चित्रकूट में सेवा और समर्पण की मिसाल माने जाने वाले पद्मश्री सम्मानित चिकित्सक डॉ. बीके जैन का शुक्रवार शाम 4:24 बजे 72 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने जानकी कुंड चिकित्सालय में अंतिम सांस ली। डॉ. जैन पिछले कई महीनों से अस्वस्थ चल रहे थे और मुंबई में उनका उपचार जारी था। हालत गंभीर होने पर उन्हें चित्रकूट स्थित जानकी कुंड चिकित्सालय लाया गया, जहां वेंटिलेटर से हटाए जाने के बाद उनका निधन हुआ। उनके निधन की पुष्टि सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट परिवार द्वारा की गई है। डॉ. जैन सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट के डायरेक्टर और जानकीकुंड नेत्र चिकित्सालय के ट्रस्टी के रूप में लंबे समय से सेवा कार्यों से जुड़े रहे। उनके नेतृत्व में नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हुए, जिससे लाखों जरूरतमंदों की आंखों का उपचार संभव हो पाया। वे स्वामी रणछोड़ दास जी महाराज के कृपापात्र थे और उनके बताए मार्ग पर चलते हुए चित्रकूट में गरीबों, संत समाज और नेत्र रोगियों की सेवा को उन्होंने अपने जीवन का लक्ष्य बनाया। चिकित्सा और सेवा के क्षेत्र में उनके योगदान को समाज हमेशा याद रखेगा। डॉ. बी. के. जैन (बुधेंद्र कुमार जैन) को चिकित्सा (नेत्र देखभाल) के क्षेत्र में 50 से अधिक वर्षों के असाधारण योगदान के लिए 26 जनवरी 2025 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। उनके निधन से चित्रकूट सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। खास बातें डेढ़ लाख से अधिक ऑपरेशन, 17 लाख को लाभ डॉ. बी.के. जैन सदगुरु नेत्र चिकित्सालय, चित्रकूट के संस्थापक निदेशक और ट्रस्टी रहे। 1970 के दशक में उन्होंने चित्रकूट जैसे पिछड़े और आदिवासी अंचल में नेत्र चिकित्सा सेवा शुरू की। सीमित संसाधनों के बावजूद उनकी दूरदृष्टि, संकल्प और सेवा भाव ने इस संस्थान को देश-दुनिया में पहचान दिलाई। आज यह चिकित्सालय भारत ही नहीं, बल्कि विश्व के प्रमुख नेत्र चिकित्सा केंद्रों में गिना जाता है। सदगुरु नेत्र चिकित्सालय में हर वर्ष करीब 1.55 लाख से अधिक नेत्र ऑपरेशन किए जाते हैं और 17 लाख से ज्यादा मरीजों को नेत्र सेवाओं का लाभ मिलता है। डॉ. जैन के नेतृत्व में यहां दुनिया का सबसे बड़ा ऑफ्थैल्मिक मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर भी विकसित किया गया। चिकित्सा के साथ-साथ उन्होंने शिक्षा और जनजागरूकता के क्षेत्र में भी ऐतिहासिक योगदान दिया। यूपी-एमपी में 130 प्राथमिक नेत्र जांच केंद्र डॉ. जैन की पहल पर मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश में 130 प्राथमिक नेत्र जांच केंद्र स्थापित किए गए। इन केंद्रों के माध्यम से समय पर जांच और उपचार संभव हो सका। उनकी प्रेरणा से हर साल हजारों सामुदायिक नेत्र शिविर लगाए जाते हैं। पन्ना, बांदा, फतेहपुर, हमीरपुर और सतना जैसे जिलों को मोतियाबिंद-मुक्त बनाने का अभियान लगातार सफलतापूर्वक चला। डॉ. जैन का जन्म मध्यप्रदेश के सतना जिले में हुआ। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा सतना के शासकीय वेंकट क्रमांक-1 विद्यालय से प्राप्त की। वर्ष 1973 में श्याम शाह मेडिकल कॉलेज, रीवा से एमबीबीएस किया और 1979 में लोकमान्य तिलक मेडिकल कॉलेज, सायन मुंबई से नेत्र रोग में पोस्ट ग्रेजुएशन पूरा किया। शहरी जीवन और बड़े अस्पतालों में करियर की संभावनाओं के बावजूद डॉ. जैन ने ग्रामीण भारत की सेवा का मार्ग चुना। उन्होंने श्री सदगुरु सेवा संघ ट्रस्ट के साथ मिलकर चित्रकूट में कार्य शुरू किया। उनके अथक प्रयासों से यह संस्थान लाखों लोगों के जीवन में रोशनी लाने का माध्यम बना। डॉ. जैन को मिला पद्मश्री सम्मान केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि गांव-गरीब तक स्वास्थ्य सेवा पहुंचाने की सोच की जीत है।
