मध्य प्रदेश में 500 वर्गमीटर (करीब 5,382 वर्गफीट) तक के प्लॉट पर मकान बनाने की अनुमति अब स्थानीय निकाय के स्तर पर ही मिल सकेगी। इसके लिए TCP से अलग डेवलपमेंट परमिशन लेने की जरूरत नहीं होगी। स्वीकृत लैंड यूज वाले प्लॉट का नक्शा नगर निगम, नगर पालिका या नगर परिषद 30 दिन में मंजूर कर सकेगा। पहले इस प्रक्रिया में तीन से चार महीने लगते थे। मंडे स्टोरी में जानिए नियमों में बदलाव से आम लोगों को क्या फायदा होगा… नियमों में 5 बड़े बदलाव उदाहरण से समझें: नए नियम से कैसे बदलेगी प्रक्रिया? केस 1: 1,000 वर्गफीट (करीब 93 वर्गमीटर) का प्लॉट पहले: नगर निगम में आवेदन के बाद डेवलपमेंट परमिशन और लेआउट अप्रूवल के लिए TCP जाना पड़ता था। फाइल महीनों अटकी रहती थी। अब: यदि प्लॉट का लैंड यूज पहले से आवासीय है, तो सीधे नगर निगम में आवेदन किया जा सकेगा। नक्शा 30 दिन में मंजूर किया जा सकेगा। केस 2: 3,000 वर्गफीट (279 वर्गमीटर) या 5,000 वर्गफीट (465 वर्गमीटर) का प्लॉट पहले: पुराना मकान तोड़कर नया या बहुमंजिला मकान बनाने के लिए TCP से साइट क्लियरेंस और लेआउट मंजूर कराना पड़ता था। अब: दोनों प्लॉट 500 वर्गमीटर की सीमा में हैं। यदि निर्माण मास्टर प्लान के मानकों के अनुरूप है, तो स्थानीय निकाय से अनुमति ली जा सकेगी। इंदौर में 3 साल से अटकी भवन अनुमतियों की प्रक्रिया फिर शुरू होने की उम्मीद मंत्रालय सूत्रों के अनुसार, इस बदलाव की पृष्ठभूमि इंदौर की भवन अनुमति से जुड़ी समस्या रही। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने यह मुद्दा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने उठाया था। बाणगंगा, भागीरथपुरा, न्यू देवास रोड और परदेशीपुरा समेत एक दर्जन से अधिक इलाकों में खसरा भूमि और प्लॉटों के लेआउट TCP से स्वीकृत नहीं थे। यहां पहले ‘डाटा फॉर्म’ के आधार पर प्लॉट तैयार कर भवन अनुमति दी जाती थी, लेकिन जुलाई 2023 में इस व्यवस्था पर रोक लग गई। इसके बाद इन इलाकों में मकानों के नक्शे पास होने की प्रक्रिया रुक गई। नए नियम से इंदौर समेत प्रदेश के ऐसे भूखंड मालिकों को राहत मिलने की उम्मीद है।
