भोपाल के शाहजहांनाबाद थाना क्षेत्र में वक्फ संपत्ति के प्रबंधन और उससे होने वाली आय को लेकर दारुल शफकत सोसायटी के अध्यक्ष शाहिद अलीम खान समेत अन्य पदाधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद मामला गरमा गया है। मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड की शिकायत पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) और 316(2) के तहत केस दर्ज किया है। वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सनवर पटेल ने आरोप लगाया कि सोसायटी ने वक्फ की करीब 2.7 एकड़ जमीन को अपना बताते हुए नगर निगम से नक्शा पास कराया और संपत्ति को किराए पर देकर आय अर्जित की। सनवर पटेल ने कहा कि यह संपत्ति वर्ष 1961 से वक्फ के नाम गजट नोटिफाइड है। उनके मुताबिक, दारुल शफकत सोसायटी को संपत्ति के एक हिस्से में संस्था संचालित करने की अनुमति थी, लेकिन सोसायटी ने पूरी 2.7 एकड़ संपत्ति पर अधिकार जताना शुरू कर दिया। वक्फ संपत्ति को अपना बताकर दिए शपथ पत्र वक्फ बोर्ड अध्यक्ष ने कहा कि सोसायटी के जिम्मेदारों ने नगर निगम में भवन का नक्शा पास कराने के दौरान खुद को संपत्ति का मालिक बताते हुए शपथ पत्र दिए। उनके मुताबिक, किराया अनुबंधों में भी सोसायटी को संपत्ति का मालिक बताया गया, जबकि वक्फ बोर्ड के रिकॉर्ड में संपत्ति वक्फ के नाम दर्ज है। उन्होंने कहा कि इसी आधार पर पुलिस ने शाहिद अलीम और अन्य के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया है। मामले में सोसायटी के दूसरे पदाधिकारियों की भूमिका भी जांची जाएगी। बैठक की कार्रवाई और मिनट्स के आधार पर यह देखा जाएगा कि संपत्ति को अपना बताने वाले फैसलों में कौन-कौन शामिल था। इज्तिमा बाजार से सालाना 2 से ढाई करोड़ आय का आरोप सनवर पटेल ने दावा किया कि वक्फ की इस जमीन पर इज्तिमा बाजार भी लगाया जाता है और इससे सालाना करीब 2 से ढाई करोड़ रुपए की आय होने की बात सामने आई है। उनका आरोप है कि इस आय का उचित हिसाब वक्फ बोर्ड को नहीं दिया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वक्फ बोर्ड इज्तिमा बाजार के खिलाफ नहीं है, लेकिन बाजार का संचालन नियमों के अनुसार होना चाहिए। व्यापारियों का पुलिस वेरिफिकेशन, दुकानों का विधिवत आवंटन और प्राप्त राशि का पारदर्शी हिसाब होना चाहिए। 28.91 करोड़ की आरआरसी जारी वक्फ बोर्ड अध्यक्ष ने बताया कि मामले की जांच के बाद 28 करोड़ 91 लाख रुपए की आरआरसी (Revenue Recovery Certificate) जारी की गई है। उन्होंने कहा कि वक्फ अधिनियम के तहत कलेक्टर के माध्यम से संबंधित लोगों की चल-अचल संपत्तियों से राशि की वसूली की जाएगी। पटेल के अनुसार, वक्फ संपत्ति से अर्जित राशि यदि किसी अन्य संपत्ति को खरीदने में इस्तेमाल हुई है तो उस संपत्ति की भी जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि यह साबित होता है कि वक्फ की आय से कोई दूसरी संपत्ति खरीदी गई है तो उसके मालिकाना हक को लेकर भी वक्फ बोर्ड कार्रवाई करेगा। 20 साल से हिसाब नहीं दिया वक्फ बोर्ड अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि शाहिद अलीम को संपत्ति के प्रबंधन की जिम्मेदारी मिलने के बाद से करीब 20 वर्षों से वक्फ बोर्ड को आय-व्यय का पूरा हिसाब नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि पहले करीब 20 साल तक हिसाब दिया जाता रहा, लेकिन शाहिद अलीम की नियुक्ति के बाद यह व्यवस्था बंद हो गई। वक्फ बोर्ड की शिकायत में भी जीवन रेखा अस्पताल से मिले किराए और धरोहर राशि का हिसाब नहीं दिए जाने का आरोप लगाया गया है। बोर्ड के दस्तावेजों के मुताबिक, जुलाई 2011 से मई 2025 के बीच करीब 1.96 करोड़ रुपए किराया और 30 लाख रुपए धरोहर राशि प्राप्त होने की बात सामने आई है। अस्पताल का कब्जा लेकर अब बोर्ड को आय पटेल ने बताया कि इसी 2.7 एकड़ वक्फ संपत्ति में संचालित जीवन रेखा अस्पताल से वक्फ बोर्ड ने विधिवत कब्जा लिया है। उनके अनुसार, अस्पताल से अब करीब 1.80 लाख रुपए प्रतिमाह आय वक्फ बोर्ड को प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि वक्फ करने वाले व्यक्ति की मंशा यतीम बच्चों के हित में इस संपत्ति का उपयोग करने की थी। इसलिए अस्पताल से होने वाली आय को भोपाल के यतीम बच्चों की शिक्षा और फीस पर खर्च करने के लिए प्रक्रिया शुरू की गई है। यतीमखाने में रह रहे बच्चों पर FIR का असर नहीं होगा यतीमखाने में रह रहे बच्चों को लेकर पूछे गए सवाल पर सनवर पटेल ने कहा कि FIR का बच्चों के रहने पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि NGO को सामाजिक कार्य करने में कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन वक्फ संपत्ति पर गैरकानूनी गतिविधियां नहीं होने दी जाएंगी। उन्होंने कहा कि यदि NGO के माध्यम से यतीम बच्चों की सेवा का काम करना है तो उसे भी कानून और वक्फ के नियमों के तहत संचालित किया जा सकता है। वक्फ की आय से खरीदी संपत्ति भी जांच के दायरे में वक्फ बोर्ड अध्यक्ष ने कहा कि यदि वक्फ संपत्ति से प्राप्त आय को किसी अन्य संपत्ति या स्कूल की खरीद में लगाया गया है तो उस संपत्ति के मालिकाना हक की भी जांच होगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा के लिए चल रहे स्कूल का संचालन जारी रहने का बोर्ड स्वागत करता है, लेकिन यदि उसकी खरीद वक्फ की आय से हुई है तो उसके स्वामित्व की वैधानिक स्थिति भी जांची जाएगी। सनवर पटेल ने कहा कि वक्फ बोर्ड का उद्देश्य किसी संस्था या व्यक्ति को बेवजह परेशान करना नहीं है, लेकिन वक्फ संपत्तियों का संचालन कानून के अनुसार ही होगा। उन्होंने कहा कि मामले की पुलिस जांच के दौरान सोसायटी के अन्य पदाधिकारियों और सदस्यों की भूमिका सामने आने पर उनके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।
