“हम अतिथि विद्वान हैं… बस कुछ दिन के मेहमान हैं। लाखों डॉक्टर, इंजीनियर हमने बनाए… आज हम ही फटे हाल में हैं।” गिटार की धुन पर अतिथि शिक्षकों का यह गाना रविवार को भोपाल के नीलम पार्क में गूंज रहा है। नियमितीकरण और फॉलन आउट प्रक्रिया बंद करने की मांग को लेकर पिछले 5 दिनों से धरने पर बैठे अतिथि शिक्षक अब गाने के जरिए अपनी मांग और नौकरी की अनिश्चितता बता रहे हैं। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार के बंगले के बाहर से पुलिस द्वारा हटाए जाने के बाद अतिथि शिक्षक नीलम पार्क में धरने पर बैठे हैं। रविवार दोपहर बाद करीब पौने तीन बजे उच्च शिक्षा आयुक्त प्रबल सिपाहा भी धरना स्थल पर पहुंचे और अतिथि शिक्षकों से मुलाकात की। शिक्षक फॉलन आउट प्रक्रिया रोकने की मांग पर अड़े हैं। पहले मंत्री के बंगले के बाहर दिया धरना इससे पहले मंगलवार को सैकड़ों अतिथि शिक्षक उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार के बंगले के बाहर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए थे। वे नियमितीकरण और स्थायित्व के लिए नीति बनाने की समय-सीमा तय करने और फॉलन आउट प्रक्रिया बंद करने की मांग कर रहे थे। मंत्री इंदर सिंह परमार ने अतिथि शिक्षकों के 4 प्रतिनिधियों को चर्चा के लिए बुलाया था। बातचीत बेनतीजा रही। मंत्री ने फॉलन आउट की प्रक्रिया बंद करने से इनकार कर दिया। इसके बाद पुलिस ने बंगले के बाहर डटे अतिथि शिक्षकों को हटाकर नीलम पार्क भेज दिया। शिवराज का काफिला रोककर याद दिलाया था आश्वासन बुधवार सुबह करीब 200 अतिथि शिक्षकों ने वहां से गुजर रहे केंद्रीय कृषि मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का काफिला रोक लिया था। महिलाओं और शिक्षकों ने शिवराज को 11 सितंबर 2023 की महापंचायत का आश्वासन याद दिलाया था। इसमें उन्होंने फॉलन आउट न होने देने की बात कही थी। अतिथि शिक्षकों ने कहा था, “सर, सरकार तो आपकी ही है। कल 12 बजे से महिलाएं यहां बैठी हैं, रातभर खुले में पड़े रहे। मंत्री जी अंदर ही हैं, लेकिन पानी तक नहीं दिया जा रहा।” इस पर शिवराज सिंह चौहान ने कहा था, “एक मुख्यमंत्री की घोषणा दूसरे मुख्यमंत्री को पूरी करनी चाहिए। मैं आपकी बात (सीएम तक) पहुंचाऊंगा, प्रयत्न करता हूं।” बातचीत के दौरान कुछ लोग मोबाइल से वीडियो बनाने लगे तो शिवराज ने वीडियो बनाने से मना कर दिया। दो प्रमुख मांगों पर अड़े अतिथि शिक्षकों की मुख्य मांगें हैं— अतिथि शिक्षकों का कहना है कि 10 जुलाई 2026 को रविंद्र भवन सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उच्च शिक्षा मंत्री ने हरियाणा मॉडल से बेहतर नीति बनाने का आश्वासन दिया था। 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन पर उज्जैन पहुंची अतिथि शिक्षकों की बहनों ने सीएम को राखी भी बांधी थी। उस दौरान भी प्रक्रिया रोकने की बात कही गई थी। अतिथि शिक्षकों के मुताबिक अब तक कोई ठोस नीति नहीं बनी है। क्या है फॉलन आउट प्रक्रिया सरकारी कॉलेजों में नियमित प्राध्यापकों की नियुक्ति या स्थानांतरण होने पर वहां पहले से पढ़ा रहे अतिथि शिक्षकों की सेवा समाप्त हो जाती है। इसी प्रक्रिया को फॉलन आउट कहा जाता है। वर्षों से सेवा दे रहे अतिथि शिक्षक इसी व्यवस्था के विरोध में धरने पर हैं।
