मध्य प्रदेश क्राइम फाइल्स में आज बात भोपाल के उस चर्चित केस की, जिसने पुलिस की जांच से लेकर CBI की पड़ताल तक कई सवाल खड़े कर दिए थे। भोपाल के बड़े टूरिस्ट प्लेस में दिनदहाड़े 13 साल की बच्ची नित्या लापता हो गई। परिवार और पुलिस रातभर उसे तलाशते हैं। उसी रात उसकी लाश टेकरी से करीब 100 फीट नीचे मिलती है। पोस्टमॉर्टम में सिर पर गंभीर चोट के साथ यौन हिंसा के साक्ष्य मिलते हैं। पुलिस की जांच एक युवक और उसके साथी तक पहुंचती है। दोनों जेल भेज दिए जाते हैं। DNA रिपोर्ट भी आती है। आखिर क्या थी कहानी? पढ़िए पूरी रिपोर्ट… 30 अप्रैल 2019: सनसेट देखने निकली बच्ची अचानक गायब भोपाल की मनुआभान टेकरी। शाम का वक्त था। पूनम (बदला हुआ नाम) ने अपनी भतीजी नित्या (बदला हुआ नाम) से कहा- चलो, मनुआभान टेकरी चलते हैं। सनसेट देखते हैं। आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली 13 साल की नित्या अपनी बुआ के साथ घूमने के लिए तैयार हो गई। मनुआभान टेकरी भोपाल के लालघाटी इलाके के पास ऊंची पहाड़ी पर है। यहां से भोपाल शहर और बड़े तालाब का खूबसूरत नजारा दिखाई देता है। पहाड़ी की चोटी पर मंदिर, पेड़-पौधे और खुला माहौल लोगों को आकर्षित करता है। सूर्यास्त और पास के राजा भोज एयरपोर्ट से उड़ते विमान देखना भी यहां आने वाले लोगों के लिए खास आकर्षण होता है। उस शाम नित्या भी इन्हीं नजारों के बीच थी। कुछ देर बाद अचानक वह दिखाई देना बंद हो गई। बुआ को लगा कि वह शायद आसपास ही कहीं गई होगी। तलाश शुरू हुई। टेकरी पर इधर-उधर देखा गया। रात 8 बजे पुलिस पहुंची, लेकिन बच्ची का कोई सुराग नहीं रात करीब 8 बजे कोहेफिजा थाने में नित्या के लापता होने की शिकायत पहुंची। पुलिस मौके पर पहुंची। परिवार के लोग भी टेकरी पर पहुंच गए। आसपास का इलाका खंगाला जाने लगा। संभावित रास्तों और टेकरी के आसपास सर्चिंग शुरू हुई। रातभर तलाशी चलती रही। लेकिन नित्या नहीं मिली। पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल था- आखिर बच्ची गई कहां? तभी जांच में एक अहम बात सामने आई।नित्या अकेली टेकरी पर नहीं आई थी। उसके साथ उसकी बुआ और बुआ का दोस्त अविनाश साहू भी था। अब पुलिस ने उस युवक की मौजूदगी और उसकी गतिविधियों को भी जांच के दायरे में लिया। CCTV फुटेज ने बदली जांच की दिशा पुलिस ने टेकरी और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की। फुटेज में शाम करीब 4 बजे एक स्कूटी पर नित्या, उसकी बुआ और अविनाश टेकरी की तरफ जाते दिखाई दिए। लेकिन इसके बाद की फुटेज ने पुलिस के सामने नया सवाल खड़ा कर दिया। शाम करीब 6:30 बजे के बाद स्कूटी से नित्या की बुआ और अविनाश वापस आते दिखाई दिए। नित्या उनके साथ नहीं थी। यानी बच्ची उनके साथ टेकरी पर गई थी, लेकिन लौटते समय उनके साथ नहीं थी। पुलिस ने अविनाश से पूछताछ की। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ के दौरान उसके बयान बार-बार बदल रहे थे। अब पुलिस को शक होने लगा था कि बच्ची के लापता होने के पीछे सिर्फ रास्ता भटकने की बात नहीं है। 100 फीट नीचे मिली बच्ची की लाश तलाश के दौरान पुलिस को टेकरी के एक हिस्से में झाड़ियों के बीच करीब 100 फीट नीचे गहरी खाईनुमा जगह के बारे में पता चला। टीम उस तरफ पहुंची। नीचे देखा गया तो कुछ दिखाई दिया। पुलिसकर्मी नीचे उतरे। वहां नित्या का खून से लथपथ शव पड़ा था, सिर बुरी तरह कुचला हुआ था। जिस बच्ची को परिवार रातभर टेकरी और आसपास तलाशता रहा, वह उसी जगह से करीब 100 फीट नीचे पड़ी थी। अब तक पुलिस इसे हादसा मानकर चल सकती थी कि बच्ची किसी तरह नीचे गिर गई होगी। लेकिन शव की हालत और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने जांच को अलग एंगल दे दिया। पोस्टमार्टम ने हादसे की कहानी पर सवाल खड़े किए पोस्टमार्टम रिपोर्ट में नित्या के सिर पर गंभीर चोट के निशान मिले। मौत सिर में लगी चोट से हुए शॉक और हेमरेज के कारण हुई थी।
लेकिन मेडिकल जांच में एक और अहम बात सामने आई। नित्या के शरीर में यौन हिंसा के साक्ष्य मिले। अब पुलिस के सामने मामला सिर्फ एक बच्ची के पहाड़ी से गिरने का नहीं था। टेकरी पर पहुंचे दूसरे युवक तक पहुंची पुलिस जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि नित्या के साथ उसकी बुआ और अविनाश साहू तो थे ही, अविनाश का दोस्त जस्टिन राज भी वहां पहुंचा था। अब पुलिस की जांच इन दोनों युवकों तक पहुंच चुकी थी। दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की गई। पुलिस ने अविनाश साहू और जस्टिन राज पर नित्या के साथ दुष्कर्म करने और पहचान छिपाने के लिए उसकी हत्या करने का आरोप लगाया। पुलिस की थ्योरी के मुताबिक, वारदात के बाद शव को करीब 100 फीट गहरी खाईनुमा जगह में फेंक दिया गया था। घटनास्थल से वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए गए। बच्ची के शरीर से सैंपल लिए गए। दोनों आरोपियों के भी सैंपल लिए गए। DNA रिपोर्ट आई, लेकिन परिवार के सवाल खत्म नहीं हुए DNA रिपोर्ट आने में लंबा समय लगा। करीब एक साल बाद रिपोर्ट कोर्ट में पेश हुई। एक आरोपी का DNA पॉजिटिव बताया गया, जबकि दूसरे आरोपी से जुड़े DNA को लेकर सवाल उठे। यहीं से बच्ची के पिता का पुलिस की जांच पर भरोसा कमजोर होने लगा। उन्होंने DNA रिपोर्ट पर ही सवाल उठाए। उनका आरोप था कि जांच की शुरुआत से ही लापरवाही हुई और इसी वजह से एक आरोपी की रिपोर्ट निगेटिव आई। मामले की जांच कर रहे थाना प्रभारी को भी पहले ही हटा दिया गया था। अब परिवार पुलिस की जांच से संतुष्ट नहीं था। उन्होंने मामले की जांच CBI से कराने की मांग की। मामला CBI तक पहुंचा, जांच फिर से शुरू हुई परिवार की मांग के बाद मध्यप्रदेश सरकार ने मामले की जांच CBI को सौंपने का फैसला किया। अब वही केस एक नई जांच एजेंसी के सामने था। पुलिस जिस कहानी के आधार पर आरोपियों तक पहुंची थी, CBI को उसी कहानी की हर कड़ी को दोबारा परखना था। CBI की जांच में पुलिस की थ्योरी पर ही सवाल पुलिस की जांच में जिन दो युवकों को आरोपी बनाया गया था, CBI की जांच के बाद तस्वीर बदल गई। CBI ने दोनों आरोपियों को क्लीनचिट दे दी। यानी जिन दो युवकों को पुलिस ने नित्या के दुष्कर्म और हत्या का आरोपी बनाकर जेल भेजा था, CBI की जांच में उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले। अब तक कहानी में जो पुलिस के आरोपी थे. CBI की जांच के बाद वे आरोपी नहीं रहे। अब सीबीआई को इन सवालों की गुत्थी सुलझानी थी- नित्या की हत्या किसने की?
उसके साथ किसने रेप किया?
अविनाश और जस्टिन दोषी नहीं तो कौन था?
या फिर पुलिस की जांच ही सही थी?
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