सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रदेश के प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों से शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) ले रही राज्य सरकार पर परीक्षा शुल्क को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कर्मचारी चयन मंडल ने परीक्षा के लिए 1000 रुपए शुल्क तय किया है। प्रदेश में करीब 1.50 लाख शिक्षक इसके दायरे में आने का अनुमान है। ऐसे में केवल परीक्षा शुल्क से करीब 15 करोड़ रुपए जमा होंगे। शिक्षक संगठनों का दावा है कि परीक्षा के आयोजन पर इससे काफी कम राशि खर्च होगी। शिक्षक संगठनों ने 1000 रुपए शुल्क का विरोध शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि ये शिक्षक नई नियुक्ति के लिए परीक्षा नहीं दे रहे हैं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन में सेवा में बने रहने के लिए पात्रता परीक्षा दे रहे हैं। संगठनों ने मुख्यमंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री से मुलाकात कर परीक्षा शुल्क माफ करने की मांग करने की तैयारी की है। तब तक प्रदेश के शिक्षकों से फॉर्म नहीं भरने की अपील भी की गई है। प्रदेश में वर्ष 1998 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करने पर ही सेवा में रखने का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने मई 2026 में दिया था। इसके बाद स्कूल शिक्षा और जनजातीय कार्य विभाग के करीब 1.50 लाख शिक्षक परीक्षा के दायरे में आने का अनुमान है। कर्मचारी चयन मंडल ने स्कूल शिक्षा विभाग के प्रस्ताव पर प्राथमिक और माध्यमिक वर्ग के शिक्षकों के लिए 21 अगस्त से 9 सितंबर तक आवेदन प्रक्रिया तय की है। इसके लिए 1000 रुपए परीक्षा शुल्क के अलावा एमपी ऑनलाइन और कियोस्क का शुल्क भी देना होगा। शिक्षक 1000 रुपए शुल्क देने के पक्ष में नहीं शिक्षक संगठनों ने शुल्क का विरोध करते हुए मुख्यमंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री से मुलाकात की तैयारी शुरू कर दी है। शिक्षक संयुक्त मोर्चा की ओर से 26 अगस्त तक दोनों से मुलाकात का प्रयास किया जा रहा है। संगठनों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन में सरकार परीक्षा करा रही है, इसलिए इसका खर्च भी शासन को ही उठाना चाहिए। शिक्षकों से शुल्क लेना उचित नहीं है, क्योंकि वे किसी नई नियुक्ति के लिए आवेदन नहीं कर रहे हैं। 30 अगस्त को जंतर-मंतर पर जुटेंगे शिक्षक सुप्रीम कोर्ट के फैसले से प्रभावित देशभर के शिक्षक 30 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पर जुटने की तैयारी में हैं। शिक्षक संगठनों का कहना है कि केंद्र सरकार से अध्यादेश लाने और शिक्षकों के हित में निर्णय लेने की मांग की जाएगी। राज्य अध्यापक संघ, शासकीय शिक्षक संगठन समेत अन्य संगठनों ने प्रदेश के शिक्षकों से दिल्ली पहुंचने का आह्वान किया है। परीक्षा शुल्क माफ करने और ऑफलाइन कराने की मांग शासकीय शिक्षक संगठन मध्यप्रदेश ने सेवारत शिक्षकों की टीईटी निःशुल्क कराने की मांग की है। संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने कहा कि यह परीक्षा शासन और शिक्षा विभाग के निर्देशों के अनुपालन का हिस्सा है, इसलिए इसका खर्च शिक्षकों से लेना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि इससे पहले सीएम राइज स्कूल, उत्कृष्ट विद्यालय और मॉडल स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए आयोजित परीक्षाओं का खर्च शासन ने उठाया था। ऐसे में सेवारत शिक्षकों की टीईटी के लिए शुल्क लेना समझ से परे है। टीईटी से वंचित शिक्षकों की सूची जारी करने की मांग उपेेंद्र कौशल ने कहा कि शिक्षा विभाग के पास सभी सेवारत शिक्षकों का सेवा और शैक्षणिक रिकॉर्ड उपलब्ध है। विभाग यह भी जानता है कि कौन-से शिक्षक टीईटी उत्तीर्ण कर चुके हैं और किन्हें परीक्षा देना आवश्यक है। ऐसे में सभी शिक्षकों से ऑनलाइन आवेदन कराने के बजाय विभाग को टीईटी से वंचित शिक्षकों की सूची जारी करनी चाहिए। उनका कहना है कि इससे शिक्षकों के बीच भ्रम की स्थिति दूर होगी और यह स्पष्ट हो सकेगा कि किन्हें परीक्षा में शामिल होना है। विभाग संबंधित शिक्षकों को सीधे निर्देश जारी कर भी परीक्षा में शामिल होने की सूचना दे सकता है। ऑनलाइन के बजाय ऑफलाइन परीक्षा की मांग शासकीय शिक्षक संगठन ने ऑनलाइन के बजाय ऑफलाइन टीईटी कराने की मांग की है। संगठन के मुताबिक, ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी, तकनीकी संसाधनों और सर्वर से जुड़ी समस्याओं के कारण शिक्षकों को परेशानी हो सकती है। संगठन का मानना है कि परीक्षा के सुचारु और पारदर्शी संचालन के लिए ऑफलाइन परीक्षा बेहतर विकल्प है।
