एक तस्वीर किसी की पहचान का सबूत नहीं होती, लेकिन अगर तस्वीर के पीछे मसूरी का वह भवन हो, जहां देशभर से चयनित प्रशासनिक अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जाता है। हाथ में ट्रॉफी और मोमेंटो हो और सामने वाला खुद को IAS अधिकारी बताए, तो आम आदमी के लिए शक की गुंजाइश कम रह जाती है। पुलिस के मुताबिक, तृप्ति सिंह राजपूत ने इसी भरोसे को अपनी कथित फर्जी पहचान का आधार बनाया। बाएं हाथ में सम्मान की मोमेंटो, दाएं हाथ में ट्रॉफी और पीछे मसूरी स्थित ट्रेनिंग सेंटर की इमारत… यह तस्वीर वह लोगों को यह यकीन दिलाने के लिए दिखाती थी कि वह IAS की ट्रेनिंग ले चुकी है। चंदेरी में नौकरी लगवाने के नाम पर 9 लाख 80 हजार रुपए की ठगी की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच में पुलिस के सामने एक ऐसी कहानी खुल रही है, जिसमें सिर्फ फर्जी दस्तावेज ही नहीं, बल्कि पूरी ‘अधिकारी वाली पहचान’ तैयार करने की कोशिश नजर आती है। शुरुआत चंदेरी के एक होटल से पुलिस के मुताबिक, 7 अप्रैल 2025 को तृप्ति सिंह राजपूत, उसका भाई सुधांशु सिंह और उनके साथी तनुज वैश्य व अंजली सिंह चंदेरी पहुंचे थे। चारों किला कोठी में ठहरे। आरोप है कि तृप्ति ने यहां खुद को मध्यप्रदेश टूरिज्म विभाग की एडिशनल डायरेक्टर बताया। इसके बाद जयकुमार कोली, विजय कुमार दुबे, ऋतिक शर्मा और राघव सोनी को सरकारी नौकरी लगवाने का भरोसा दिया गया। कथित तौर पर कहा गया कि नौकरी मानव संसाधन विकास मंत्रालय में लगेगी और तृप्ति खुद वहां की हेड है। इसके बदले तीन लाख रुपए प्रति व्यक्ति मांगे गए। पुलिस के अनुसार, फरियादियों ने भरोसा कर कुल 9 लाख 80 हजार रुपए नकद दिए और अपने जरूरी दस्तावेज भी सौंपे। दो लाख रुपए बाद में देने की बात हुई। यहीं से वह कहानी शुरू होती है, जिसमें पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि तृप्ति ने आखिर ऐसा कौन सा तंत्र खड़ा किया था, जिससे लोगों को उसकी पहचान पर भरोसा हो गया। मसूरी की तस्वीर बनी ‘पहचान’ का हथियार जांच का सबसे दिलचस्प पहलू मसूरी से जुड़ी तस्वीर है। पुलिस के मुताबिक, तृप्ति के पास ऐसी तस्वीर थी, जिसमें वह मसूरी के उस भवन के बाहर नजर आती है, जहां प्रशासनिक अधिकारियों का प्रशिक्षण होता है। उसके हाथ में ट्रॉफी और मोमेंटो भी दिखाई देते हैं। तस्वीर अपने आप में किसी सरकारी नियुक्ति या प्रशिक्षण का प्रमाण नहीं है, लेकिन आरोप है कि इसे इस तरह पेश किया जाता था कि सामने वाले को लगे कि तृप्ति वास्तव में IAS अधिकारी है और वहां प्रशिक्षण ले चुकी है। पुलिस को अब भोपाल स्थित उसके घर से ऐसे ट्रॉफी और मोमेंटो भी मिले हैं, जिन पर कथित तौर पर ‘प्रशिक्षु IAS अधिकारी’ जैसी जानकारी अंकित थी। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि फर्जी अधिकारी की पूरी पहचान तैयार करने के पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे। फर्जी कागजों से लेकर ‘अधिकारी किट’ तक पुलिस रिमांड के दौरान भोपाल में तृप्ति और सुधांशु के घर से प्रकरण से जुड़े दस्तावेजों की प्रतियां और फरियादियों के दस्तावेज बरामद किए गए। पुलिस के मुताबिक, महंगे आईफोन की खरीद की रसीदें, महंगे होटलों में ठहरने के प्रमाण और हवाई यात्रा से जुड़े दस्तावेज भी मिले हैं। तृप्ति की ससुराल स्थित एक अन्य ठिकाने से कथित फर्जी IAS ट्रेनी अफसर बनने से जुड़े दस्तावेज, ट्रॉफी और मोमेंटो बरामद किए गए। पुलिस इस बिंदु पर भी जांच कर रही है कि इन वस्तुओं और दस्तावेजों का इस्तेमाल सुनियोजित तरीके से ऐसी छवि बनाने के लिए किया गया था या नहीं, जिसमें तृप्ति को सरकारी अधिकारी के रूप में प्रस्तुत किया जा सके। भारत सरकार की नेम प्लेट वाली इनोवा भी मिली इस कथित पहचान का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा एक इनोवा कार थी। पुलिस ने उस कार को बरामद किया है, जिस पर भारत सरकार की नेम प्लेट लगी होने की बात सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, इसी कार का इस्तेमाल तृप्ति अलग-अलग जगहों पर आने-जाने के लिए करती थी। आलीशान कार, सरकारी नेम प्लेट, महंगे होटल में ठहरना और खुद को बड़े सरकारी पद पर बताना- इन सबका असर उस व्यक्ति पर अलग हो सकता है, जिसे नौकरी या सरकारी संपर्क की जरूरत है। यही वजह है कि पुलिस अब यह जांच रही है कि कार की नेम प्लेट किसने तैयार कराई, उसे किस उद्देश्य से लगाया गया और क्या इसके जरिए जानबूझकर सरकारी अधिकारी होने का भ्रम पैदा किया गया। इस मामले में पुलिस ने आरोपी ड्राइवर भूपेंद्र बैरागी को भी गिरफ्तार किया है और घटना में इस्तेमाल कार बरामद की है। पांच आरोपी, तीन गिरफ्तार और दो की तलाश चंदेरी के मामले में अब पांच आरोपियों के नाम सामने आए हैं- तृप्ति सिंह राजपूत, उसका भाई सुधांशु सिंह, ड्राइवर भूपेंद्र बैरागी, तनुज वैश्य और अंजली सिंह। पुलिस के मुताबिक, इनमें से कुछ लोगों की भूमिका कथित फर्जी मोमेंटो, आईडी कार्ड, लेटर और नियुक्ति पत्र तैयार करने तथा उन्हें लोगों को दिखाने में थी। तृप्ति सिंह, सुधांशु सिंह और भूपेंद्र बैरागी को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि तनुज वैश्य और अंजली सिंह की तलाश जारी है। हालांकि, जिस लैपटॉप से यह सामग्री तैयार किए जाने की बात सामने आई है, उसका डेटा डिलीट मिला है। अब पुलिस तकनीकी जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि डिलीट किए गए डेटा में क्या था, दस्तावेज किसने तैयार किए और किन लोगों के साथ यह सामग्री साझा की गई थी। 9.80 लाख से आगे कितनी बड़ी है कहानी? चंदेरी में दर्ज मामला 9 लाख 80 हजार रुपए की ठगी का है, लेकिन पुलिस की जांच में अन्य शिकायतों और संदिग्ध घटनाओं की जानकारी भी सामने आ रही है। पुलिस के मुताबिक, भोपाल के एक बिल्डर को कथित फर्जी पद और प्रभाव का डर दिखाकर करीब 90 लाख रुपए की ठगी किए जाने के मामले की भी जांच की जा रही है। इसके अलावा दूसरे लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर रकम लेने और उनके लिए कथित फर्जी ज्वाइनिंग लेटर तैयार करने की जानकारी भी सामने आई है। अगर इन मामलों की पुष्टि होती है, तो चंदेरी की 9.80 लाख रुपए की ठगी इस कथित नेटवर्क का सिर्फ एक हिस्सा हो सकती है। फर्जी IAS नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी पुलिस एसपी राजीव कुमार मिश्रा का कहना है कि पुलिस ने तृप्ति सिंह, सुधांशु सिंह और ड्राइवर भूपेंद्र बैरागी को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के खिलाफ पहले धारा 318(4), 336(3), 338 और 340(2) BNS के तहत मामले दर्ज किए गए थे। जांच के दौरान धारा 319(2) और 61(2) BNS भी जोड़ी गई है। तनुज वैश्य और अंजली सिंह की तलाश जारी है। पुलिस अब बरामद दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक डेटा और वाहन समेत अन्य साक्ष्यों के आधार पर कथित फर्जी IAS नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। यह खबर पढ़ें… महंगी कार, लग्जरी होटल और आईफोन से दिखाती थी रुतबा खुद को कभी IAS तो कभी बड़े सरकारी विभाग की अधिकारी बताकर लोगों को नौकरी दिलाने का झांसा देने वाली तृप्ति सिंह राजपूत और उसके भाई सुभाष राजपूत से पूछताछ में ठगी के नए मामले सामने आ रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…
