राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (एनआईटीटीटीआर), भोपाल को केंद्र ने डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया। इसमें अहम शर्त है कि यहां आईआईटी और एनआईटी की तरह नियमित यूजी और पीजी प्रोग्राम शुरू नहीं होंगे। इसके बाद भी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से 7 बीटेक कोर्स शुरू किए हैं। 270 सीटों पर प्रवेश भी हो चुके हैं। सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स इस तरह बीटेक कोर्स शुरू किए जाने पर सवाल खड़े कर रहे हैं। उनका कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा जारी अधिसूचना स्पष्ट नहीं है। एनआईटीटीटीआर भोपाल के साथ ही एनआईटीटीटीआर कोलकाता, चंडीगड़ और चेन्नई को भी डीम्ड यूनिवर्सिटी बनाया गया था। इन तीन संस्थानों में यूजी कोर्स शुरू नहीं किए गए हैं। बीटेक के अलावा 11 पीजी कोर्स भी संचालित किए जा रहे हैं। संस्थान का दावा- हमारे प्रोग्राम अन्य शैक्षणिक संस्थानों से अलग, क्वालिटी टीचर्स बनाना ही हमारा मकसद अहम बिंदु… नए शैक्षणिक पाठ्यक्रम शुरू किए जाने थे भास्कर एक्सपर्ट – प्रो. पीके चांदे, पूर्व डायरेक्टर, मैनिट जल्दबाजी में कोर्स शुरू नहीं करने थे, अधिसूचना असमंजस वाली अधिसूचना में इसे डीम्ड विवि का दर्जा देकर कोर्स संचालित करने की अनुमति दी। लेकिन शर्त लगा दी कि यूजीसी नॉर्म्स फॉलो करना होगा। साथ ही आईआईटी-एनआईटी की तरह रूटीन कोर्स संचालित नहीं करने हैं। तीनों बातें विरोधाभासी हैं। यानी बीटेक, एमटेक जैसे कोर्स शुरू नहीं हो सकते। नॉन टेक्निकल कोर्स भी शुरू नहीं किए जा सकते क्योंकि यह इंस्टीट्यूट टेक्निकल टीचर्स ट्रेनिंग के लिए है। इसलिए अधिसूचना में सुधार की जरूरत है। वरना प्रवेशित छात्र परेशानी में आ सकते हैं। नाम वही है पर कोर्स अलग हैं किसी भी संस्थान में यूजी-पीजी स्तर के वही प्रोग्राम संचालित किए जा सकते हैं जो यूजीसी से अप्रूव हों। इसलिए बीटेक नाम से यूजी कोर्स शुरू किए। लेकिन हमारे प्रोग्राम आईआईटी, एनआईटी से अलग हैं। ह्यूमन रिर्सोस, लैब और स्थानीयता के आधार पर बीटेक कोर्स शुरू किए गए हैं। इन प्रोग्राम्स को पढ़ने के बाद क्वालिटी टीचर्स तैयार हो सकेंगे। -प्रो. सीसी त्रिपाठी, डायरेक्टर, एनआईटीटीटीआर, भोपाल
