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4KM तक गूंजती है दहाड़…एक झटके में तोड़ती है गर्दन:बिहार की खूंखार बाघिन बंगाल क्यों जा रही, नए जंगल में कैसे रहेगी

बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से रॉयल बंगाल टाइगर को पश्चिम बंगाल के बक्सा भेजने की तैयारी पूरी हो चुकी है। सब ठीक रहा तो 2 अक्टूबर को बाघिन शिफ्ट हो जाएगी। बिहार से बाघिन बंगाल क्यों जा रही, वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से ही क्यों, इसकी खासियतें, जानेंगे; बूझे की नाही में…। सवाल-1ः बिहार से टाइगर को पश्चिम बंगाल क्यों भेजा जा रहा? जवाबः पश्चिम बंगाल के उत्तरी हिस्से में स्थित बक्सा टाइगर रिजर्व में लंबे समय से स्थायी बाघों की संख्या लगभग न के बराबर है। यही कारण है कि केंद्र सरकार 13वें बाघ पुनर्वास कार्यक्रम के तहत बक्सा में बाघों का पुनर्वास कर उनकी आबादी बढ़ाना चाहती है। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) के एक्सपर्ट्स का मानना है कि बक्सा के आसपास सर्दियों के दौरान भूटान और असम के मानस राष्ट्रीय उद्यान से मेल (नर) बाघ आते-जाते हैं। यहां फीमेल यानी मादा बाघ को लाकर बसाने से मेल बाघ आकर्षित होंगे, जिससे उनकी संख्या बढ़ेगी। सवाल-2ः बाघिन के लिए वाल्मीकि टाइगर रिजर्व को ही क्यों चुना गया? जवाबः इसके पीछे 2 मुख्य वजहें हैं… 1- सेम इकोसिस्टम बक्सा टाइगर रिजर्व और वाल्मीकि टाइगर रिजर्व का इकोसिस्टम यानी परिस्थिति एक जैसी है। बंगाल के बाघ हाथी और गैंडा जैसे बड़े शाकाहारी जानवरों के साथ रहते हैं। हिरण, नील गाय, भैंस और सुअर जैसे जानवरों का शिकार करते हैं। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के बाघ भी इन्हीं जानवरों का शिकार करते हैं। यहां हाथी और गैंडा कम हैं, लेकिन बाघ इन्हें देखने के आदी हैं। ह्यूमन वाइल्डलाइफ कनफ्लिक्ट एक्सपर्ट अभिषेक बताते हैं, ‘वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के बाघ के लिए बक्सा टाइगर रिजर्व में रहना मुश्किल नहीं होगा। दोनों वन क्षेत्र हिमालय के तराई क्षेत्र में आते हैं। दोनों जगह एक ही प्रजाति बंगाल टाइगर के बाघ हैं। इसलिए कोई दिक्कत नहीं होगी।’ 2- VTR में बाघों की बढ़ती संख्या, घटता एरिया बाघ टेरिटोरियल जानवर हैं। मतलब वे अपना इलाका बनाकर रहते हैं। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व 899.38 वर्ग किलोमीटर में फैला है। इसमें बाघों के लिए महत्वपूर्ण आवास 598.45 वर्ग किलोमीटर और बफर एरिया 300.93 वर्ग किलोमीटर में है। फिलहाल VTR में 65 से ज्यादा बाघ हैं। NCTA और WWI के मुताबिक, एक मेल बाघ को रहने के लिए कम से कम 60 वर्ग किलोमीटर और फीमेल बाघ के लिए कम से कम 20 वर्ग किलोमीटर जगह चाहिए। अगर मेल-फीमेल टाइगर एक साथ रहे तो उन्हें कम से कम 60 वर्ग किलोमीटर जगह चाहिए। इस हिसाब से देखें तो VTR में अभी एक बाघ का जोड़ा सिर्फ 18 वर्ग किलोमीटर में है। ऐसे में यहां से बाघ को ट्रांसफर करना जरूरी है। सवाल-3ः बंगाल जा रही बाघिन की खासियत क्या है? जवाबः VTR में बंगाल टाइगर (पैंथेरा टाइग्रिस टाइग्रिस) रहते हैं। यह आकार में दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी बाघ प्रजाति है। इससे बड़ा सिर्फ रूस के साइबेरिया में पाया जाने वाला बाघ ही है। नेशनल ज्योग्रॉफिक, NCTA और WWI के मुताबिक जानिए इनकी खासियतें… व्यवहार और आदतें सवाल-4ः …तो क्या बंगाल में तेजी से आबादी बढ़ा पाएगी बाघिन? जवाबः बिल्कुल। वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट समीर सिन्हा ने बताया, ‘बंगाल और बिहार के बाघों के जेनेटिक्स में बहुत अधिक समानता है। इसलिए बंगाल जाकर बिहार के बाघों को आबादी बढ़ाने में परेशानी नहीं होगी।’ समीर सिन्हा बताते हैं, ‘दूसरी जगह भेजने के लिए युवा बाघों को चुना जाता है, जो नए क्षेत्र के अनुसार खुद को ढाल सके और ज्यादा संतान पैदा कर सकें। बाघिन 3 से 4 साल में मैच्योर हो जाती है। ये करीब 3 महीने में 2 से 6 बच्चों को जन्म देती हैं। बच्चे 18-24 महीने तक मां के साथ रहते हैं। इस दौरान मां उन्हें जंगल में जीना और शिकार करना सिखाती है।’ सिन्हा बताते हैं, ‘बच्चे के जन्म के करीब 2 साल बाद बाघिन अलग होकर अपना खुद का इलाका बनाती है। मेल बच्चा मां से अधिक दूर जाता है। वहीं, फीमेल बच्ची कम दूरी तक जाती है। बच्चों के अलग होने के बाद बाघिन फिर से गर्भवती होने के लिए तैयार हो जाती है। अगर बच्चों की मौत हो जाए तो फीमेल बीच में ही गर्भधारण कर सकती है।’

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