मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने वार्ड 60 की निर्वाचित पार्षद सुनेहरा अंसारी को गुरुवार को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने निर्वाचन अधिकरण यानी 22वें जिला न्यायाधीश इंदौर के 17 जुलाई 2026 के उस आदेश के अमल पर रोक लगा दी, जिसमें पार्षद का चुनाव निरस्त कर दिया गया था। कोर्ट ने उनके खिलाफ सीट खाली घोषित करने, उपचुनाव कराने या किसी अन्य व्यक्ति को पदभार सौंपने जैसी कार्रवाई पर भी रोक लगा दी है। हाईकोर्ट में सुनेहरा अंसारी की ओर से दायर सिविल रिवीजन पर सुनवाई के दौरान उनके वकील ने तर्क दिया कि निर्वाचन अधिकरण ने मामले में उपलब्ध तथ्यों और पूर्व में हाईकोर्ट द्वारा दिए गए एक फैसले को सही तरीके से नहीं देखा। याचिकाकर्ता की ओर से यह भी बताया गया कि संबंधित संपत्ति को लेकर शुरुआत में नगर निगम की ओर से नो-ड्यूज सर्टिफिकेट जारी किया गया था। बाद में संपत्ति कर बकाया होने की बात सामने रखी गई। दूसरी ओर, प्रतिवादी पक्ष ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता ने अपनी सभी संपत्तियों का खुलासा नहीं किया था और एक अन्य संपत्ति का उल्लेख नहीं किया गया। इसी आधार पर निर्वाचन अधिकरण के आदेश को सही बताया गया। हाईकोर्ट ने कहा- मामला सुनवाई योग्य जस्टिस संदीप एन. भट्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि प्रथम दृष्टया मामले में विचार की जरूरत है। कोर्ट ने पूर्व के एक मामले में दिए गए फैसले और नो-ड्यूज सर्टिफिकेट से जुड़े तथ्यों को देखते हुए सिविल रिवीजन को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया। इस बीच प्रतिवादी पक्ष ने कोर्ट को बताया कि निर्वाचन अधिकरण के आदेश के बाद वार्ड की सीट रिक्त घोषित की जा चुकी है और आगे के चुनाव का कार्यक्रम भी जारी हो गया है। इसलिए अब अंतरिम राहत नहीं दी जानी चाहिए। इसके समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला दिया गया। मतदाताओं के जनादेश को विफल नहीं होने दिया जा सकता हाईकोर्ट ने माना कि सामान्य तौर पर चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद अदालतें उसमें हस्तक्षेप करने से बचती हैं। लेकिन इस मामले में कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कृपाल सिंह एमएलए बनाम उत्तम सिंह मामले में की गई टिप्पणियों को महत्वपूर्ण माना। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता वार्ड 60 से मतदाताओं के लोकतांत्रिक जनादेश से निर्वाचित प्रतिनिधि के रूप में काम कर रही थीं। ऐसे में अंतरिम राहत नहीं देने पर बाद में याचिका पर सुनवाई महज अकादमिक रह जाएगी। उपचुनाव और नई नियुक्ति पर भी रोक हाईकोर्ट ने 17 जुलाई 2026 के निर्वाचन अधिकरण के आदेश की ऑपरेशन, एग्जीक्यूशन और उससे होने वाले सभी परिणामी प्रभावों पर रोक लगा दी है। साथ ही वार्ड की सीट रिक्त घोषित करने, उपचुनाव शुरू या कराने, किसी अन्य व्यक्ति को पदभार सौंपने अथवा आदेश के आधार पर कोई अन्य कार्रवाई करने पर भी रोक रहेगी। यह रोक सिविल रिवीजन के अंतिम निपटारे तक प्रभावी रहेगी। कोर्ट ने मामले को चार सप्ताह बाद अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए हैं।
