मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में एक्टिव स्ट्रॉन्ग सिस्टम से डिंडौरी, पन्ना, रीवा, सतना, छतरपुर समेत कई जिलों में बाढ़ के हालात हैं। नर्मदा, मंदाकिनी जैसी नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। सड़कों पर नाव चल रही है। शुक्रवार को निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर समेत 16 जिलों में हैवी रेन का अलर्ट है। मौसम विभाग के मुताबिक, यहां अगले 24 घंटे में 4 से 8 इंच तक पानी गिर सकता है। ग्वालियर, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम, सागर, दमोह, पन्ना, सीधी और सिवनी में भारी बारिश का अलर्ट है। वहीं, भोपाल, सीहोर, राजगढ़, इंदौर, धार, अलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, बैतूल, हरदा, मुरैना, भिंड, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सतना, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश का दौर जारी रह सकता है। मऊगंज में उफनी अष्टभुजा, 3 मजदूर फंसे, एक बहा इससे पहले गुरुवार को मऊगंज में अष्टभुजा नदी उफान पर आ गई। बाढ़ से नईगढ़ी गांव डूब गया। यहां अमृत योजना के निर्माण कार्य में लगे 4 मजदूर फंस गए। जिनमें से एक तेज बहाव में बह गया। वह करीब 2 घंटे तक मदद की गुहार लगाता रहा। उमरिया में भी एक बुजुर्ग बाढ़ में बह गया। डिंडौरी में भारी बारिश के चलते आंगनवाड़ी से लेकर 12वीं तक के स्कूल बंद रहे। खरमेर नदी का पानी पुल के ऊपर आने से डिंडौरी-मंडला स्टेट हाईवे बंद हो गया। पन्ना में भी 12वीं तक के सभी स्कूलों में अवकाश रहा। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का पानी बाजार तक पहुंच गया है। सड़कों पर नाव चली। गुप्त गोदावरी की दोनों गुफाएं पर्यटकों के लिए बंद कर दी गई। रीवा के निराला नगर हॉस्टल समेत 9 इलाकों में पानी भर गया। घरों और दुकानों का सामान पानी में डूब गया। देखिए, गुरुवार को हुई बारिश से जुड़ी तस्वीरें प्रदेश में अब तक 23 इंच बारिश हुई मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक ने बताया कि मानसून टर्फ समेत अन्य सिस्टम के एक्टिव होने से एमपी के पूर्वी हिस्से में भारी बारिश हो रही है। 20 से 24 अगस्त के दौरान वर्षा गतिविधि के धीरे-धीरे मध्य और पश्चिमी मध्य प्रदेश की ओर विस्तार के संकेत मिल रहे हैं। मौसम विभाग की मानें तो प्रदेश में अब तक 599 मिमी यानी 23.6 इंच बारिश हो चुकी है। यह अब तक की सामान्य बारिश 26.6 इंच (675.1 मिमी) की तुलना में 3 इंच कम है। ओवरऑल 11 प्रतिशत कम पानी गिरा है। पूर्वी हिस्से में 11% और पश्चिमी हिस्से में औसत से 12% बारिश कम हुई है। 39 जिलों में 4% से 58% तक कम बारिश प्रदेश के पूर्वी हिस्से- जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में 19% तक कम बारिश हुई है। बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सिवनी, टीकमगढ़ में 4% से 58% तक कम बारिश हुई है। वहीं, पश्चिमी हिस्से के आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, दतिया, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में औसत से 5% से 39% कम पानी गिरा है। दूसरी तरफ, अनूपपुर, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, बड़वानी, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, देवास, गुना, ग्वालियर, खंडवा, खरगोन, राजगढ़ में औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई। मैप से समझें, 4 दिन ऐसा रहेगा मौसम जून के बाद जुलाई-अगस्त में अच्छी बारिश मौसम विभाग के अनुसार, मध्य प्रदेश में जून में 14% कम बारिश हुई थी। जुलाई के शुरुआती दिनों में तेज बारिश होने से यह आंकड़ा बढ़ गया। इसके बाद मानसून दो बार ब्रेक हुआ और कई दिन तक बारिश नहीं हुई। आखिरी सप्ताह में फिर से स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव हो गया। इसके बावजूद 13 प्रतिशत कम बारिश हुई है। जुलाई का कोटा तो फुल हो गया लेकिन जून की भरपाई नहीं हो पाई। बता दें कि प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जिले की सामान्य बारिश 38 से 39 इंच तक है। एमपी के 5 बड़े शहरों में बारिश का रिकॉर्ड भोपाल में अगस्त 2006 में 35 इंच बारिश हो चुकी भोपाल में अगस्त में मानसून जमकर बरसता है। इस महीने राजधानी में औसत साढ़े 35 इंच तक बारिश हो चुकी है, जो साल 2006 में हुई थी। 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश करीब 12 इंच 14 अगस्त 2006 को हुई थी। पिछले सालों की बात करें तो 2015 और 2022 में 30 इंच से ज्यादा पानी गिर चुका है। भोपाल में इस महीने औसत 14 दिन बारिश होती है। इस दौरान 13 दिन तक पानी गिर जाता है। जुलाई जैसे ही सिस्टम एक्टिव होते हैं। इंदौर में 1944 में गिरा था 28 इंच पानी इंदौर में अगस्त महीने में औसत 28 इंच बारिश का रिकॉर्ड है, जो साल 1944 में दर्ज किया गया था। 24 घंटे में सबसे ज्यादा बारिश का रिकॉर्ड 22 अगस्त 2020 को बना था। इस दिन साढ़े 10 इंच पानी गिरा था। पिछले 10 साल में दो बार 17 इंच से ज्यादा बारिश हो चुकी है। इंदौर में अगस्त महीने की औसत बारिश 10 से 11 इंच है। महीने में 12 से 13 दिन तक बारिश होती है। ग्वालियर में 24 घंटे में साढ़े 8 इंच बारिश का रिकॉर्ड ग्वालियर में 24 घंटे में साढ़े 8 इंच बारिश होने का रिकॉर्ड है, जो 10 अगस्त 1927 को बना था। सर्वाधिक मासिक बारिश वर्ष 1916 में 28 इंच हुई थी। यहां अगस्त की औसत बारिश साढ़े 9 इंच है। एवरेज 12 दिन बारिश होती है। जबलपुर में 102 साल पहले गिरा था 44 इंच पानी जबलपुर में एक महीने में 44 इंच बारिश का रिकॉर्ड है। 102 साल पहले यानी वर्ष 1923 में अगस्त महीने में बारिश ने रिकॉर्ड तोड़ दिया था। इस साल 20 अगस्त को 24 घंटे में ही 13 इंच बारिश हुई थी। यहां बादल फटने जैसी स्थिति बनी थी। जबलपुर में इस महीने की औसत बारिश 18 इंच है। करीब 16 दिन तक पानी गिरता है। पिछले 10 साल की बात करें तो 2019 में यहां 30.61 इंच बारिश हुई थी। उज्जैन में अगस्त में जमकर होती है बारिश उज्जैन में साल 2006 में सर्वाधिक बारिश का रिकॉर्ड बना था। इस साल अगस्त महीने में करीब 35 इंच बारिश हुई थी। इसी साल 24 घंटे में सर्वाधिक 12 इंच बारिश का रिकॉर्ड 10 अगस्त को बना था। उज्जैन में अगस्त की औसत बारिश 10 इंच है। 10 से 11 दिन यहां बारिश होती है।
