Homeदेशभागवत बोले- धर्म संकट में आया तो देश खामियाजा भुगतेगा:धर्म और राष्ट्र...

भागवत बोले- धर्म संकट में आया तो देश खामियाजा भुगतेगा:धर्म और राष्ट्र अलग-अलग नहीं, दोनों एक-दूसरे पर निर्भर

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को कहा कि भारत में धर्म और राष्ट्र अलग नहीं हैं। राष्ट्र का उद्देश्य धर्म है और धर्म राष्ट्र को बनाए रखने में मदद करता है। धर्म संकट में आया तो देश खामियाजा भुगतेगा। मोहन भागवत ने कहा, हमारा राष्ट्र और धर्म अलग नहीं हैं। राष्ट्र का उद्देश्य धर्म है और धर्म राष्ट्र को बनाए रखता है। दोनों एक-दूसरे पर निर्भर हैं। अगर एक मौजूद है, तो दूसरा भी मौजूद है। अगर एक नहीं है, तो दूसरा भी नहीं है। भागवत ने मुंबई में ऑल इंडिया विहार सेवा ग्रुप के 14वें सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि दुनिया विकास और पर्यावरण सुरक्षा, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और पारिवारिक जीवन के बीच संतुलन खोज रही है। भागवत की स्पीच, 4 बड़ी बातें… 1. भारत से ही हर समस्या का समाधान: भारत ने दूसरे देशों पर कब्जा करने या लोगों का धर्म बदलने की कोशिश किए बिना अपना ज्ञान दुनिया से साझा किया। दुनिया जानती है कि रास्ता भारत से निकलेगा। 2. भारत के पास विशाल ज्ञान परंपरा: भारत के पास वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत और गीता जैसी विशाल ज्ञान परंपरा है। इसमें जैन आगम, त्रिपिटक, गुरु ग्रंथ साहिब और संतों की शिक्षाएं भी शामिल हैं। 3. भक्ति की शक्ति से ईश्वर के करीब पहुंच सकते: हमारे देश के पास ज्ञान का बहुत बड़ा खजाना है, जिसकी आज दुनिया को जरूरत है। भक्ति की शक्ति से ईश्वर के करीब पहुंचा जा सकता है। 4. मानव जाति के भविष्य की रक्षा करना जरूरी: इस ज्ञान को आगे बढ़ाने वाले लोगों के जीवन और परंपराओं को बचाना सिर्फ धार्मिक जिम्मेदारी नहीं है। यह मानवता की सेवा भी है आप सिर्फ एक जीवन की रक्षा नहीं कर रहे हैं। आप पूरी मानव जाति के सुरक्षित भविष्य की रक्षा कर रहे हैं। —————————- ये खबर भी पढ़ें… RSS प्रमुख बोले- हिंदू सोच में अपनापन सबसे ऊपर: लोग अपनी कर्मभूमि के प्रति ईमानदार रहें RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि लोग अपनी ‘कर्मभूमि’ के प्रति ईमानदार रहें और खुद को मजबूत करें, ताकि वे कर्मभूमि के साथ मानवता की सेवा भी कर सकें। पूरी खबर पढ़ें…

Stay Connected
16,985FansLike
2,458FollowersFollow
61,453SubscribersSubscribe
Must Read
Related News

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here