विदिशा जिले के सिरोंज जनपद पंचायत में हुए 30.18 करोड़ रुपए के विवाह सहायता घोटाले में ईडी की जांच में नया खुलासा हुआ है। 2020 और 2021 में कोरोनाकाल में लॉकडाउन था, आयोजनों पर पाबंदी थी। इसी दौरान सिरोंज में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अपात्र लोगों की शादियां दिखाकर 51-51 हजार की सरकारी सहायता मंजूर की जाती रही। ईडी को शादियों से जुड़े दस्तावेज तो मिले, लेकिन प्रशासन से अनुमति लेने के प्रमाण नहीं मिले। इतना ही नहीं अपात्रों के नाम पर भी राशि निकाली गई। ईडी ने मामले के मुख्य आरोपी और तत्कालीन सिरोंज जनपद सीईओ शोभित त्रिपाठी को 2 सितंबर को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) में गिरफ्तार किया है। शोभित पूर्व मंत्री भाजपा विधायक गोपाल भार्गव के रिश्तेदार हैं। स्पेशल कोर्ट ने उन्हें 9 सितंबर तक ईडी की कस्टडी में भेजा है। छापे में मिले डिजिटल डिवाइस, संदिग्ध दस्तावेज… डिलीट डेटा भी खंगाल रहे
ईडी ने 3 अक्टूबर 2025 को मामले से जुड़े ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया था। इस दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस जब्त किए गए। इनकी फॉरेंसिक जांच के साथ डिलीट किए गए डेटा की भी पड़ताल की गई। इन्हीं डिजिटल साक्ष्यों की जांच के बाद शोभित त्रिपाठी के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसा गया। खातों में 51 हजार आते ही छोटे हिस्सों में निकाला कैश
ईडी की जांच में सामने आया कि जाली पहचान पत्रों से बैंक खाते खोले या उनका दुरुपयोग हुआ। 51 हजार खाते में पहुंचते ही रकम को छोटे-छोटे हिस्सों में नकद निकाला, ताकि मनी ट्रेल छिप सके।
ईडी बैंक खातों और नकद निकासी की कड़ियां जोड़ रही है। यह पता लगा रही है कि फर्जी खातों से निकाले गए 30.18 करोड़ रुपए आखिर कहां पहुंचे और इस रकम को किन संपत्तियों में लगाया गया।
