यह तस्वीर मप्र के साक्षरता के मामले में सबसे पिछड़े जिले आलीराजपुर की है। सुविधाओं के अभाव में ग्रीन नेट की झोपड़ी में पढ़ाई को मजबूर बच्चे सिस्टम के हर बड़े दावे को आईना दिखा रहे हैं। 2011 की जनगणना में महज 36.1% साक्षरता के साथ देश का सबसे असाक्षर जिला रहा आलीराजपुर आज भी 15 साल पुराने ढर्रे पर है। आज भी ग्रीन नेट की झोपड़ीनुमा स्कूलों में बचपन साक्षरता के सपने बुन रहा है। राष्ट्रीय जनसांख्यिकी कार्यालय के पीरियॉडिक लेबरफोर्स सर्वेक्षण (पीएलएफएस) 2025 के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 7 वर्ष व उससे अधिक आयु वर्ग में मप्र की साक्षरता दर महज 77.4% है, जो राष्ट्रीय औसत (81.1%) से 3.9 फीसदी कम है। 28 राज्यों की सूची में मप्र 23वें स्थान पर है, जबकि पड़ोसी राज्य गुजरात (16वां) और छत्तीसगढ़ (20वां) मप्र से काफी आगे हैं। मप्र में शहरी साक्षरता दर 87.5%, जबकि ग्रामीण साक्षरता 73.1 फीसदी है। सोंडवा (आलीराजपुर) के कामत फलिया में 2014 से स्कूल इस झोपड़ी में चल रहा है। 19 लाख स्वीकृत होने के बावजूद भवन नहीं बना। पानी नहीं है। बच्चे 2 किमी दूर से पानी लाने को मजबूर हैं। दाखिला 50 से घटकर 24 रह गया है।
