मध्य प्रदेश में कैंसर के मरीजों और इससे होने वाली मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से लोकसभा में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में 2021 में कैंसर के अनुमानित 79,871 मामले थे। 2025 में यह संख्या बढ़कर 88,297 हो गई, यानी 5 साल में करीब 8,400 नए मामले बढ़े। इसी अवधि में कैंसर से होने वाली अनुमानित मौतें भी बढ़ीं। 2021 में प्रदेश में 44,056 मौतें हुई थीं, जबकि 2025 में यह आंकड़ा 48,694 तक पहुंच गया, यानी 5 साल में करीब 4,600 मौतें बढ़ीं। देश के दूसरे राज्यों से तुलना करें तो नए मरीजों के मामले में मध्य प्रदेश टॉप-10 राज्यों में है। वहीं कैंसर से होने वाली मौतों के मामले में प्रदेश देश में 7वें नंबर पर है। देश में नए मरीजों के मामले में MP कहां? 2025 के अनुमानित आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 2.26 लाख से अधिक नए मामले सामने आए। इसके बाद महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार और तमिलनाडु हैं। मध्य प्रदेश में 88,297 मामले हैं। यह संख्या राजस्थान (80,628), गुजरात (79,217) और आंध्र प्रदेश (78,282) से ज्यादा है, यानी आबादी और अन्य कारकों को अलग रखकर सिर्फ कुल मामलों की संख्या देखें तो एमपी देश के सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में शामिल है। मौतों के मामले में एमपी 7वें नंबर पर कैंसर से होने वाली अनुमानित मौतों के मामले में भी मध्य प्रदेश की स्थिति चिंताजनक है। 2025 में मध्य प्रदेश में कैंसर से होने वाली मौतों का आंकड़ा राजस्थान (44,402) और गुजरात (43,572) से भी ज्यादा है। क्यों जरूरी है समय पर जांच और इलाज? कैंसर का इलाज बीमारी के प्रकार और उसके स्टेज पर निर्भर करता है। शुरुआती चरण में बीमारी की पहचान होने पर कई तरह के कैंसर का इलाज ज्यादा प्रभावी हो सकता है। इसलिए शरीर में लंबे समय से बने रहने वाले असामान्य लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। प्रदेश में कैंसर के इलाज के लिए बड़े सरकारी केंद्र मुख्य रूप से भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और रीवा जैसे शहरों में हैं। एमपी में पूरा इलाज सिर्फ चुनिंदा अस्पतालों में भोपाल इंदौर शासकीय कैंसर अस्पताल: यह महात्मा गांधी मेमोरियल (MGM) मेडिकल कॉलेज और एमवाय (MY) अस्पताल से संबद्ध एक सरकारी कैंसर अस्पताल है। यहां कैंसर के मरीजों के इलाज के लिए बड़ी विंग, विशेषज्ञ डॉक्टर और रियायती दरों पर कीमोथेरेपी व रेडिएशन थेरेपी (जैसे लिनियर एक्सीलेटर) की व्यवस्था है। ग्वालियर जबलपुर रीवा आंकड़े एक बड़ी चुनौती की ओर इशारा करते हैं 2021 से 2025 के बीच मध्य प्रदेश में कैंसर के अनुमानित नए मामलों में करीब 10.5% की बढ़ोतरी हुई है। इसी अवधि में अनुमानित मौतों में करीब 10.5% की वृद्धि हुई। ये आंकड़े सिर्फ संख्या नहीं हैं। इनके पीछे हजारों परिवार हैं, जिन पर बीमारी का आर्थिक, मानसिक और सामाजिक असर पड़ता है। ऐसे में बीमारी की जल्द पहचान, समय पर इलाज और प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बेहतर कैंसर सुविधाओं की पहुंच सबसे अहम चुनौती बन जाती है। ———————————— यह खबर भी पढ़ें… कैंसर से एक ही गांव में 35 मौतें इस गांव के अलावा किसी और गांव में कैंसर की प्रॉब्लम नहीं है। यहां ये स्थिति आम हो गई है। अब भी 22 साल का एक लड़का और 18 महीने की एक बच्ची कैंसर से पीड़ित है। बहुत से लोग तो बीमारी के बारे में बताते ही नहीं है। शाजापुर के अमलाय पत्थर गांव की कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर सुधा परमार आगे कहती हैं कि समस्या बहुत गंभीर है, लेकिन इसका कारण अभी तक पता नहीं चला है। यदि कैंसर की स्क्रीनिंग हो तो और मामले सामने आएंगे। पूरी खबर पढ़ें
