जहां कभी नक्सलियों का दबदबा था, वहां अब तिरंगा लहराएगा। बड़ी संख्या में बाइकर्स और बस्तर के युवा इस यात्रा में शामिल हुए हैं। डिप्टी सीएम विजय शर्मा बुलेट चलाकर यात्रा का नेतृत्व कर रहे हैं। यात्रा के दौरान जहां जवान शहीद हुए, वहां से मिट्टी इकट्ठा की जा रही है। 3 दिवसीय बस्तर तिरंगा यात्रा आज नारायणपुर से शुरू हुई। सभी बाइकर्स हिड़मा और देवा जैसे नक्सली कमांडरों के गढ़ से तिरंगा लेकर गुजर रहे हैं। यात्रा दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर के संवेदनशील इलाकों से होकर गुजरेगी। सुरक्षा के लिहाज से इन इलाकों की मेटल डिटेक्टर से जांच हो रही है। यात्रा में बुरकापाल, मिनपा-ताड़मेटला, जगरगुंडा, सिलगेर और टेकलगुड़ेम जैसे इलाके शामिल हैं। 14 अगस्त को कर्रेगुट्टा पहाड़ी पर तिरंगा फहराने के साथ यात्रा का समापन होगा। डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा कि इस यात्रा के जरिए यह संदेश दिया जा रहा है कि बस्तर नक्सलमुक्त हो चुका है। तिरंगा यात्रा से जुड़ी तस्वीरें देखिए… ग्रामीणों ने की रोजगार की मांग कोंडागांव जिले के आखिरी गांव कड़ेनार में भी तिरंगा यात्रा पहुंची। यह इलाका दंतेवाड़ा, कोंडागांव और नारायणपुर जिलों की सीमा से लगा हुआ है। यात्रा से पहले यहां प्रशासन की टीम के पहुंचने पर ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर उनके पास पहुंचे। ग्रामीणों ने गांव में रोजगार उपलब्ध कराने की मांग की। उनका कहना है कि रोजगार के अभाव में गांव के लोग दूसरे राज्यों में पलायन करने को मजबूर हैं। नक्सलियों के कोर जोन से गुजरी तिरंगा यात्रा नारायणपुर से शुरू हुई तिरंगा यात्रा बारसूर के इंद्रावती सातधार पुल से गुजरी। दंतेवाड़ा के रास्ते अबूझमाड़ का प्रवेश द्वार कहे जाने वाले इस इलाके को कभी नक्सलियों का कोर जोन माना जाता था। इसी इलाके से तिरंगा लेकर बाइकर्स का काफिला आगे बढ़ा। यात्रा से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे लाइव ब्लॉग देखें…
