिकारी नहीं पहुंचा। यहां तक कि पंचायत सचिव या पटवारी तक मौजूद नहीं थे। तत्काल आर्थिक मदद भी नहीं मिली। अंतिम संस्कार के लिए समाज के लोगों ने चंदा जुटाया। इलाज कराने मायके आई थी अनुपिया परिवार के अनुसार आरोपी प्रेम सिंह उमरिया जिले के मरदरी गांव का रहने वाला है। पिता का पहले ही निधन हो चुका है। मां अनुपिया बाई की तबीयत खराब थी। करीब 10 दिन पहले वह इलाज कराने की बात कहकर मायके अमोदा आई थी। करीब एक सप्ताह पहले प्रेम भी नाना-नानी के घर पहुंच गया। परिवार के लोगों का कहना है कि यहां प्रेम का व्यवहार आक्रामक था। वह घर के लोगों से विवाद करता। रास्ते से गुजरने वाले ग्रामीणों से भी उलझता था। उसे कई बार घर में रोककर रखना पड़ता था। एक–दाे दिन में उसे वापस मरदरी भेजने की तैयारी की जा रही थी। अनूपपुर एसपी विक्रांत दुबे ने बताया कि सुबह हम मौके पर पहुंचे थे। सरपंच और ग्रामीणों से पूछा भी था कि इस संबंध में पुलिस में सूचना दी? उन्होंने नहीं में जवाब दिया था। सरपंच का कहना था कि घटना के बाद लोग पुजारी के इलाज और आरोपी की धड़पकड़ में लग गए थे। डायल 112 की लॉग बुक जांच करवा लेते हैं। अगर सूचना आई होगी, तो जरूर दर्ज होगी। एंबुलेंस के मामले में जांच करवा लेते हैं। पैसा लेकर डीजल भरवाने वाली घटना सामने आई, तो कार्रवाई की जाएगी। यह भी पढ़ें- युवक ने नाना-नानी, मां और बहन को मार डाला मध्य प्रदेश के अनूपपुर में शनिवार को एक युवक ने अपनी नानी, नाना, मां और मामा की बेटी की डंडे से पीट-पीटकर हत्या कर दी। हमले में नाना की आंखें भी फोड़ दी। परिवार के तीन लोग घायल हुए हैं, जबकि हमले में घायल पुजारी गंगाराम का भी इलाज चल रहा है। वारदात अमोदा गांव की है। पढ़ें पूरी खबर

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