ग्वालियर केंद्र सरकार और बैंकों द्वारा डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क या मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाए जाने की सुगबुगाहट के बीच ग्वालियर के व्यापारी वर्ग में भारी आक्रोश पनप रहा है। डिजिटल लेनदेन पर संभावित वित्तीय बोझ और ग्राहकों पर पड़ने वाले असर के खिलाफ स्थानीय व्यापारिक संगठनों ने आज यानी बुधवार को एक अनोखे और शांतिपूर्ण ‘डिजिटल सत्याग्रह’ का ऐलान किया है। इस आंदोलन के तहत शहर के हजारों दुकानदार अपनी दुकानों और काउंटरों पर रखे UPI क्यूआर (QR) कोड स्कैनरों पर काला कपड़ा बांधकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे। कैशलेस इंडिया पर चोट: ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा सीधा असर व्यापारियों का स्पष्ट कहना है कि डिजिटल इंडिया मुहिम की सफलता की सबसे बड़ी वजह इसका आम जनता के लिए सुलभ और मुफ्त होना है। ग्वालियर के छोटे और मध्यम वर्ग के ग्राहक अपनी रोजमर्रा की खरीदारी के लिए सबसे ज्यादा UPI भुगतान का ही सहारा लेते हैं। यदि डिजिटल प्लेटफॉर्म या बैंक इन भुगतानों पर किसी भी प्रकार का चार्ज या MDR वसूलते हैं, तो इसका सीधा असर आम ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा। व्यापारियों का मानना है कि अतिरिक्त शुल्क लगने से व्यापार तो प्रभावित होगा ही, साथ ही सरकार का कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा देने का मकसद भी पूरी तरह नाकाम हो जाएगा। सत्याग्रह का तरीका सांकेतिक: सेवाएं रहेंगी चालू व्यापारिक प्रतिनिधियों ने साफ किया है कि स्कैनर पर काला कपड़ा ढंकने का मकसद UPI सेवाओं को बंद करना या ग्राहकों को परेशान करना बिल्कुल नहीं है। यह केवल बैंकों और प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए एक सांकेतिक विरोध है। इसके माध्यम से यह संदेश दिया जा रहा है कि यदि डिजिटल भुगतान महंगा किया गया, तो आम नागरिक एक बार फिर मजबूरी में नकद लेनदेन (कैश) की तरफ लौटने लगेंगे, जो देश की अर्थव्यवस्था और डिजिटल क्रांति दोनों के लिए नुकसानदायक होगा। सभी प्रमुख बाजारों में दिखा एकजुटता का असर इस डिजिटल सत्याग्रह को ग्वालियर के लगभग सभी प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों का व्यापक समर्थन मिल रहा है। शहर के महाराज बाड़ा, बाड़ा मार्केट, मोर बाजार, टांगा स्टैंड और कंपू क्षेत्र के व्यापारी संघों ने इस आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने का निर्णय लिया है। मिठाई व्यापारी सुरेंद्र अग्रवाल ने बताया कि व्यापारियों को तो परेशानी है चाहे वह माल बेजे या माल खरीद हैं। उनपर जो दो से ढाई परसेंट लग रहा है, वह तो उनको देना ही है तो यह तो अनुचित है व्यापारियों के हित में नहीं है, नाही व्यापार के हित में है। व्यापारी ने कहा कि यह तो सरकार को हटाना ही होगा। इसलिए हम कल कोई कार्य नहीं करेंगे ना तो यूपीआई से पेमेंट लेंगे और ना ही देंगे। इस मामले में चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष प्रवीण अग्रवाल का कहना था कि (MDR) चार्ज को लेकर हमारी गत दिवस कार्यकारिणी की बैठक हुई उसके अंदर सभी व्यापारीयों में एक असंतोष था नाराजगी थी, कार्यकारिणी समिति ने तय किया है 23 सितंबर को हम नो यूपीआई डे मनाएंगे। इस दिन ना तो हम यूपीआई से पेमेंट लेंगे ओर न यूपीआई से पेमेंट देंगे, जो कर कोड है उसे काले कपड़े से ढककर सोशल मीडिया के माध्यम से अपना विरोध दर्ज कराएंगे। जिस तरह से यूपीआई का पेमेंट पूर्व में चल रहा था उसे वैसा ही रखा जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि तमाम परेशानियां पहले से ही है और साइबर फ्रॉड की संभावनाएं भी बनी रहती हैं, उसके साथ ही अगर कोई अकाउंट से पैसा आ जाए और वो पैसा किसी फ्रॉड का होगा तो अकाउंट सील हो जाता है उसका भी व्यापारी सामना करते हैं। इसलिए हम चाहते हैं कि सरकार को यह निर्णय वापस देना चाहिए।
