ग्वालियर शहर की छलनी और धंसी हुई सड़कों को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने कड़ा रुख अपनाया है। सड़कों के निर्माण की गुणवत्ता की जमीनी हकीकत जानने के लिए कोर्ट के आदेश के बाद रविवार को ऑन-स्पॉट सैंपलिंग की प्रक्रिया शुरू हो गई है। हाईकोर्ट द्वारा गठित वकीलों के विशेष कमीशन और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने बुधवार को गुढ़ी-गुढ़ा का नाका क्षेत्र पहुंचकर सड़कों का निरीक्षण किया। टीम ने मौके पर ही सड़क खोदकर सैंपल एकत्र किए। कोर्ट का मानना है कि सड़कों की वास्तविक गुणवत्ता जांचने और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों व ठेकेदारों की जिम्मेदारी तय करने के लिए सैंपलिंग सबसे सटीक तरीका है। मौके पर सीलिंग: वकीलों के कमीशन की मौजूदगी में सैंपल एकत्र कर उन्हें तत्काल सील किया जा रहा है। लैब टेस्टिंग का खाका: प्रत्येक चिन्हित सड़क से चार-चार सैंपल लिए जा रहे हैं। इनमें से सैंपल की जांच पीडब्ल्यूडी (PWD) और ग्रामीण अभियांत्रिकी सेवा (RES) की लैब में कराई जाएगी। क्रॉस-चेकिंग से खुलेगा सच: निष्पक्षता बनाए रखने के लिए तीसरे और चौथे सैंपल को देश की किसी प्रतिष्ठित नेशनल लैब में क्रॉस-चेकिंग के लिए भेजा जा सकता है। प्राइवेट लैब पर दबाव को लेकर कोर्ट नाराज: याचिका की सुनवाई के दौरान जब कोर्ट के सामने यह बात आई कि जांच को प्रभावित करने के लिए प्राइवेट लैब पर दबाव बनाया जा रहा है, तो हाईकोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई और निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए। नगर निगम ने कोर्ट में पेश की 129 सड़कों की ‘कुंडली’ मामले की सुनवाई के दौरान नगर निगम ने हाईकोर्ट में अपना अनुपालन प्रतिवेदन (प्रोग्रेस रिपोर्ट) दाखिल किया। इसमें शहर की सड़कों की स्थिति का ब्योरा सामने आया है। अन्य सरकारी एजेंसियों का भी हाल खराब कोर्ट में अन्य विभागों की 64 मुख्य सड़कों का ब्योरा भी पेश किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, अन्य एजेंसियों, जैसे पीडब्ल्यूडी और विकास प्राधिकरण के स्वामित्व वाली 15 मुख्य सड़कें पूरी तरह क्षतिग्रस्त पाई गई हैं। जनहित याचिका से शुरू हुई सड़कों की जंग, 25 अगस्त पर टिकीं नजरें ग्वालियर की बदहाल सड़कों, जानलेवा गड्ढों और सड़कें धंसने के मुद्दे को मीडिया द्वारा प्रमुखता से उठाए जाने के बाद शहर के वरिष्ठ अधिवक्ता अवधेश सिंह तोमर ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की थी। कोर्ट में लगातार हुई सुनवाई के बाद अब सड़कों की वास्तविक गुणवत्ता जांचने के लिए सैंपलिंग का रास्ता चुना गया है। अब सभी की नजरें 25 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई पर हैं। इस दौरान सैंपलिंग की शुरुआती जांच रिपोर्ट कोर्ट के सामने रखी जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर खराब सड़कें बनाने वाले ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई को लेकर फैसला हो सकता है।
