चितौरा रोड स्थित मंथन नशा मुक्ति केंद्र में इलाज के नाम पर 17वीं बटालियन एसएएफ के आरक्षक अजय भदौरिया के साथ बेरहमी से मारपीट की गई। जिससे उसकी लिवर और तिल्ली (स्पलीन) फट गई और पेट में करीब 1.5 लीटर खून जमा हो गया। इसी कारण आरक्षक की मौत हुई है। मेडिकल कॉलेज के फॉरेंसिक विशेषज्ञों की क्वेरी रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आरक्षक के पेट पर भारी वस्तु से हमला किया गया है। रिपोर्ट आने के सवा साल बाद पुलिस ने गुरुवार को नशामुक्ति केंद्र के संचालक मनीष दुबे, अजय पांडे, सुपरवाइजर मोहित राणा और अन्य के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का केस दर्ज किया है। इसकी भनक लगते ही आरोपी फरार हो गए हैं। पुलिस उनकी तलाश कर रही है। भर्ती के अगले दिन परिजन को आया मौत का फोन भिंड के भारौली रोड निवासी देवदत्त भदौरिया ने पुलिस को बताया कि उनके भतीजे अजय भदौरिया 17वीं बटालियन एसएएफ में आरक्षक थे और रायसेन में पदस्थ थे। छुट्टियों में घर आने के बाद 23 जुलाई 2025 को दोपहर करीब 3 बजे उन्हें चितौरा रोड स्थित मंथन नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती कराया गया था। अगले दिन 24 जुलाई को सुबह करीब 10:30 बजे परिजनों को फोन कर अजय की तबीयत बिगड़ने की सूचना दी गई। उन्हें मुरार अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने शव पर हाथ-पैर समेत शरीर के कई हिस्सों पर चोट के निशान देखे। पीएम रिपोर्ट के बाद फॉरेंसिक विशेषज्ञों से कराई जांच मामला संदिग्ध लगने पर पुलिस ने मर्ग कायम कर पोस्टमार्टम कराया। जांच के दौरान नशा मुक्ति केंद्र की सीसीटीवी डीवीआर जब्त की गई। केंद्र में भर्ती अन्य मरीजों और कर्मचारियों के बयान भी लिए गए। इसके बाद पीएम रिपोर्ट और इलाज से जुड़े दस्तावेजों की गजराराजा मेडिकल कॉलेज के फोरेंसिक विशेषज्ञों से क्वेरी कराई गई। रिपोर्ट में बताया गया कि 23 जुलाई दोपहर 3 बजे से 24 जुलाई दोपहर 12:22 बजे के बीच अजय के साथ मारपीट हुई थी। इन पर हुआ मामला दर्ज पेट पर हमले से फटीं लिवर और तिल्ली फोरेंसिक रिपोर्ट के मुताबिक अजय के पेट पर भारी वस्तु से किए गए हमलों के कारण लिवर और तिल्ली फट गई थी। पेट में करीब 1.5 लीटर खून जमा हुआ था। विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने मारपीट को मौत का प्रमुख कारण माना है। गंभीर चोटों के बावजूद इलाज नहीं कराया पुलिस के मुताबिक जांच में यह भी सामने आया कि केंद्र के संचालकों और कर्मचारियों को अजय की गंभीर हालत की जानकारी थी। इसके बावजूद समय पर उचित इलाज नहीं कराया गया। पुलिस का आरोप है कि चोटों के बाद भी उसे केंद्र में ही रखा गया, जिससे उसकी हालत बिगड़ती गई और उसकी मौत हो गई। जांच में सीसीटीवी और बयानों को बनाया आधार पुलिस ने केंद्र की सीसीटीवी डीवीआर, पीएम रिपोर्ट, फोरेंसिक क्वेरी और कर्मचारियों व भर्ती मरीजों के बयानों को जांच का आधार बनाया है। इन्हीं तथ्यों के आधार पर संचालकों और कर्मचारियों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का केस दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है एसडीओपी मनीष यादव का कहना है कि नशा मुक्ति केन्द्र में एक मरीज की मौत हुई थी। जिसमें जांच के बाद यह मामला दर्ज किया गया है। पहले भी हुई हैं ऐसी घटनाएं ग्वालियर में 12-13 अगस्त 2025 को पंजाब नेशनल बैंक के फील्ड ऑफिसर की मिनी गोल्डन संस्कार नशा मुक्ति केंद्र में संदिग्ध हालात में मौत हुई थी। तब भी परिजनों ने पंकज को नशा मुक्ति केंद्र में प्रताड़ना करने का आरोप लगाया था। उसके शरीर पर चोट के निशान थे। परिजनों ने बताया था कि एक दिन पहले वह पूरी तरह स्वस्थ्य था, लेकिन मंगलवार रात (12 अगस्त) को केंद्र वाले उसे बड़ागांव खुरैरी के पास से पकड़कर वापस ले गए थे। रात भर हाथ-पैर बांधकर पीटा गया, जिससे उसकी मौत हो गई है। नशा मुक्ति केंद्र की ओर से बुधवार (13 अगस्त) सुबह 5 बजे परिजन को सूचना दी गई कि उनके बेटे पंकज की तबीयत अचानक बिगड़ गई है। परिजन जब ट्रॉमा सेंटर पहुंचे तो वहां स्ट्रेचर पर पंकज की लाश पड़ी थी। घटना के बाद से ही नशा मुक्ति केंद्र के संचालक फरार हैं। परिजन हत्या का मामला दर्ज करने की मांग कर रहे हैं।
