मुरैना में ग्रीन फील्ड हाईवे निर्माण के दौरान ग्राम डोंगर पुर लोधा के पास खुदाई में पुराने चांदी के सिक्के मिले हैं। बताया जा रहा है कि सोमवार शाम करीब 5 बजे खुदाई के दौरान कुछ सिक्के ग्रामीणों को मिले। वहीं, एक जेसीबी संचालक को भी खुदाई के दौरान सिक्के मिलने की बात सामने आई है। सिक्के मिलने का वीडियो सामने आने के बाद मंगलवार को प्रशासन को मामले की जानकारी मिली। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस को सिक्के बरामद कर सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं। सिक्कों पर जॉर्ज पंचम और 1913 अंकित मिले सिक्कों पर ‘GEORGE V KING EMPEROR’ और वर्ष 1913 अंकित है। सिक्के के दूसरे हिस्से पर ‘ONE RUPEE INDIA’ लिखा हुआ है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार सिक्के ब्रिटिश काल के हैं। इनकी ऐतिहासिक स्थिति और अन्य जानकारी की पुष्टि संबंधित विभाग की जांच के बाद होगी। 11.6 ग्राम वजन, 91 प्रतिशत चांदी पुरातत्व विभाग के जिला अधिकारी अशोक शर्मा के अनुसार, बरामद सिक्के का वजन करीब 11.6 ग्राम है। इसमें करीब 91 प्रतिशत चांदी होने की जानकारी सामने आई है। उन्होंने बताया कि सिक्के पर 1913 और ‘One Rupee India’ अंकित है। ग्रामीणों को कुल कितने सिक्के मिले हैं, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। जेसीबी संचालक से भी जानकारी ली जा रही खुदाई के दौरान एक जेसीबी संचालक को भी सिक्के मिलने की बात सामने आई है। प्रशासन अब यह पता कर रहा है कि खुदाई के दौरान कुल कितने सिक्के मिले और वे किस स्थान से निकले। इस संबंध में थाना माता बसैया पुलिस से भी जानकारी ली जा रही है। पुलिस को सिक्के कलेक्ट करने के निर्देश एडीएम अश्वनी रावत ने बताया कि ग्रीन फील्ड हाईवे निर्माण के दौरान खुदाई में पुराने चांदी के सिक्के मिलने की जानकारी मिली है। पुलिस को मामले की जांच कर सिक्कों को कलेक्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। जांच पूरी होने के बाद बरामद सिक्कों को पुरातत्व विभाग के सुपुर्द किया जाएगा। सिक्कों की संख्या और स्थान की जानकारी जुटा रहा प्रशासन फिलहाल प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि खुदाई के दौरान कुल कितने सिक्के मिले हैं और ये किस स्थान से बरामद हुए हैं। पुलिस और पुरातत्व विभाग की जांच के बाद सिक्कों से जुड़ी अन्य जानकारी सामने आने की उम्मीद है। जॉर्ज पंचम का 1 रुपये का चांदी का सिक्का के बारे में जानिए ब्रिटिश भारत के दौर में जारी किया गया जॉर्ज पंचम (George V King Emperor) का 1 रुपये का सिक्का ऐतिहासिक महत्व रखने वाला चांदी का सिक्का है। यह सिक्का जॉर्ज पंचम के शासनकाल में 1911 से 1936 के बीच जारी किया गया था। उस दौर में भारत ब्रिटिश शासन के अधीन था और सिक्कों पर तत्कालीन ब्रिटिश सम्राट की तस्वीर और नाम अंकित किए जाते थे। जॉर्ज पंचम के 1 रुपये के सिक्के में करीब 91.7 प्रतिशत चांदी होती है। इसका वजन लगभग 11.66 ग्राम और व्यास करीब 30.5 मिलीमीटर होता है। इन सिक्कों की ढलाई बॉम्बे (मुंबई) और कलकत्ता (कोलकाता) टकसाल में की गई थी। सिक्के का डिजाइन सिक्के के सामने वाले हिस्से पर जॉर्ज पंचम का मुकुट पहने हुए बाईं ओर देखता हुआ चित्र बना होता है। इसके चारों ओर अंग्रेजी में ‘GEORGE V KING EMPEROR’ लिखा होता है। सिक्के के दूसरी तरफ बीच में ‘ONE RUPEE INDIA’ अंकित होता है। इसके साथ सिक्का जारी होने का वर्ष भी लिखा होता है। डिजाइन के चारों ओर फूलों की सजावटी माला बनी होती है, जिसमें गुलाब, थीस्ल, शेमरॉक और कमल जैसे फूलों की आकृतियां शामिल हैं। 1913 का सिक्का क्यों खास है? 1913 में जारी हुआ जॉर्ज पंचम का 1 रुपये का सिक्का इसी श्रृंखला का हिस्सा है। ऐसे पुराने सिक्कों की पहचान केवल वर्ष से नहीं, बल्कि उनकी टकसाल, स्थिति, दुर्लभता और डिजाइन में मौजूद विशेषताओं से भी होती है। इसी वजह से किसी पुराने सिक्के की कीमत तय करने से पहले उसका विशेषज्ञ मूल्यांकन जरूरी माना जाता है। बाजार में कितनी हो सकती है कीमत? जॉर्ज पंचम के 1 रुपये के सामान्य पुराने सिक्कों की कीमत उनकी कंडीशन, दुर्लभता और मांग के आधार पर अलग-अलग हो सकती है। कुछ सामान्य सिक्कों को संग्रहकर्ताओं के बीच कुछ हजार रुपये में खरीदा-बेचा जाता है, जबकि दुर्लभ वर्ष या विशेष डिजाइन वाले सिक्कों की कीमत इससे काफी अधिक हो सकती है। 1911 का ‘पिग रुपया’ इस श्रृंखला का सबसे चर्चित दुर्लभ सिक्का माना जाता है। इसके अलावा कुछ वर्षों में कम संख्या में ढले सिक्कों की संग्रहणीय कीमत भी अधिक हो सकती है। हालांकि, 1913 के किसी सिक्के की निश्चित बाजार कीमत केवल वर्ष देखकर तय नहीं की जा सकती। सिक्के की वास्तविक स्थिति, टकसाल का निशान, दुर्लभता और प्रामाणिकता की जांच के बाद ही इसकी सही कीमत का अनुमान लगाया जा सकता है।
