जीवन यापन के लिए मिली सरकारी पट्टा की जमीन को प्रशासनिक सांठगांठ से बेचकर करोड़ों का खेल खेला गया। श्योपुर में राजस्व तंत्र की ऐसी ही बड़ी धांधली उजागर हुई है। कलेक्टोरेट के पास और हाईवे से लगी जिन 4 बेशकीमती जमीनों की बिक्री अनुमति कलेक्टर शीला दाहिमा ने खारिज कर दी थी, चंबल कमिश्नर कोर्ट से उन्हें महज 36 दिन में मंजूरी मिल गई। आदेश आते ही जिले में मूल फाइल पहुंचने से पहले ही 12 दिन के भीतर जमीनों की रजिस्ट्री भी करा ली गई। भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि कागजों में जिन्हें ‘असिंचित और कमजोर पैदावार’ वाली जमीन बताकर बेचने की मजबूरी दर्शाई गई थी, मौके पर वहां लहलहाती धान की फसल खड़ी है। 4 करोड़ रु से अधिक बाजार मूल्य की इन जमीनों का सौदा कागजों में कौड़ियों के दाम निपटा दिया गया। कागजी दलील बनाम मौके का सच वे चार मामले, जिनमें पलटे गए कलेक्टर के आदेश बगवाज (रकबा 0.728 हेक्टेयर)
कलेक्टर: मूल भूदान पट्टा और जरूरत के प्रमाण न होने पर 26 मार्च 2026 को आवेदन निरस्त किया।
कमिश्नर: पुरानी जांच रिपोर्टों के आधार पर हक सही माना और बिक्री की अनुमति दे दी। चोंडपुर (रकबा 0.418 हेक्टेयर) चोंडपुर का खेत, जिसमें धान की फसल खड़ी है। बेचने के लिए इसे असंचित बताया था। कलेक्टर: सक्षम अधिकारी की प्रमाणित पट्टा प्रति न होने पर 25 जून 2026 को आवेदन खारिज किया।
कमिश्नर: 2004 के व्यवस्थापन आदेश को पर्याप्त मानकर बिक्री की अनुमति दी। सोईकलां (रकबा 0.721 हेक्टेयर)
कलेक्टर: आय और खर्च के हिसाब से बिक्री की जरूरत न दिखने पर 04 जून 2026 को आवेदन निरस्त किया।
कमिश्नर: पुराने रिकॉर्ड और लंबे कब्जे को आधार बनाकर अनुमति दी। प्रेमपुरा (रकबा 0.826 हेक्टेयर)
कलेक्टर: मूल दस्तावेज और कर्ज के प्रमाण न होने पर 25 जून 2026 को आवेदन निरस्त किया।
कमिश्नर: अपील में जमा किए गए नए शपथ-पत्रों और कर्ज के कागजात को आधार मानकर अनुमति दी। प्रशासनिक अनदेखी प्रेमपुरा और चोड़पुर की जमीन बेचने के लिए मुर्तजा नामक एक ही व्यक्ति ने दो आवेदन किए। तहसीलदार ने 11 जून 2025 को दोनों मामलों की अनुशंसा की, जिसे एसडीएम ने 17 जून को मंजूरी दे दी। हालांकि, कलेक्टर ने 25 जून 2026 को दोनों आवेदन निरस्त कर दिए। कमिश्नर कार्यालय से 31 जुलाई को आदेश हुआ और 12 को रजिस्ट्री हो गई। यह मामला वरिष्ठ न्यायालय का है। उन्होंने अपने क्षेत्राधिकार का उपयोग कर आदेश दिए हैं, इसलिए मैं इस पर टिप्पणी नहीं कर सकती। – शीला दाहिमा, कलेक्टर, श्योपुर मैं अभी बाहर हूं। सात सितंबर तक अवकाश पर हूं। -सुरेश कुमार, कमिश्नर, चंबल संभाग
