गणेश चतुर्थी पर आज गणपति बप्पा की स्थापना होगी। घरों से लेकर बड़े गणेश मंदिरों और पंडालों तक उत्सव की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। इंदौर के खजराना गणेश, उज्जैन के चिंतामन गणेश समेत प्रदेश के प्रमुख मंदिरों में विशेष पूजन, श्रृंगार और दर्शन की तैयारियां हैं। सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटेगी। इंदौर के खजराना गणेश मंदिर में करीब 7 करोड़ के स्वर्ण आभूषण भगवान को धारण कराए जाएंगे। इससे पहले रविवार को ब्रह्ममुहूर्त में भगवान को हीरे जड़ित नेत्र धारण करा दिए गए। इधर, बड़ा गणपति मंदिर में भी भगवान का आकर्षक श्रृंगार होगा। 25 फीट ऊंचे गणपति की रोजाना एक घंटे संगीतमय आरती होगी। जानिए, 3 बड़े मंदिरों में क्या है खास खजराना गणेश मंदिर में रोजाना होगा आकर्षक श्रृंगार
इंदौर के खजराना गणेश मंदिर में 10 दिनों तक भगवान का रोजाना आकर्षक श्रृंगार होगा। मुख्य पुजारी पंडित अशोक भट्ट के मुताबिक भगवान को करीब 7 करोड़ रुपए कीमत के स्वर्ण आभूषण धारण कराए जाएंगे। सोमवार सुबह मंदिर प्रबंधन समिति अध्यक्ष कलेक्टर शिवम वर्मा और नगर निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल ध्वज पूजन और महाआरती करेंगे। सवा लाख मोदक का भोग भगवान गणेश को लगाया जाएगा। पूरे मंदिर को फूलों और लाइटों से सजाया गया है। सोमवार को सुबह पौन 8 से सवा 8 बजे के बीच आरती, दोपहर 12 बजे भगवान के जन्म की महाआरती और रात में पौन 8 से सवा 8 बजे के बीच आरती होगी। बड़ा गणपति: 1 घंटे की होगी संगीतमय आरती इंदौर के पश्चिम क्षेत्र में स्थित बड़ा गणपति मंदिर को इस साल 125 साल पूरे हो रहे हैं। भगवान की अद्भुत प्रतिमा 25 फीट ऊंची और 14 फीट चौड़ी है। यह प्रतिमा 4 फीट चौड़े और 16 फीट लंबे चौकोर आसन पर विराजमान है, जो पांच फीट ऊंचा है। मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित धनेश्वर दाधिच के मुताबिक, बड़ा गणपति मंदिर में भी गणेशोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। मंदिर में बड़ी संख्या में भक्त भगवान के दर्शन करने आते हैं। सोमवार को सवा मन शुद्ध गाय के घी से घर पर बनाए गए लड्डुओं का भोग लगाया जाएगा। इसमें 5 किलो के बड़े लड्डू से लेकर डिसेंडिंग ऑर्डर में लड्डुओं का भोग अर्पित किया जाएगा, जो लगभग 101 किलो के होंगे। भगवान गणेश की रोजाना रात 9 बजे एक घंटे की संगीतमय आरती होगी। भीड़ को देखते हुए आने और जाने के गेट अलग-अलग होंगे। भक्त करीब 10 मिनट भगवान के सामने दर्शन कर सकेंगे। उज्जैन के चिंतामन गणेश: बनाते हैं उल्टा स्वास्तिक चिंतामन गणेश मंदिर की खास परंपराओं में से एक मंदिर के पीछे उल्टा स्वास्तिक बनाना है। पुजारी गणेश गुरु बताते हैं कि विशेष रूप से संतान प्राप्ति की कामना लेकर आने वाले श्रद्धालु भगवान की पीठ की ओर उल्टा स्वास्तिक बनाकर अपनी मनोकामना मांगते हैं। मनोकामना पूरी होने के बाद श्रद्धालु दोबारा मंदिर आते हैं और सीधा स्वास्तिक बनाते हैं। कई श्रद्धालु यहां रक्षा सूत्र भी बांधते हैं और मनोकामना पूरी होने के बाद उसे खोलने के लिए दोबारा मंदिर आते हैं। मंदिर परिसर में बड़ा तराजू भी रखा हुआ है। मान्यता पूरी होने के बाद श्रद्धालु अनाज, लड्डुओं या अन्य प्रसाद से तुलादान करते हैं। कई परिवार संतान प्राप्ति के बाद बच्चे के वजन के बराबर लड्डुओं का तुलादान कर प्रसाद श्रद्धालुओं में वितरित करते हैं।
