प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए SAGA ग्रुप से जुड़े ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया है। ED के हेडक्वार्टर यूनिट नई दिल्ली ने मुंबई और भोपाल में समीर अग्रवाल तथा उनके सहयोगियों से जुड़े कई आवासीय और कमर्शियल कैम्पर पर छापेमारी की है। छापेमारी के दौरान ED ने बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए। इनमें ₹30 करोड़ से अधिक मूल्य के लिस्टेड शेयर और सिक्योरिटीज, म्यूचुअल फंड, LIC पॉलिसियां, बैंक खातों में मौजूद रकम तथा 9 हाई-एंड वाहन शामिल हैं। इस कंपनी ने निवेशकों को 3 से 5 साल में रकम दोगुनी या तिगुनी होने तथा कार जैसे उपहार देने का भरोसा देकर झांसा दिया था। संपत्तियों को किया फ्रीज इसके अलावा ED ने 13 से 16 अगस्त 2026 के बीच की गई सर्चिंग के दौरान ₹1.53 करोड़ नकद, करीब ₹35 लाख की विदेशी मुद्रा तथा ₹5.25 करोड़ मूल्य के सोने के आभूषण और चांदी की बुलियन भी जब्त की है। इसके अलावा अपराध से जुटाई गई कई संपत्तियों को फ्रीज किया गया। ईडी के अनुसार यह मामला लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिप्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी (LUCC) और उससे जुड़ी अन्य सहकारी समितियों के माध्यम से SAGA ग्रुप पोंजी घोटाले से संबंधित है। ED के अनुसार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों में पुलिस द्वारा LUCC और उससे जुड़ी सहकारी समितियों के खिलाफ दर्ज कई FIR के आधार पर जांच शुरू की गई थी। ₹10 हजार करोड़ से अधिक की संपत्ति जुटाने का आरोप जांच के दौरान यह पाया है कि वर्ष 2009 से SAGA ग्रुप द्वारा संचालित रिकरिंग डिपॉजिट, फिक्स्ड डिपॉजिट और मंथली इनकम जैसी योजनाओं में लोगों को निवेश के लिए कथित तौर पर आकर्षित किया गया। निवेशकों को 3 से 5 साल में रकम दोगुनी या तिगुनी होने तथा कार जैसे उपहार देने का भरोसा दिया गया। ED के अनुसार इन वादों के पीछे वास्तविक कारोबार का पर्याप्त आधार नहीं था और कथित तौर पर फर्जी बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तथा अवास्तविक रिटर्न के वादों के जरिए जनता से ₹10,000 करोड़ से अधिक की रकम जुटाई गई। निवेश की रकम कथित तौर पर दूसरी जगह भेजी गई जांच एजेंसी के मुताबिक शुरुआत में कुछ निवेशकों को भुगतान किया गया, लेकिन निवेश की अधिकांश रकम को कथित तौर पर समीर अग्रवाल और उनके सहयोगियों ने निजी लाभ तथा एजेंटों और सहयोगियों को मार्केट कमीशन के रूप में इस्तेमाल किया। ईडी का कहना है कि जनता से मुख्य रूप से नकद में रकम जुटाई जाती थी। इसके बाद इसे क्षेत्रीय कैश-चेस्ट के जरिए आगे भेजा जाता था। इस धन का इस्तेमाल भारत और विदेशों में चल-अचल संपत्तियों में निवेश के लिए किया गया। 50 से अधिक शेल कंपनियों का नेटवर्क तलाशी के दौरान हुई जांच में ED को कथित तौर पर 50 से अधिक शेल कंपनियों का एक नेटवर्क मिला है। इन कंपनियों को उसके द्वारा चिन्हित ऑपरेटरों के नियंत्रण में संचालित किया जा रहा था और धन को शेल कंपनियों तथा हवाला चैनलों के माध्यम से इधर-उधर किए जाने के संकेत मिले हैं। SAGA ग्रुप के प्रमुख पर भी कार्रवाई ED के अनुसार समीर अग्रवाल SAGA ग्रुप का सीएमडी और प्रमुख नियंत्रक बताया गया है। जांच एजेंसी का कहना है कि वह देश छोड़ चुका है और फरार है। इस मामले में ED पहले ही दो अलग-अलग Provisional Attachment Orders के तहत संपत्तियों की अस्थायी कुर्की की कार्रवाई कर चुका है। वहीं, ग्रुप के एक प्रमुख कार्यकारी रवि शंकर तिवारी को 14 जुलाई 2026 को PMLA के तहत गिरफ्तार किया गया था। ED ने इस मामले में 24 जुलाई 2026 को विशेष अदालत के समक्ष Prosecution Complaint भी दाखिल की है।
